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ट्रेन और स्टेशन पर मिलने वाले खाने में बड़े सुधार कर रहे हैं पीयूष गोयल

इस मुहिम के तहत ट्रेन के अंदर मिलने वाले खाने के साथ-साथ स्टेशन पर मिलने वाले भोजन पर भी नजर होगी

Sindhu Bhattacharya Updated On: Sep 12, 2017 01:20 PM IST

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ट्रेन और स्टेशन पर मिलने वाले खाने में बड़े सुधार कर रहे हैं पीयूष गोयल

क्या आप ट्रेन से लंबी दूरी के सफर पर निकले हैं और आपको पैंट्री से परोसे गये भोजन को खाने से डर लग रहा है? भारतीय रेलवे से सफर में यह यह एक आम बात है.

कई बार डिब्बे में बेकार हो चुका खाना परोसा जाता है, कैटरिंग स्टाफ रुखाई से पेश आता है और खाने के सामान की ज्यादा कीमत वसूलने के बाद ऊपर से टिप भी मांगी जाती है, जो कि गैर-कानूनी है. इसके अलावा एक चालाकी ये भी होती है कि खाने का सामान सामान निर्धारित मात्रा से कम दो और कीमत पूरी वसूलो.

लेकिन, नये रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कुछ नये आदेश जारी किए हैं और इन आदेशों के संकेत हैं कि ट्रेन के सफर में अब खान-पान यात्री की जेब पर पहले की तरह महंगा नहीं पड़ने वाला है. मंत्री के आदेश से यह तो साफ नहीं होता कि खाने के किसी पैकेट में भोजन निर्धारित से कम मात्रा में दिया जा रहा है या यह खाना खराब है तो इस तरह की दिक्कतों का क्या उपाय निकाला गया है लेकिन कैटरिंग में सुधार के लिए मंत्री ने जो आदेश दिए हैं उसे एक अच्छी शुरुआत माना जा सकता है.

आज से रेलवे के कैटरिंग इंस्पेक्टर पूरी ट्रेन में इस बात की निगरानी करेंगे कि कैटरिंग स्टाफ परोसे जा रहे भोजन की ज्यादा कीमत तो नहीं वसूल रहे या कहीं वे इसके लिए टिप तो नहीं मांग रहे. रेलवे ने यह वादा भी किया है कि यात्री अगर सोशल मीडिया पर शिकायत करते हैं कि ज्यादा पैसा वसूला जा रहा है और वेटर टिप मांग रहे हैं तो ऐसी शिकायतों पर भी सुनवाई के लिए नजर रखी जायेगी.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मंत्री ने सभी जोनल यूनिटस् को इस बाबत लिखा है और भ्रष्ट बरताव पर रोक के लिए 48 घंटे की डेडलाइन तय की है. भ्रष्ट लोगों के खिलाफ कार्रवाई आज और अभी से शुरु हो जानी चाहिए.

कहने की जरुरत नहीं कि यह एक सराहनीय कदम है लेकिन भारतीय रेलवे में कैटरिंग के नाम पर जो गोरखधंधा पसरा हुआ है उसके निदान में इसे एक छोटा सा ही कदम माना जायेगा. जरुरत कैटरिंग के व्यवसाय को सिरे से दुरुस्त करने की है ताकि ट्रेन के भीतर खाना-पीना कम नुकसानदेह हो.

रेलमंत्री ने अपने ट्वीट में ट्रेन में आमतौर पर खाये जाने वाली भोजन-सामग्री की एक सूची पेश की है और सुझाव दिया है कि यात्री जब भी ट्रेन में खाने के लिए कोई सामान खरीदते हैं तो हर बार खरीद का बिल मांगे.

इस ट्वीट के नीचे कई यात्रियों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. यात्रियों ने लिखा है कि बिल की बात तो भूल जाइए, कैटरिंग स्टाफ हमेशा कीमत बढ़ाकर बोलते हैं और कोई कीमत दिखाने वाला मैन्यूकार्ड मांगे तो वह भी देने से इनकार कर देते हैं. एक यात्री ने लिखा है कि दस रुपये में मिलने वाली चाय/कॉफी हमेशा ही दोगुनी कीमत पर मिलती है जबकि एक अन्य यात्री की प्रतिक्रिया है कि गोयल साहब भोजन की गुणवत्ता पर कब ध्यान देंगे.

