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छत्तीसगढ़ में ड्रोन कैमरे से नक्सलियों पर कसी जाएगी नकेल

राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई हाईलेवल मीटिंग में नक्सलियों के खिलाफ तीन स्तरीय रणनीति को मंजूरी दी गई

Bhasha | Published On: May 04, 2017 08:40 PM IST | Updated On: May 04, 2017 08:40 PM IST

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छत्तीसगढ़ में ड्रोन कैमरे से नक्सलियों पर कसी जाएगी नकेल

छत्तीसगढ़ में अब ड्रोन कैमरे से नक्सलियों की निगरानी होगी. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सुकमा हमले के बाद नक्सलियों के खिलाफ फाइनल ऑपरेशन को मंजूरी दे दी है. जिसके बाद अब नक्सल प्रभावित इलाके में तैनात सीआरपीएफ समेत अन्य एजेंसियों को इसे लागू करने को लेकर हरी झंडी दे दी गई है.

गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को हुई हाईलेवल मीटिंग में तीन स्तरीय रणनीति को मंजूरी दी गई. एनएसए अजीत डोभाल सहित खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के आला अधिकारियों की मौजूदगी में हुई इस बैठक में अभियान की कार्य योजना की समीक्षा की गई.

अभियान के पहले चरण में नक्सली हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित सुकमा और दंतेवाड़ा सहित अन्य क्षेत्रों में नक्सली गुटों की सक्रियता वाले इलाकों को ड्रोन से पहचान कर इनकी घेराबंदी की जाएगी.

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ड्रोन से मैपिंग का काम शुरु किया गया

अधिकारियों ने गृह मंत्री को बताया कि सक्रिय गुटों की घेराबंदी के लिये इलाके की ड्रोन से मैपिंग का काम शुरु कर दिया गया है. दूसरे चरण में अत्याधुनिक निगरानी उपकरणों से नक्सलियों की सटीक पहचान कर इनके मूवमेंट पर बारीक नजर रखी जाएगी.

वहीं, तीसरे चरण में इनकी गतिविधियों के आधार पर पहचान किए गए इलाके में नक्सल विरोधी अभियान शुरू कर सुरक्षा बलों के नुकसान को कम से कम करने पर ध्यान केंद्रित होगा.

इसके लिये अभियान में शामिल अर्धसैनिक बल के जवानों को सेना की तर्ज पर अत्याधुनिक सुरक्षा और निगरानी उपकरण मुहैया कराये जा रहे हैं. राजनाथ सिंह ने निर्णायक अभियान को नक्सल प्रभावित दूसरे राज्यों में भी चलाने की बात कही है. इसके लिये देश के 10 राज्य सरकारों के साथ सामंजस्य और सहयोग कायम करने के लिये 8 मई को दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा होगी.

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गृह मंत्रालय ने हाई लेवल मीटिंग कर नक्सलवाद से निपटने के लिए तीन स्तर की रणनीति बनाई है (फोटो: पीटीआई)

 

 

साझा रणनीति नक्सल प्रभावित राज्यों में लागू

बैठक में बदली हुई रणनीति पर सभी राज्यों के साथ चर्चा होगी जिससे साझा रणनीति बनाकर सभी नक्सल प्रभावित राज्यों में इसे लागू किया जा सके. मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि सुकमा हमले से सबक लेते हुए राज्य सरकारों के साथ सामंजस्य कायम कर अभियान के दौरान सुरक्षा बलों का नुकसान न्यूनतम करने पर जोर रहेगा.

इसमें राज्य के खुफिया तंत्र की मदद से सूचनाओं को शेयर करने से लेकर घायल जवानों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने के लिये हेलिकॉटर मुहैया कराना शामिल है. इसके लिये कुछ बैकअप टीमें भी बनाई गई हैं.

इनका काम अभियान के दौरान किसी भी तरह के नुकसान की भरपाई कर ऑपरेशन कायम रखना है. इसमें घायल जवानों को अस्पताल पहुंचाना और संबंधित एजेंसियों से तालमेल कायम करना शामिल है.

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