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रिकार्डतोड़ मतदान ने मैदानी सीटों पर टिकाई नजर!

उत्तराखंड में आम धारणा से अलग इस बार की वोटिंग में बिल्कुल अलग पैटर्न सामने आया है

Anant Mittal Updated On: Feb 26, 2017 05:10 PM IST

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रिकार्डतोड़ मतदान ने मैदानी सीटों पर टिकाई नजर!

उत्तराखंड में बीती 15 फरवरी को जहां महिलाओं ने मतदान में मर्दों को निर्णायक मात दी है वहीं राज्य की चुनाव मशीनरी ने भी उस दिन पड़े कुल मतों का प्रतिशत आंकने में गड़बड़ी का नया रिकॉर्ड बना डाला.

राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी राधा रतूड़ी के अनुसार उत्तराखंड के चौथे विधानसभा चुनाव में कुल मतदान का संशोधित आंकड़ा 65.66 फीसद है.

यह बात दीगर है कि 15 फरवरी की शाम उन्होंने ही 68 फीसद से अधिक मतदान करने के लिए वोटरों की पीठ ठोंकी थी. इतना ही नहीं उन्होंने तो अंतिम गिनती में मतदान का आंकड़ा 70 फीसद के पार पहुंचने का नया रिकॉर्ड बनने की उम्मीद भी जताई थी.

इसके बजाए करीब डेढ़ फीसद कम मतदान का तथ्य सामने आने पर राज्य की निर्वाचन मशीनरी की हेठी हो गई. इसकी जिम्मेदारी तय करने के लिए चार जिलों के निर्वाचन अधिकारियों से जवाब तलब किया गया है.

बहरहाल बढ़-चढ़ कर वोट डालने में महिलाओं द्वारा बाजी मारने के अलावा भी मतदान से कई अन्य रुझान जाहिर हुए हैं. यह आम धारणा टूटी है कि पहाड़ी चुनाव क्षेत्रों के वोटर ही टूट कर वोट डालते हैं.

पहाड़ी इलाकों के मुकाबले मैदानी इलाकों ने मारी बाजी

Uttarakhand Village 4

(फोटो: फेसबुक से साभार)

उत्तराखंड में इस बार मैदानी हरिद्वार और तराई के उधमसिंह नगर जिले ने मतदान में बाजी मारी है. इन दोनों जिलों में विधानसभा की 20 सीट हैं. उधम सिंह नगर में रिकार्ड तोड़ 75.79 फीसद यानी राज्य में सबसे अधिक वोट पड़े हैं.

मैदानी जिले हरिद्वार के वोटरों ने भी उससे मात्र दशमलव दस फीसद कम यानी 75.69 फीसद वोट डालकर रिकार्ड बनाया है. इन दोनों जिलों के वोटरों ने राजधानी वाले जिले देहरादून को भी पछाड़ दिया जहां 63.45 प्रतिशत ही मतदान हुआ.

वहां पुरुष मतदाताओं के मुकाबले महिलाओं द्वारा वोट डालने में बढ़त भी महज 4.63 फीसद दर्ज हुई है. नैनीताल जिले में यह और भी कम बस चार फीसद ही है.

रिकॉर्ड 18 फीसद अधिक मतदान करके रुद्रप्रयाग और टिहरी जिलों की महिलाओं ने पुरुष मतदाताओं को निर्णायक मात दी है. इसके एकदम उलट हरिद्वार जिले में महिलाओं के वोट पुरुष मतदाताओं से बमुश्किल पौना फीसद ही अधिक पाए गए.

इस तरह कम से कम हरिद्वार जिले के पुरुष मतदाता तो वोट डालने के उत्साह में महिलाओं से होड़ करते दिखे. उधमसिंह नगर जिले में भी महिलाओं के मुकाबले महज तीन फीसद वोट ही पुरुष मतदाताओं ने कम डाले हैं.

अलबत्ता बागेश्वर जिले में महिलाओं ने पुरूषों से 17.75 फीसद अधिक, चंपावत जिले में साढ़े सत्रह फीसद ज्यादा, अल्मोड़ा जिले में साढ़े पंद्रह फीसद अधिक, पौड़ी जिले में तेरह फीसद और चमोली जिले में साढ़े दस प्रतिशत अधिक तथा उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जिलों में सवा नौ फीसद एवं आठ फीसद अधिक वोट डाले हैं.

इससे यह धारणा फिर मजबूत हुई कि पहाड़ में तो महिलाओं द्वारा मतदान का प्रतिशत हमेशा ही ज्यादा रहता है. साल 2012 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में भी राज्य की महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले तीन फीसद अधिक वोट डाले थे.

उससे पहले 2007 के चुनाव में भी पुरूषों से एक फीसद अधिक महिलाओं ने मतदान किया था. पहाड़ों में जितनी उंचाई पर जाओ उतने ही गांव, मर्दों से खाली मिलेंगे.

रोजगार के लिए वोट किया पहाड़ी महिलाओं 

uttarakhand voting

खेती-बाड़ी से लेकर बच्चों और बूढ़ों की देखभाल, चौका-चूल्हा, मवेशियों के लिए चारे का इंतजाम, उन्हें चराने ले जाना, हाट-बाजार से सौदा सुलफ लाने तक सारा काम पहाड़ की औरतों को खुद ही करना पड़ता है. इसके बावजूद उनके मनोबल को बनाए रखने का साधन पति से फोन पर बात कर लेना भर है.

