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OECD रिपोर्ट में 'भारत नंबर वन': कहीं हवा में ना बह जाए सच्ची खबर

लापरवाही और तथ्य घुमाने के चलते सुबह एक दिशा में चली न्यूज़ शाम को उल्टे पांव वापस हो ली

Prabhakar Thakur | Published On: Jul 14, 2017 09:58 PM IST | Updated On: Jul 14, 2017 09:58 PM IST

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OECD रिपोर्ट में 'भारत नंबर वन': कहीं हवा में ना बह जाए सच्ची खबर

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता देश में किसी भी अन्य नेता से कहीं ज्यादा है. यह बात कहते हुए प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि विपक्षी नेता और सरकार के सबसे तीखे आलोचक भी ऐसा मानते हैं.

उनकी सरकार पर देश के लोगों में भरोसा बहुत है. देश ने नोटबंदी के फैसले से लेकर चुनावों में भी समय-समय पर ऐसा दिखाया है. ऐसे माहौल में हमारा मीडिया 'हवा के साथ बह कर' गलती कर बैठता है.

खबर चली- भारत सरकार सबसे भरोसेमंद

शुक्रवार सुबह से ही धड़ाधड़ हर तरफ से ये खबरें आने लगी कि भारत की नरेंद्र मोदी सरकार दुनिया की सबसे 'भरोसेमंद' सरकार है. अलग-अलग मीडिया वेबसाइटों पर यह खबर चली और जोर-शोर से इसे शेयर भी किया गया. कुछ ने यहां तक घोषणा कर दी, 'भारत निकला अमेरिका-रूस से आगे'. दिक्कत बस ये है कि ये खबरें गलत थी.

आर्थिक सहयोग और विकास संगठन की रिपोर्ट 'गवर्नमेंट ऐट अ ग्लांस 2017' की रिपोर्ट में बताया गया कि भारत के 73 फीसदी लोग अपनी सरकार पर भरोसा करते हैं.

रिपोर्ट में के मुताबिक भारत 43 देशों की इस सूची में तीसरे नंबर पर है. पर खबर ये चली कि भारत ने इस सूची में पहला स्थान पाया.

भारत नहीं इंडोनेशिया और स्विट्जरलैंड हैं टॉप पर

हकीकत यह है कि भारत नहीं बल्कि इस सूची में इंडोनेशिया और स्विट्जरलैंड 80-80 फीसदी समर्थन के साथ पहले स्थान पर हैं.

खबरों में गड़बड़झाला बस इतना ही नहीं है. चलाने वालों ने यह भी चलाया कि सरकार पर लोगों का 'भरोसा बढ़ा है'. इसका हकीकत से लेना देना नहीं है. सर्वे तो कहता है कि सरकार पर विश्वास करने वाले लोगों की संख्या में 2007 के मुकाबले 9 फीसदी की कमी आई है.

अरे ये बताइए डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन पर लोगों के भरोसे से इस सर्वे का क्या लेना देना जब यह 2016 में हुई थी और ओबामा सत्ता में थे?

कांग्रेस कूदी मैदान में

इन खबरों के सामने आने के बाद कांग्रेस भी कहां चुप रहने वाली थी. उन्होंने भी ट्वीट कर लोगों को याद दिलाया कि मनमोहन सरकार पर लोग कितना भरोसा करते थे.

आलस छोड़िए, खबर जांचिए

इसे लापरवाही कहिए या भेड़चाल, दरअसल एक मैगजीन पर यह चल निकला कि भारत ने सूची में टॉप किया है. इसके बाद तो उस खबर के स्रोत को जांचे बिना उसे लपकने वालों की लाइन लग गई. तथ्यों को घुमा कर पेश किया गया जिससे पूरी तस्वीर छिप गई. जब खबर चल पड़ी तो वाट्सएप और फेसबुक पर शेयर भी खूब हुई.

2007 में आज के 73 फीसदी के मुकाबले 82 फीसदी लोगों को सरकार पर विश्वास था और हम लक्जमबर्ग के साथ संयुक्त रूप से पहले पायदान पर थे. इसके बाद भी खबर ये बनती है कि भारत की सरकार पर लोगों को सबसे ज्यादा भरोसा है.

अब आपके ऊपर है कि आप आंख मूंद कर किसी भी खबर पर भरोसा करेंगे या रिपोर्ट यहां पढ़ कर तथ्य जांचेंगे.

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