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कुलभूषण जाधव फैसले पर पाकिस्तान ने कहा, आईसीजे जाना बड़ी गलती

पाकिस्तान में कानूनी मामलों के जानकारों ने कहा, आईसीजे में पाकिस्तान अपना पक्ष ठीक से नहीं रख पाई

FP Staff | Published On: May 18, 2017 08:21 PM IST | Updated On: May 18, 2017 08:21 PM IST

कुलभूषण जाधव फैसले पर पाकिस्तान ने कहा, आईसीजे जाना बड़ी गलती

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस का फैसला गुरुवार को आया. इस फैसले से जहां भारत में खुशी की लहर है. वहीं पाकिस्तान में गुस्सा और रोष है. पाकिस्तान के जानकारों का कहना है कि आईसीजे में जाकर पाकिस्तान ने गलती की है.

कुलभूषण जाधव को पाकिस्तानी जासूस मानता है और फांसी देना चाहता है. भारत ने इस मामले को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) में उठाया है और फैसला हमारे हक में आया है.

'पाकिस्तान ने अपने ही पैरों पर मारी कुल्हाड़ी'

पहले पाकिस्तान के विश्लेषकों को यह भरोसा था कि आईसीजे जाधव की फांसी पर रोक नहीं लगाएगा. हालांकि फैसला आने के बाद विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान की तरफ से दी गई दलील 'कमजोर' थी और इससे 'नुकसान' हुआ है. उनका कहना है कि 'पाकिस्तान ने गलती की है.'

Wallpapers of Indian Flag

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रिटायर्ड जस्टिस शैक उस्मानी ने पाकिस्तानी अखबार डॉन से कहा है कि यह फैसला खतरनाक है क्योंकि 'यह आईसीजे के अधिकार क्षेत्र' में नहीं है.

उनका कहना है, 'आईसीजे में जाना पाकिस्तान की गलती है. पाकिस्तान को वहां नहीं जाना चाहिए. पाकिस्तान ने खुद ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारी है.'

रिटायर्ड जज ने कहा कि यह मामला पाकिस्तान में भी चलता रहेगा. उन्होंने कहा, 'जब तक आईसीजे का फैसला नहीं आ जाता पाकिस्तान में यह मामला चलता रहेगा. लेकिन जब तक फांसी पर रोक है फांसी नहीं दी जा सकती.'

उन्होंने कहा कि फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल ने अपील के लिए 40 दिनों का वक्त दिया था. फील्ड जनरल ने ही कुलभूषण को मौत की सजा सुनाई है. रिटायर्ड जज ने कहा, 'मेरा मानना है कि 40 दिनों का वक्त खत्म हो गया है. लिहाजा अपील करने का वक्त भी खत्म हो गया है.लेकिन अगर भारत अपील की समयावधि स्वीकार करता है तो  फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल इसे बढ़ा देंगे.'

पाकिस्तान की नहीं थी तैयारी

लंदन के एक पाकिस्तानी बैरिस्टर राशिद असलम ने कहा कि पाकिस्तान ने सुनवाई के लिए ठीक से तैयारी नहीं की थी. उन्होंने कहा कि जिरह के लिए पाकिस्तान को जो 90 मिनट का वक्त मिला था उसे ठीक से इस्तेमाल नहीं किया गया.

उन्होंने कहा, 'मुझे हैरानी है कि जिरह के लिए इतना कम वक्त क्यों मिला है. मुझे लगता है कि कंवर कुरैशी ने वक्त का पूरा फायदा नहीं उठाया है.' उन्होंने कहा, 'वियेना कन्वेंशन के आर्टिकल 5 बी से साफ है कि अगर कोई नागरिक पकड़ा जाता है तो यह मामला मानवाधिकार के तहत आएगा. लेकिन यह शख्स अगर कोई जासूस होता है तो मानवाधिकार का मुद्दा नहीं आएगा. लिहाजा, मुझे नहीं लगता कि हमने इस केस को सही ढंग से पेश किया है.'

उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान के पास भी वहां एक जज बिठाने का अधिकार था लेकिन हमने ऐसा नहीं किया. मुझे लगता है पाकिस्तान ने ठीक से इस केस की तैयारी नहीं की थी. ऐसा शायद इसलिए हुआ क्योंकि हमारे पास वक्त नहीं था.'

हमारे वकील अनुभवहीन थे 

पाकिस्तान के पूर्व अटर्नी जनरल इरफान कादरी ने कहा कि वह इस फैसले से हैरान हैं. उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि यह फैसला नेचुरल जस्टिस के सिद्धांतों का उल्लंघन है. मैं हैरान हूं कि पाकिस्तान इंटरनेशनल कोर्ट में क्यों गया और ऐसी जल्दबाजी क्यों दिखाई.'

उन्होंने कहा, 'हमारे वकील बगैर किसी अनुभव के इस मामले को हैंडल कर रहे हैं. उनकी दलीलों में कोई वजन नहीं था. उन्हें अपनी बात बेहतर ढंग से रखनी चाहिए थी.'

उन्होंने कहा कि वैसे मामले की सुनवाई अभी चल रही है लेकिन लीगल टीम को 'अनुभवी वकीलों के साथ' तैयारी करने की जरूरत है. 'हमें एक ऐसी टीम की जरूरत है जो पाकिस्तान के लिए वफादार हो.'

कमजोर था पाकिस्तान का पक्ष

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के एक सीनियर लीडर शेरी रहमान ने कहा, 'हमारा केस कमजोर था. हमें जासूसी से जुड़ी और दलील देनी चाहिए थी.'

काउंसलर एक्सेस सबसे अहम मुद्दा

पाकिस्तान के वकील फैजल नकवी ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल काउंसलर एक्सेस को लेकर है. नकवी ने कहा, 'सवाल यह नहीं है कि उसे फांसी देनी चाहिए या नहीं. सवाल यह है कि उसे काउंसलर एक्सेस मिल सकता है या नहीं.'

जाधव मामले पर आईसीजे जाने पर राजी क्यों हुआ पाकिस्तान

बैरिस्टर डॉक्टर फरोघ ए नसीम ने कहा कि पाकिस्तान को आईसीजे में जाने का फैसला नहीं करना चाहिए था. उन्होंने कहा, 'कश्मीर मामले में भारत आईसीजे जाने पर राजी नहीं हुआ. फिर जाधव मामले में पाकिस्तान इंटरनेशनल कोर्ट क्यों गया.' उन्होंने कहा कि 17 साल पहले जब पाकिस्तान ने केस दर्ज कराया था तो आईसीजे ने कहा था कि यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है. उन्होंने कहा, 'आज आईसीजे पाकिस्तान पर हमारा फैसला नहीं मान रहा है.'

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