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33 साल हुए पूरे: इस तरह दिया गया था ऑपरेशन ब्लू स्टार को अंजाम

स्वर्ण मंदिर परिसर में भारतीय सेना ने आज ही के दिन ऑपरेशन ब्लू स्टार को अंजाम दिया था

FP Staff | Published On: Jun 06, 2017 02:57 PM IST | Updated On: Jun 06, 2017 03:14 PM IST

33 साल हुए पूरे: इस तरह दिया गया था ऑपरेशन ब्लू स्टार को अंजाम

सन 1984 को आज के ही दिन सिखों के सबसे पावन स्थल स्वर्ण मंदिर परिसर में भारतीय सेना की कार्रवाई 'ऑपरेशन ब्लू स्टार को अंजाम दिया गया था. 5 जून 1984 को ऑपरेशन ब्लू स्टार शुरू हो चुका था. सेना का मिशन अमृतसर के स्वर्ण मंदिर को जरनैल सिंह भिंडरावाले और उनके समर्थकों के चंगुल से छुड़ाना था. मंदिर परिसर के बाहर दोनों ओर से रुक-रुक कर गोलियां चल रही थीं.

सेना के पास थी ये जानकारी

सेना को जानकारी थी कि स्वर्ण मंदिर के पास की 17 बिल्डिंगों में आतंकवादियों का कब्जा है. इसलिए सबसे पहले सेना ने स्वर्ण मंदिर के पास होटल टैंपल व्यूह और ब्रह्म बूटा अखाड़ा में धावा बोला, जहां छिपे आतंकवादियों ने बिना ज्यादा विरोध के समर्पण कर दिया.

शुरुआत में मिली सफलता

शुरुआती सफलता के बाद सेना ऑपरेशन ब्लू स्टार के अंतिम चरण के लिए तैयार थी. कमांडिंग ऑफिसर मेजर जनरल के एस बरार ने अपने कमांडोज़ को उत्तरी दिशा से स्वर्ण मंदिर के भीतर घुसने के आदेश दिए. लेकिन यहां जो कुछ हुआ उसका अंदाजा बरार को भी नहीं था. चारों तरफ से कमांडोज़ पर फायरिंग शुरू हो गई. मिनटों में 20 से ज्यादा जवान शहीद हो गए. जवानों पर अत्याधुनिक हथियारों और हैंड ग्रेनेड से हमला किया जा रहा था. अब तक साफ हो चुका था कि बरार को मिली इंटेलिजेंस सूचना गलत थी.

यहां था भिंडरवाले का ठिकाना

सेना की कोशिश थी कि किसी भी सूरत में अकाल तख्त पर कब्जा जमा लिया जाए. यही भिंडरावाले का ठिकाना था. लेकिन सेना की एक टुकड़ी को छोड़ कर कोई भी मंदिर के भीतर घुसने में कामयाब नहीं हो पाया था. अकाल तख्त पर कब्जा जमाने की कोशिश में सेना को एक बार फिर कई जवानों की जान से हाथ धोना पड़ा. सेना की स्ट्रैटजी बिखरने लगी थी.

आतंकवादियों की तैयारी थी जबरदस्त

तमाम कोशिशों के बाद अब साफ होने लगा था कि आतंकवादियों की तैयारी जबर्दस्त है और वो किसी भी हालत में आत्मसमर्पण नहीं करेंगे. सेना अपने कई जवान खो चुकी थी. इस बीच मेजर जनरल के एस बरार के एक कमांडिंग अफसर ने बरार से टैंक की मांग की. बरार ये समझ चुके थे कि इसके बिना कोई चारा भी नहीं है. सुबह होने से पहले ऑपरेशन खत्म करना था, क्योंकि सुबह होने का मतलब था और जानें गंवाना.