विकट परिस्थितियों से मजबूरी में जूझना और अपनी बेबसी पर अकेले में आंसू बहा लेने का मतलब पहाड़ की औरतों की उमंगें मर जाना नहीं है. हालात से मजबूर मगर जीवट की मिसाल पहाड़ी महिलाओं द्वारा बढ़-चढ़ कर मतदान का मकसद ही अपने पति को़ घर-गांव के आसपास रोजगार दिलाने वाली सरकार बनाना है.

यदि महिलाओं द्वारा रिकार्डतोड़ मतदान को मोदी और भाजपा के पक्ष में उनकी लामबंदी माना जाए तो भाजपा के लिए इससे बड़ी चुनौती और कोई नहीं हो सकती. उसे इन महिलाओं के जीवन साथियों को घर के आसपास रोजगार दिलाना होगा. यदि भाजपा इस बार भी रोजगार बढ़ाकर पहाड़ से जवानी और पानी का पलायन रोकने  में नाकाम रही तो उसे पांच साल बाद इन्हीं महिलाओं का कोपभाजन बनना पड़ेगा. यूं भी आजादी के बाद से ही पहाड़ की औरतें पीढ़ी दर पीढ़ी इसी आस में वोट डालने के बावजूद मनीआर्डर के सहारे अकेले ही रोजमर्रा चुनौतियों से जूझ रही हैं.

मतदान के नए आंकड़ों ने इस बार हुई राजनीतिक उखाड़-पछाड़ का राज्य के जनमानस पर असर भी दिखा दिया.

मतों के विश्लेषण से इस चुनाव में मैदानी और तराई की विधानसभा सीटें निर्णायक भूमिका निभाती दिख रही हैं. हालांकि उनमें पड़े रिकार्ड 75 फीसद से अधिक वोटों ने सत्ता के सभी दावेदारों के अनुमानों को गड्ड-मड्ड कर दिया.

इसके उलट गढ़वाल के पहाड़ी अंचल में मतदान आश्चर्यजनक रूप से औसतन 60 फीसद से भी कम रहा. गौरतलब है कि गढ़वाल अंचल में ही भाजपा ने कांग्रेस में जबरदस्त सेंधमारी करके उसके दर्जन भर पूर्व विधायकों को कमल छाप उम्मीदवार बनाया था.

बीजेपी ने की पूरी कोशिश

Narendra Modi

उनकी नैया पार लगाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और साथी मंत्रियों से लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह तक ने कोई कसर नहीं छोड़ी. इसके बावजूद मत प्रतिशत इतना कम रहना भारी राजनीतिक उलटफेर भी करा सकता है.

गढ़वाल अंचल के उलट कुमाउं के चार पहाड़ी जिलों की विधानसभा सीटों पर मत प्रतिशत लगभग 62 फीसद बैठ रहा है. मुख्यमंत्री हरीश रावत कुमाउं के ही निवासी हैं.

इन जिलों में भी पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के मतदान का प्रतिशत अधिक तो है मगर गढ़वाल की सीटों के अनुपात में कम है. रावत, मोदी और शाह ने इन सीटों पर भी पूरा जोर लगाया है.

इस बार कांग्रेस-भाजपा और बसपा के कुल मिलाकर दो दर्जन से अधिक दल-बदलू कमल, पंजा या हाथी छाप थामे चुनाव लड़ रहे हैं. इनसे जो बचे वे उत्तराखंड क्रांति दल और उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी का पल्लू थामे विधान सभा का विषेशाधिकार पाने के जुगाड़ में हैं.

बाकी ने निर्दलीय ही चुनाव मैदान में खम ठोक रखा है. निर्दलियों में भी 53 उम्मीदवार करोड़पति हैं, सो पैसा उन्होंने भी पानी की तरह बहाया। पैसा बहाएं भी क्यों न? आखिर उन्होने राज्य में पिछली दो विधानसभा में निर्दलियों की मंत्री बनने पर लाटरी निकलते जो देखी है.

इसीलिए उत्तराखंड के चुनाव में बेहिसाबी ढाई करोड़ से अधिक रुपए और एक लाख लीटर शराब की बरामदगी का भी नया रिकार्ड बना. इससे राज्य में गंगा की पवित्र धारा के समानांतर बहती चुनावी सौगातों की धाराओं की पोल मय सबूत खुल गई. इसमें सबसे मोटी रकम 80 लाख रुपए देहरादून में पकड़ी गई.

पांच लाख से अधिक रुपए मुख्यमंत्री हरीश रावत के काफिले में शामिल गाड़ी में से बरामद हुए. रावत सरकार में मंत्री हरीशचंद दुर्गापाल के बेटे पंकज की गाड़ी में से छापामार दस्ते ने एक लाख रुपए से अधिक नकदी मतदान की पूर्व संध्या पर बरामद की. दुर्गापाल नैनीताल के लालकुआं से कांग्रेस प्रत्याशी हैं.

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