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बेनामी संपत्ति रखने वाले अफसरों की अब खैर नहीं

बीते कुछ महीनों के दौरान तेजी से हो रही कार्रवाई

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: May 25, 2017 06:10 PM IST

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बेनामी संपत्ति रखने वाले अफसरों की अब खैर नहीं

बेनामी संपत्ति रखने वाले अफसरों की अब खैर नहीं है. पिछले कुछ महीनों से देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम में एक नई गति देखने को मिली है.

देश की ब्यूरोक्रेसी में अचानक आए इस बदलाव के कई मायने निकाले जा रहे हैं. देश की तमाम जांच एजेंसियां एक से बढ़ कर एक घोटालों का पर्दाफाश कर रही हैं. हर रोज अखबारों के पन्ने भ्रष्टाचारियों के कारगुजारियों से रंगे रहते हैं.

खासकर, पिछले कुछ महीनों से मोदी सरकार देश की ब्यूरोक्रेसी में व्याप्त भ्रष्टाचार पर विशेष नजर रख रही है. देश में भ्रष्ट अधिकारियों और उनकी बेनामी संपत्तियों पर इस तरह की कार्रवाई पूर्व की सरकारों के समय कम ही देखने को मिलती थीं.

सूत्र बताते हैं कि पिछले सात महीनों में जांच एजेंसियों ने 400 से अधिक बेनामी संपत्तियों का पर्दाफाश किया है. जिसमें, ज्यादातर मामले ब्यूरोक्रेट्रस से संबंधित हैं.

सात महीने पहले ही लागू हुआ बेनाम संपत्ति कानून

देश में बेनामी संपत्ति कानून सात महीने पहले ही लागू किया गया था. पिछले साल एक नवंबर को बेनामी सौदा संशोधन कानून को लागू किया गया था. इन सात महीनों में आयकर विभाग ने अब तक 240 से अधिक मामलों में 400 से ज्यादा बेनामी संपत्तियों का पता लगाया है.

आयकर विभाग ने 600 करोड़ रुपए से अधिक बेनामी संपत्तियों को कुर्क भी किया है. 240 मामलों में से 40 ऐसे मामलों में आयकर विभाग ने 530 करोड़ रुपए की संपत्ति को कुर्क किया है. कुर्क की गई अचल संपत्तियां दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में स्थित हैं.

देश में नए बेनामी कानून में अधिकतम सात साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है. देश में 8 नवंबर को नोटबंदी के बाद से सीबीडीटी ने देश में चल और अचल, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संपत्तियों की खोजबीन शुरू की थी. ये संपत्ति वास्तविक ऑनर के बजाए किसी और के नाम पर दर्ज हैं. नए कानून में इस तरह की संपत्तियों को बेनामी करार दिया गया है.

देश के राजस्व विभाग ने एक बयान जारी कर कहा है कि 23 मई 2017 तक 400 से अधिक बेनामी संपत्तियों की पहचान की गई है. बेनामी संपत्ति में बैंक खातों में जमा रकम, जमीन का टुकड़ा, फ्लैट और आभूषण शामिल होते हैं.

खासकर, आयकर विभाग ने पिछले 7 दिनों में देश के 10 वरिष्ठ अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की है. उत्तर प्रदेश के तीन अधिकारियों के यहां बुधवार को ही छापा मारा गया था. जिसमें करोड़ों की संपत्ति का पता लगा है.

जानकार मानते हैं कि मोदी सरकार हाल के दिनों में भारतीय जांच एजेंसियों के महकमे में कई अहम बदलाव किए हैं. ये बदलाव कई स्तर पर किए गए हैं.

एक दो विभाग को छोड़ दें तो ये पहला मौका है जब मोदी सरकार अपने हिसाब से देश की विभिन्न जांच एजेंसियों में अपनी पसंद के लोगों को नियुक्त किया है.

इसी का परिणाम है कि देश की जांच एजेंसियों के महकमे में बदलाव के साथ ही ब्यूरोक्रेसी की फिजा में भी बदलाव नजर आने लगी है.

सीबीआई ने अभी हाल ही में कुछ आरोपी ब्यूरोक्रेट्रस पर जबरदस्त तरीके से कार्रवाई की है. कई करप्ट आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को जेल भेजा गया है.