‘परफॉर्मेन्स ऑडिट ऑन कैटरिंग सर्विसेज रिपोर्टस् इन इंडियन रेलवेज्’ नाम के दस्तावेज में कंपट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ने हाल में समाप्त हुए मॉनसून सत्र में संसद को बताया है कि ट्रेनों में परोसा जा रहा खाना यात्री की सेहत के लिए नुकसानदेह और घटिया दर्जे का है.

photo source: ANI

कुछ समय पहले ट्रेन के खाने में छिपकली होने जैसी घटनाएं सामने आईं थीं. फोटो- एनआई

ऑडिट में यह भी सामने आया है कि कई दफे खाने-पीने का सामान निर्धारित से कम मात्रा में दिया गया. दरअसल कम सामान देकर यात्रियों से ज्यादा कीमत वसूली गई. बेशक दिए गए सामान में पांच-दस ग्राम की कमी हो तो यात्री के लिए यह जान पाना मुश्किल होता है लेकिन याद रखिए कि रेलवे रोजाना 2 करोड़ 20 लाख यात्रियों की सेवा करती है. अगर इसमें से 50 फीसद लोग भी रेलवे के किचन से या स्टेशन पर कायम दुकानों से खाने-पीने का सामान खरीदते हों तो फिर अंदाजा लगाइए कि भ्र्ष्ट ठेकेदार, वेंडर और स्टाफ खाने-पीने के सामान की मात्रा कम करके कितनी काली कमाई करते हैं.

इंडियन रेलवे कमर्शियल मैन्युअल के पैरा 2806 के मुताबिक खाने में अगर पकाया भोजन परोसा जा रहा है जैसे कि रोटी, चावल, सब्जी आदि तो ऐसा भोजन रेलवे बोर्ड/जोनल रेलवे द्वारा तय की गई मात्रा में दिया जाना चाहिए. साथ ही, मैन्युअल में कहा गया है कि भोजन परोसने से पहले प्राइस-लिस्ट भी दी जानी चाहिए. प्राइस-लिस्ट में लिखा होता है कि चाय-कॉफी या शरबत जैसी चीजों को कितने मि.ली. या रोटी-चावल को कितने ग्राम में परोसा जायेगा और इसके लिए कितनी कीमत ली जायेगी. रेलमंत्री पीयूल गोयल अगर चाहते हैं कि रेलवे में कैटरिंग व्यवसाय मे जारी भ्रष्टाचार रुके तो उन्हें इस पक्ष पर भी सख्ती से पेश आना चाहिए.

सीएजी की ऑडिट 2016 की जुलाई से अक्तूबर के बीच हुई थी. ऑडिट से सामने आया कि ट्रेन में परोसे जा रही भोजन सामग्री निर्धारित से कम मात्रा में दी जा रही है. नियम है कि ट्रेन में परोसा गया पनीर का हर टुकड़ा 5 ग्राम का होगा लेकिन एक ट्रेन में 3 ग्राम के पनीर के टुकड़े परोसे जा रहे थे जो कि निर्धारित मात्रा से 40 प्रतिशत कम है. ग्वालियर रेलवे स्टेशन के फूड प्लाजा में पूड़ी के पैकेट 130 ग्राम के थे जबकि निर्धारित मात्रा 175 ग्राम की है.

आगरा फोर्ट स्टेशन के लाइसेंसी सभी छह स्टॉल्स पर वेजिटेबल सैंडविच का वजन निर्धारित मात्रा से 25 ग्राम कम का था. इसी तरह ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर ढोकला और ब्रेड पकौड़ा का हर नग निर्धारित मात्रा से 10 ग्राम कम का था.

आईसक्रीम(वडीलाल) 100 एम.एल की जगह 90 एम.एल का था और यही बात दही के मामले में भी पायी गई. टोमैटो कैचअप के सैशे 10 ग्राम का था जबकि निर्धारित मात्रा 15 ग्राम की रखी गई है.

सीएजी की इसी रिपोर्ट में देश के चीफ ऑडिटर ने कहा है कि देश के 26 रेलवे स्टेशनों पर जिस क्वालिटी का भोजन दिया जाता है वे आदमी के खाने लायक नहीं कहा जा सकता.

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जांच में पैन्ट्रीकार में चूहे और तिलचट्टे के होने की बात सामने आयी, भोजन बिना ढंके रखा गया था तथा अन्य कई किस्म की गंदगी पसरी हुई थी. रेलवे अनुबंध पर कैटरिंग कांट्रैक्टर रखती है और ज्यादातर दोष उसी के मत्थे मढ़ा जाता. कुछ दोष लंबी दूरी की रेलगाड़ियों में पैन्ट्री कार के ना होने और कैटरिंग की नीति में बार-बार फेरबदल करने जैसी कवायदों का भी है.

कंपट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल की जांच मे सामने आया कि दूषित भोजन बेचा जा रहा है- ऐसी भोजन-सामग्री जो बासी है और फिर से गर्म कर ली गई है या जिनको बचाकर रखने की अंतिम तारीख खत्म हो गई है. जांच में यह भी सामने आया कि जिन कंपनियों की पानी की बोतल बेचने की मंजूरी नहीं है उनके भी पानी के बोतल ट्रेन और स्टेशनों पर बेची जा रही हैं.

बोकारो स्टील सिटी स्टेशन पर कैटरिंग यूनिटस् के हाथो जो पेठा बेचा जा रहा था उसकी जांच में फंफूद लगे होने की बात सामने आयी. एक और स्टेशन पर ड्रेस्ड बॉयलर चिकेन, मलाई पनीर और इस्तेमाल किए जा रहे रिफाइंड तेल के घटिया होने की बात सामने आयी.

जोनल रेलवे के बेस किचेन में 100 नग बिने बिके परांठे पड़ा नजर आया जिसे निश्चित ही ट्रेन नंबर 12033-34(कानपुर-नई दिल्ली-कानपुर) में फिर से बेचने के लिए रखा गया था. गोयल के पूर्ववर्ती सुरेश प्रभु ने नयी कैटरिंग नीति पर काम शुरु किया था, इस नीति पर अमल अब तेजी से होना चाहिए.

खाना बनाने की गुणवत्ता में सुधार के लिए आईआरसीटीसी नये किचन बनाने जा रही है, साथ ही पुराने किचन में सुधार किया जाना है. नयी नीति की कुछ विशेषताएं हैं. मिसाल के लिए सभी मोबाइल यूनिटस्(ट्रेन) में कैटरिंग सेवा के प्रबंधन का अधिकार आईआरसीटीसी को होगा. जोनल रेलवे ने पैन्ट्री कार के जो ठेके दिए हैं उन्हें फिर से आईआरसीटीसी को दिया जायेगा.

सभी ट्रेनों के लिए भोजन आईआरसीटीसी की मिल्कियत और देखरेख में चलाये जा रहे किचन से लेना होगा. इस नीति में कहा गया है कि आईआरसीटीसी, कैटरिंग सेवा प्राइवेट लाइसेंस धारकों को आऊटसोर्स करने पर जोर ना दे.

नीति के मुताबिक आईआरसीटीसी को बेस किचन की स्थापना, संचालन और परोसे जा रहे भोजन से जुड़ी तमाम तरह की जिम्मेदारियां खुद ही निभानी होंगी. आईआरसीटीसी को फूड प्लाजा, फूड कोर्ट तथा फास्ट फूड के प्रबंधन की भी जिम्मेदारी दी गई है. जोनल रेलवे को स्टेटिक यूनिटस्(कैटरिंग स्टॉल, मिल्क स्टॉल, ट्रॉली) के प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई है. बेस किचन और किचन यूनिटस् आईआरसीटीसी के जिम्मे है.

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