सेना को मिली टैंक इस्तेमाल करने की इजाजत

बरार को सरकार से टैंक इस्तेमाल करने की इजाजत मिली. लेकिन टैंक इस्तेमाल करने का मतलब था मंदिर की सीढ़ियां तोड़ना. सिखों के सबसे पवित्र मंदिर की कई इमारतों को नुकसान पहुंचाना. 5 बजकर 21 मिनट पर सेना ने टैंक से पहला वार किया. आतंकवादियों ने अंदर से एंटी टैंक मोर्टार दागे. अब सेना ने कवर फायरिंग के साथ टैंकों से हमला शुरू किया. चारों तरफ लाशें बिछ गईं.

अकाल तख्त में हुआ जोरदार धमाका

सूरज की रोशनी ने उजाला फैला दिया था. अब तक अकाल तख्त सेना के कब्जे से दूर था और सेना को जानमाल का नुकसान बढ़ता जा रहा था. इसी बीच अकाल तख्त में जोरदार धमाका हुआ. सेना को लगा कि ये धमाका जानबूझकर किया गया है, ताकि धुएं में छिपकर भिंडरावाले और उसका मास्टरमाइंड शाहबेग सिंह भाग सकें. सिखों की आस्था का केंद्र अकाल तख्त को जबर्दस्त नुकसान हुआ.

बड़ीं संख्या में आतंकवादी अकाल तख्त से बाहर निकले

अचानक बड़ी संख्या में आतंकवादी अकाल तख्त से बाहर निकले और गेट की तरफ भागने लगे. लेकिन सेना ने उन्हें मार गिराया. उसी वक्त करीब 200 लोगों ने सेना के सामने आत्मसमर्पण किया. लेकिन अब तक भिंडरावाले और उसके मुख्य सहयोगी शाहबेग सिंह के बारे में कुछ पता नहीं लग पा रहा था. भिंडरावाले के कुछ समर्थक सेना को अकाल तख्त के भीतर ले गए, जहां 40 समर्थकों की लाश के बीच भिंडरावाले, उसके मुख्य सहयोगी मेजर जनरल शाहबेग सिंह और अमरीक सिंह की लाश पड़ी थी. अमरीक भिंडरावाले का करीबी और उसके गुरु का बेटा था.

6 जून को सेना ने आतंकियों को मार गिराया

6 तारीख की शाम तक स्वर्ण मंदिर के भीतर छिपे आतंकवादियों को मार गिराया गया था. लेकिन इसके लिए सेना को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी. सिखों की आस्था का केन्द्र अकाल तख्त नेस्तनाबूद हो चुका था. इस वक्त तक किसी को अंदाजा नहीं था कि ये घटना पंजाब के इतिहास को हमेशा के लिए बदलने वाली है. स्वर्ण मंदिर के बाद मंदिर परिसर के बाहर की बिल्डिंगें खाली करवाने में सेना को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी.

सेना के मुताबिक, मंदिर के बाहर के ऑपरेशन में अकाली नेता हरचंद सिंह लोंगोवाल और गुरचरण सिंह तोहड़ा ने भी आत्मसमर्पण कर दिया. हालांकि अकाली नेता सेना के इस बयान को झूठा करार देते हैं. इस ऑपरेशन में कई आम लोगों की भी जान गई. खुद सेना ने बाद में माना कि 35 औरतें और 5 बच्चे इस ऑपरेशन में मारे गए. हालांकि गैर सरकारी आंकड़े इससे कहीं ज्यादा है.

इस ऑपरेशन में 492 लोगों ने गंवाई जान

ऑपरेशन ब्लू स्टार में कुल 492 जानें गईं. इस ऑपरेशन में सेना के 4 अफसरों समेत 83 जवान शहीद हुए. वहीं जवानों सहित 334 लोग गंभीर रूप से घायल हुए. पूर्व सेना अधिकारियों ने ऑपरेशन ब्लू स्टार की जमकर आलोचना की. उनके मुताबिक ये ऑपरेशन गलत योजना का नमूना था.

(साभार न्यूज 18)

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