S M L

कर्ज में डूबे किसानों को नोटबंदी ने बर्बाद किया: शिवसेना

शिवसेना ने मुखपत्र में लिखा कि पिछले साल अच्छे मानसून के बाद भी किसानों को नुकसान उठाना पड़ा

Bhasha | Published On: Jun 07, 2017 03:28 PM IST | Updated On: Jun 07, 2017 03:28 PM IST

कर्ज में डूबे किसानों को नोटबंदी ने बर्बाद किया: शिवसेना

सत्ताधारी दल की सहयोगी शिवसेना ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा है कि उसने ‘नोटबंदी का चाबुक’ चलाकर कर्ज तले दबे किसानों को गहरी निराशा में धकेला और उनके खेतों को बर्बाद हो जाने दिया.

ऐसे समय में जब उद्योग जगत और सेवा क्षेत्र को विकास के लिए एक के बाद एक प्रोत्साहन मिल रहे हैं, कृषि क्षेत्र के प्रति सरकार की बेपरवाही पर शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में सवाल उठाया.

'पिछले साल अच्छे मानसून के बाद भी हुए बेहाल'

शिवसेना ने कहा, ‘कई साल बाद, पिछले साल का मानसून किसानों के लिए उम्मीदें लेकर आया था और भारी फसल उत्पादन हुआ था. लेकिन नोटबंदी के चाबुक ने उन्हें अपनी फसलों को मिट्टी के दाम बेचने पर मजबूर कर दिया. उन्हें अपना लगाया धन भी नहीं मिल पाया और नतीजा यह हुआ कि किसान भारी घाटे में डूब गए.’

शिवसेना ने कहा कि सरकार कृषि क्षेत्र के विकास के वादे के साथ सत्ता में आई थी लेकिन आज वह इस क्षेत्र को कर लगा देने के नाम पर डराती रहती है.

'चुनाव में सैकड़ों करोड़ खर्च, फिर कर्जमाफी पर क्यों नहीं?'

संपादकीय में कहा गया है, ‘पंचायत से लेकर नगर निगमों तक के चुनाव जीत लेना आसान है. यदि आपके पास पैसा है तो आप चांद पर हो रहा चुनाव भी जीत सकते हैं. इसका यह मतलब नहीं है कि जनता आपकी नौकर है. किसानों की भावनाओं को समझने के लिए जरूरी है कि यह समझ लिया जाए कि वे महज वोटबैंक नहीं हैं.'

संपादकीय में कहा गया कि हम यह जानना चाहते हैं कि जब भाजपा चुनाव में ‘सैंकड़ों करोड़’ रूपए खर्च सकती है तो फिर वह कर्जमाफी में हिचकिचा क्यों रही है?

शिवसेना ने कहा, ‘यदि मुख्यमंत्री कहते हैं कि वह केवल असली किसान नेताओं से ही बात करेंगे तो सरकार की ओर से असली किसानों को ही असल किसान नेताओं से बातचीत करनी चाहिए. लेकिन क्या आपकी सरकार में एक भी असली किसान है?’

भड़काने वालों से बात नहीं करेगी सरकार: फडनवीस

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा था कि सरकार सिर्फ विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों से ही बात करेगी, अन्य से नहीं. सरकार उन लोगों के साथ बात नहीं करेगी, जो किसानों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं.

शिवसेना ने कहा कि जो लोग हड़ताल के दौरान खेती की उपज को बर्बाद किए जाने पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें यह जवाब भी देना चाहिए कि जब किसान हड़ताल नहीं कर रहे थे, तब क्या कोई बर्बादी नहीं हो रही थी?

शिवसेना ने सवाल उठाया, ‘कच्चे तेल की कीमतें अपने निचले स्तर पर आ गईं लेकिन क्या महंगाई कम हुई? पिछले साल अच्छे मानसून के चलते भारी पैदावार हुई लेकिन क्या सब्जियों की कीमतें कम हुईं? तीन साल बीत गए लेकिन क्या ‘अच्छे दिनों’ के वादे पूरे किए गए?’

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi