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टमाटर की कीमत 'लाल': सरकार डाल-डाल, मुनाफाखोर पात-पात

पिछले कुछ दिनों के दौरान 10 से 15 रुपए प्रति किलो बिकने वाले टमाटर के दाम में जबरदस्त तेजी आई है

Ravishankar Singh Ravishankar Singh | Published On: Jul 05, 2017 02:32 PM IST | Updated On: Jul 05, 2017 02:32 PM IST

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टमाटर की कीमत 'लाल': सरकार डाल-डाल, मुनाफाखोर पात-पात

देश में पिछले दो-तीन हफ्तों में टमाटर की कीमतों में चार से पांच गुना तक बढ़ोतरी हुई है. सरकार के लाख दावों के बावजूद मुनाफाखोर चांदी काट रहे हैं. फुटकर बाजार में टमाटर के दाम हर दिन चढ़ रहे है. हालात यह है कि देश में टमाटर आम से भी ज्यादा महंगे हो गए हैं.

टमाटर के दाम में तेजी से हर घर के रसोई का बजट बिगड़ गया है. देश के कई इलाकों में टमाटर के रेट 80 से 100 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं.

टमाटर की आसमान छूती कीमतों के लिए मॉनसून को जिम्मेदार माना जा रहा है. बारिश की वजह से टमाटर मंडियों तक नहीं पहुंच पा रहा है. करीब दो सप्ताह पहले तक 15-20 रुपए किलो की दर से बिक रहे टमाटर की कीमत देश के कई इलाकों में अब 80 से 100 रुपए किलो तक पहुंच गई है.

टमाटर व्यापारियों का कहना है कि बारिश के चलते हिमाचल और महाराष्ट्र से आने वाला टमाटर मंडियों तक नहीं पहुंच रहा है. हरियाणा में टमाटर के फसल बर्बाद होने के कारण दिल्ली में टमाटर की सप्लाई कम हो गई है. इस वजह से दिल्ली-एनसीआर में टमाटर के दाम काफी बढ़ गए हैं.

टमाटर के अचानक कैसे बढ़ गए दाम?

देश में इस साल टमाटर की अच्छी पैदावार हुई थी. कुछ महीने पहले तक जिस टमाटर को किसान एक रुपए और दो रुपए प्रति किलो बेचने को मजबूर थे. उस टमाटर की कीमत में अचानक इतनी उछाल कैसे हो गई. आखिर 50 से 60 रुपए कहां जा रहे हैं?

पिछले कुछ दिनों में देश भर में टमाटर के दाम में जबरदस्त उछाल आई है.

पिछले कुछ दिनों में देश भर में टमाटर के दाम में जबरदस्त उछाल आई है.

टमाटर के दाम बढ़ने के पीछे बारिश का बहाना बनाया जा रहा है. पर पिछले कुछ सालों का रिकॉर्ड देखने से यह साफ होता है कि इतनी बुरी स्थिति पहले कभी नहीं हुई थी. यह मुनाफाखोरों के द्वारा गड़बड़झाले का इशारा कर रहा है.

मौसम की वजह से हर साल जून से सितंबर के बीच टमाटर की कीमत बढ़ जाती है. लेकिन, इस बार फसल की अच्छी पैदावार होने के कारण 15 दिन पहले तक टमाटर के दामों में तेजी नहीं आई थी. लेकिन, जैसे ही बारिश हुई, टमाटर की मंडी में आवक कम होने लगी और दाम ऊपर चढ़ने लगे.

दिल्ली की आजादपुर मंडी में टमाटर की थोक कीमत 50 से 65 रुपए प्रति किलो पहुंच गई है. जबकि, रिटेल मार्केट में यह 80 से 100 रुपए किलो तक बिक रहा है. देश के बाकी हिस्सों में भी टमाटर के दाम इसी तरह बढ़े हैं.

टमाटर व्यापारियों का मानना है कि बारिश हो जाने से हिमाचल से आने वाला टमाटर रास्ते में फंस गया या फिर खड़े-खड़े सड़ गया. इससे मंडियों में टमाटर की किल्लत पैदा हो गई और दाम बढ़ गए.

पिछले सप्ताह तक केवल टमाटर, धनिया के दाम बढ़े थे. लेकिन, इस सप्ताह से दूसरी सब्जियों के दामों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. सब्जियों के दाम में काफी अंतर है. किसानों से आधी कीमत पर सब्जी खरीद कर व्यापारी उसे मनमाने कीमत पर बेच रहे हैं.

सब्जियों के दाम बढ़ने का सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्गीय और गरीब लोगों पर पड़ रहा है. थोक में मात्र 10 रुपए किलो बिकने वाला सहजन अब 40 रुपए किलो के हिसाब से बिक रहा है.

खुदरा बाजार में दूसरी सब्जियों के भी बढ़े भाव

भिंडी भी 50 रुपए प्रति किलो के रेट तक पहुंच गया है. और तो और धनिया और मिर्च ने भी लोगों को रुलाना शुरू कर दिया है. इसके अलावा पत्ता गोभी, परवल जैसी सब्जियां भी थोक में काफी कम में बोली लगाई जा रही थी, लेकिन खुदरा में इनकी कीमतें दो से चार गुना तक बढ़ गई हैं.

गाजियाबाद के वैशाली सेक्टर 6 में सब्जी बेचने वाले एक व्यापारी नंद कुमार ने फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहा, ‘टमाटर की बिक्री में काफी कमी आ गई है. अच्छी क्वालिटी की टमाटर खरीदने वाले अब एक-दुक्के लोग ही आते हैं. जो आते भी हैं वह आधा किलो से ज्यादा नहीं खरीदते हैं. इसके अलावा कुछ हरी सब्जियों के भाव में भी तेजी आई है.’

तमाम हरी सब्जियों के दाम अचानक में आई तेजी के बावजूद आलू और प्याज के दाम स्थिर बने हुए हैं

तमाम हरी सब्जियों के दाम अचानक में आई तेजी के बावजूद आलू और प्याज के दाम स्थिर बने हुए हैं

पिछले सप्ताह की तरह इस सप्ताह भी आलू-प्याज की कीमत में स्थिरता बनी हुई है. आलू-प्याज की कीमत कई सप्ताह से स्थिर बनी हुई है. फुटकर में यह दोनों ही 10 से 15 रुपए किलो के हिसाब से बिक रहे हैं.

व्यापारियों का कहना है कि आलू-प्याज की आवक अभी पर्याप्त है. इसके कारण इनकी कीमत में बढ़ोतरी की संभावना नहीं के बराबर है.

केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने पिछले सप्ताह कहा था कि यह सीजनल तेजी है. कई जगहों पर फसल बर्बाद होने से दाम बढ़े हैं. अगले कुछ दिन में दाम पर काबू पा लिया जाएगा. लेकिन, एक सप्ताह के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है.

दिल्ली की आजादपुर और ओखला मंडियों में टमाटर के भाव में कमी नहीं आ रही है. यही हाल गाजियाबाद के साहिबाबाद सब्जी मंडी में देखने को मिल रही है.

टमाटर को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें परेशान

टमाटर के रिटेल दामों में अचानक आई तेजी से केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकारें भी परेशान हो गई हैं. खाद्य मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों को मुनाफाखोरों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है.

बढ़ती कीमतों के चलते लोग अब कम सब्जी खरीदकर अपना गुजारा करने को मजबूर हैं

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दिल्ली सरकार ने भी टमाटर को लेकर विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं. दिल्ली सरकार ने सख्त रवैया अख्तियार करते हुए टमाटरों की जमाखोरी करने वालों के यहां छापेमारी कर जेल भेजने का आदेश जारी किया है.

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