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NIA की गिरफ्त में आए झारखंड के रॉबिनहुड राजा पीटर की कहानी पूरी फिल्मी है

दर्जनों लड़कियों की शादी करवा चुके राजा पीटर ने दूसरी शादी रांची के चर्च रोड की रहनेवाली एक दिव्यांग सामाजिक कार्यकर्ता आरती से की

Anand Dutta Updated On: Oct 12, 2017 03:36 PM IST

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NIA की गिरफ्त में आए झारखंड के रॉबिनहुड राजा पीटर की कहानी पूरी फिल्मी है

झारखंड के इस नेता की कहानी पूरी फिल्मी है. नाम है राजा पीटर. राजा पीटर अपनी पत्नी के साथ हुए दुर्व्यवहार का बदला लेने के लिए पहले तो अपराध जगत के संपर्क में आया. फिर इसमें धंसता ही चला गया. अपराधों में नाम आने की वजह से उसे सरकारी नौकरी से हाथ धोना पड़ा. उस पर कई मुकदमे लाद दिए गए. बचने के लिए वो राजनीति में कूदा. रॉबिनहुड की छवि के साथ उसने दमदार राजनीति की शुरुआत. झारखंड की सरकार में मंत्री बना लेकिन कानून के फंदे से नहीं बच पाया.

हाल ही में राज्य के इस पूर्व मंत्री को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गिरफ्तार किया है. राजा पीटर पर झारखंड के पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा की हत्या की साजिश रचने का आरोप है. इसी आरोप में एनआईए ने उसे गिरफ्तार किया है. 8 अक्तूबर की रात को एनआईए ने हत्याकांड की जांच में जो सबूत इकट्ठा किया है उसके मुताबिक पूरा षड्यंत्र राजा पीटर ने रचा था. इसके लिए उन्होंने नक्सलियों को एक करोड़ रुपए दिए थे. फिलहाल वह एनआईए के रिमांड पर हैं.

इस विवादित, चर्चित, स्टाइलिश और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो के धुर विरोधी नेता की खासियत यह है कि मंच पर किशोर कुमार के गाने बहुत ही फील के साथ गाता है.

पत्नी के दुर्व्यवहार का बदला लेने बन गया अपराधी

गोपाल सिंह पातर उर्फ राजा पीटर ने 1979 में टाटा स्टील में ट्रेड अप्रेंटिस की परीक्षा दी थी. आदिवासी और मूलवासी कैटगरी में रिजल्ट में अव्वल रहे. कर्मचारी के तौर पर टाटा स्टील ज्वाइन किया. नौकरी शुरू की तो विवाह हुआ मनीषा उर्फ बेला खेस से.

इसी बीच कुख्यात डकैत युनूस के सहयोगी शेखर शर्मा ने राजा पीटर की पत्नी से अभद्रता की. राजा को यह नागवार गुजरा और उसने शेखर को बुरी तरह मारा. चूंकि शेखर अपराधियों से सांठगांठ रखता था, ऐसे में खुद को बचाने के लिए पीटर भी अपराध की दुनिया की तरफ बढ़ता चला गया.

इस बीच मुकदमों का सिलसिला बढ़ता ही चला गया. इन मुकदमों की वजह से राजा पीटर को नौकरी भी गंवानी पड़ी. गरीबी अलग. इस बीच एक दिन पत्नी स्टोव पर खाना पका रही थी कि हादसा हुआ और उसकी जलने से मौत हो गई.

राबिनहुड छवि के साथ उतरा सामाजिक क्षेत्र में 

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इसके बाद वह पूरी तरह अपराध की दुनिया में उतर आया. हालांकि इस बीच सामाजिक सेवा भी वह करने लगा. गरीबों की शादी और हर जरूरतमंद की मदद आदत में शामिल. इसके बाद तो इलाके के लोगों ने उसे चार्ल्स पीटर का नाम दे दिया.

साल 1995 में जमशेदपुर में क्राइम कंट्रोल ऑपरेशन में वहां के तात्कालिक एसपी डॉ अजय कुमार के हत्थे राजा पीटर चढ़ गया. तब तक उस पर मर्डर, आर्म्स एक्ट, धमकाने और मारपीट के कई केस हो चुके थे. राजा का इतिहास जानने के बाद एसपी डॉ अजय ने उसे जिलाबदर करवा दिया. बाद में आईपीएस अजय कुमार भी राजनीति में आ गए. वर्तमान में वह कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं.

जिलाबदर किए जाने के बाद राजा पीटर ने रांची से 58 किसोमीटर दूर तमाड़ इलाके में अपना जनाधार बनाना शुरू किया. रॉबिनहुड की छवि के साथ राजनीति में उतरे राजा पीटर को तमाड़ के इलाके में खूब प्यार भी मिला. लेकिन उसी इलाके में मजबूत पैठ और जनाधार वाले विधायक रमेश सिंह मुंडा बड़ी चुनौती थे.