भारतीय जांच एजेंसियां पिछले कुछ दिनों से हर रोज एक के बाद एक घोटाले का पर्दाफाश कर रही हैं. एक के बाद एक ब्यूरोक्रट्रस गिरफ्तार हो रहे हैं या फिर बर्खास्त हो रहे हैं.

सरकार के सूत्रों के अनुसार आने वाले कुछ और दिनों में लगभग 150 से 200 के बीच आईएएस और आईपीएस अधिकारियों पर गाज गिरने वाली है. ये सारे अधिकारी या तो सेवा से लंबे समय से गायब चल रहे हैं या फिर इन अधिकारियों पर करप्शन के कई आरोप हैं.

सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने देश के तमाम उन भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश दे दिए हैं जो, पिछले काफी सालों से किसी ना किसी वजह से सरकार की आखों में धूल झोंकते आ रहे हैं.

सरकार के सूत्र कहते हैं कि पीएम मोदी के सीधे आदेश के बाद जांच एजेंसियों ने उनके खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है.

हाल के कुछ वर्षों में जहां सीबीआई ने अपने ही दो पूर्व निदेशकों पर शिकंजा कसा है तो ईडी ने अपने एक पूर्व संयुक्त निदेशक जेपी सिंह को गिरफ्तार किया है.

वहीं देश के विभिन्न राज्यों से सचिव स्तर के कई अधिकारियों की गिरफ्तारी का सिलसिला भी थमने का नाम नही ले रहा है.

छत्तीसगढ़ के प्रमुख सचिव बीएल अग्रवाल को सीबीआई ने दो महीने पहले ही जांच को प्रभावित करने के मामले में गिरफ्तार किया है. बीएल अग्रवाल को सीबीआई के एक अधिकारी को 1.5 करोड़ रुपए रिश्वत देने के मामले में गिरफ्तार किया गया है.

ईडी के पूर्व संयुक्त निदेशक और आईआरएस अधिकारी जेपी सिंह को आइपीएल क्रिकेट में स्पॉट फिक्सिंग के आरोपियों से 15 करोड़ रुपए रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया.

जेपी सिंह अहमदाबाद में ईडी के संयुक्त निदेशक पद पर तैनात थे. जेपी सिंह 5 हजार करोड़ के मनी लॉड्रिंग के आरोपी हवाला कारोबारी अफरोज फट्टा के मामले की जांच कर रहे थे. 2000 बैच के आईआरएस अधिकारी जेपी सिंह पर करोड़ों रुपए का रिश्वत लेने का आरोप है.

केंद्रीय सतर्कता आयोग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले दो सालों में देश के इतिहास में सबसे ज्यादा भ्रष्ट अधिकारियों को या तो गिरफ्तार किया गया है या फिर बर्खास्त किया गया है.

पीएम ने 2014 में उठाया था मुद्दा

narendra modi

प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 लोकसभा चुनाव में ब्यूरोक्रेसी में व्याप्त भ्रष्टाचार के मुद्दे को खूब उछाला था. प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी जनसभाओं में भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का वादा किया था.

सीवीसी के आकड़ें में यह खुलासा हुआ है कि पिछले कुछ सालों में दंडित वरिष्ठ अधिकारियों की संख्या पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा है.

सीवीसी की रिपोर्ट में 20 हजार मामलों में 3 हजार 600 वरिष्ठ अधिकारियों पर ईमानदारी की कमी के लिए दंडित किया गया है या फिर दंडित करने की सिफारिश की गई है.

गृह मंत्रालय ने दो महीने पहले ही देश के दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को बर्खास्त किया था. 1998 बैच के यूटी कैडर के अधिकारी मयंक शील चौहान और 1992 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के अधिकारी राज कुमार देवांगन को भी बर्खास्त किया गया था. सरकार ने दोनो को सेवा में बने रहने के योग्य नहीं पाया था.

देश के कई राज्यों में हुए घोटाले और धांधली की आंच आईएएस और आईपीएस अधिकारियों पर आ रही है. ऐसे में मोदी सरकार के द्वारा उठाए गए ताजा कदम से कई अधिकारियों की रातों की नींद गायब कर दी है.

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