ऐसे में राजनीति में मुकाम पाने की चाहत में राजा पीटर पर उनकी हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा. 9 जुलाई 2009 को बुंडू के एक स्कूल के कार्यक्रम में शामिल होने गए मुंडा की हत्या नक्सलियों ने कर दी.

कद्दावर नेता शीबू सोरेन को हराकर भी नहीं पहुंचे विधानसभा 

साल 2015 में राममोहन नाम का एक नक्सली पुलिस की गिरफ्त में आया. अपनी स्वीकारोक्ति में उनसे इस घटना का जिक्र किया कि विधायक रमेश सिंह मुंडा हत्याकांड में उसका हाथ था. इसमें एक सफेदपोश भी शामिल था. राममोहन उस वक्त तक नामी नक्सली कुंदन पाहन का दाहिना हाथ हुआ करता था. गिरफ्तारी के समय वह जोनल कमांडर भी बन चुका था.

राजा पीटर उस वक्त चर्चा में आए जब उन्होंने शीबू सोरेन को विधानसभा उप चुनाव में हराया था. साल 2008 में अर्जुन मुंडा की सरकार को गिराकर मधु कोड़ा सीएम बने थे. इसी साल मधु कोड़ा की सरकार भी गिर गई थी. जेएमएम के नेता शीबू सोरेन सीएम बने थे.

shibu soren

सीएम बने रहने के लिए विधायक बनना जरूरी था, सो उन्होंने इसके लिए तमाड़ विधानसभा चुना. यहां राजा पीटर पहले ही काफी चर्चित हो चुका था. लेकिन शीबू को लगा कि भला सीएम रहते उन्हें कौन हरा पाएगा. चुनाव में बीजेपी ने राजा पीटर को सपोर्ट कर दिया.

नतीजा बिल्कुल चौंकाने वाला रहा, शीबू हार गए, उन्हें कुर्सी गंवानी पड़ी. उस वक्त राजा पीटर झारखंड पार्टी नामक दल के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे. हालांकि इस जीत के बावजूद राजा पीटर विधानसभा का मुंह नहीं देख पाए.

झारखंड के पत्रकार सुशील सिंह बताते हैं वह एकमात्र ऐसे विधायक हैं जो पहली बार चुनाव जीतने के बावजूद विधानसभा का मुंह नहीं देख पाए, क्योंकि शीबू के हारने के बाद झारखंड में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया. इसके बाद हुए चुनाव में वह फिर जीते. फिर से अर्जुन मुंडा की सरकार बनी, राजा पीटर को उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग का मंत्री बनाया गया.

शरद यादव के करीबी रहे हैं राजा पीटर

राजा पीटर नीतीश कुमार के नहीं, बल्कि शरद यादव के नजदीकी माने जाते रहे हैं. वह एक बार जेडीयू के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष भी बने. लेकिन पार्टी छोड़ने के बाद दुबारा वह कभी जीत नहीं पाए. साल 2014 विधानसभा चुनाव में एक बार फिर उनके बीजेपी में शामिल होने की बात हुई. राज्य स्तर पर पार्टी नेताओं ने जोर भी लगाया.

लेकिन सुदेश महतो के नेतृत्व वाली आजसू से गठबंधन होने के बाद मामला खटाई में पड़ गया. क्योंकि दोनों एक दूसरे को हराने के लिए किसी भी हद तक जा सकते थे. हाल यह था कि सुदेश महतो अपने विधानसभा सिल्ली में कम, राजा पीटर के इलाके तमाड़ में ज्यादा ध्यान देते थे.

बीते विधानसभा चुनाव में भी जब राजा पीटर ने सिल्ली में सुदेश के प्रतिद्वंदी अमित महतो की जीत के लिए हर दांव खेल दिया. अमित जीत भी गए. कह सकते हैं कि सीएम को हराने वाले इस नेता ने एक्स डिप्टी सीएम को भी हराया.

हालांकि इस दौरान जब रांची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनसभा को संबोधित करने आए, तो राजा पीटर दर्शक दीर्घा में बैठकर इंतजार करते दिखाई दिए थे.

दर्जनों लड़कियों की शादी करवा चुके राजा पीटर ने दूसरी शादी की. वह भी रांची के चर्च रोड की रहनेवाली एक दिव्यांग सामाजिक कार्यकर्ता आरती से. मंच पर किशोर कुमार के गाने पूरे फील से गानेवाला यह नेता आनेवाले समय में गुमनामी में खो जाता है या फिर अपने राजनीतिक घटनाक्रम के लिए मशहूर झारखंड की राजनीति में खुद को फिर से स्थापित करता है. यह देखने वाली बात होगी.

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