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लालू यादव से कहीं पीछा ना छुड़ा लें नीतीश कुमार!

सूबे में अपनी घटती लोकप्रियता से नीतीश चिंता में हैं

FP Staff Updated On: Jun 24, 2017 09:01 PM IST

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लालू यादव से कहीं पीछा ना छुड़ा लें नीतीश कुमार!

चार साल बाद नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के बीच रिश्तों की बर्फ पिघलती दिख रही है, इसमें अब ऐसी गर्माहट है कि दोनों ने एक-दूसरे के राजकाज की प्रशंसा करना शुरु कर दिया है.

उधर बिहार में आरजेडी और उसका शीर्ष नेतृत्व यानी लालू यादव और उनका कुनबा भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरकर अब नीतीश कुमार के लिए सिरदर्दी का सामान साबित हो रहा है.

नीतीश नहीं करेंगे अपनी छवि से समझौता 

जदयू के भीतरखाने का अता-पता रखने वालों का मानना है कि नीतीश अपनी साफ-सुथरी छवि की कीमत पर कोई समझौता नहीं कर सकते. अपराध की घटनाएं और बेरोजगारी बढ़वार पर है. ऐसे में तीसरी बार मुख्यमंत्री बने नीतीश के लिए सुशासन का एजेंडा ठीक-ठीक काम करता नहीं जान पड़ता.

सूबे में अपनी घटती लोकप्रियता से नीतीश चिंता में हैं. इसके अतिरिक्त 2013 की तरह उन्हें लगने लगा है कि केंद्र में कोई अहम भूमिका निभाने का मौका हाथ में आ सकता है.

नीतीश कुमार के एक करीबी का कहना है कि 'यूपी के चुनाव ने समीकरण बदल दिए हैं. नीतीश समेत अब हर कोई मान रहा है कि मोदी लहर मंद नहीं पड़ी है. दूसरी तरफ यह भी दिख रहा है कि राहुल गांधी साल के आखिर तक कांग्रेस की कमान संभाल लेंगे और कांग्रेस कभी नहीं मानेगी कि विपक्ष की अगुवाई कोई और नेता करे.'

PTI

नीतीश को गले लगाने के लिए तैयार है बीजेपी

लेकिन नीतीश जानते हैं कि सियासी बिसात पर अपने पत्ते कैसे खेलने हैं. अभी वे आरजेडी को उसी तरह धकिया रहे हैं जैसा कि 2013 में बीजेपी के साथ किया था. लालू यादव की पार्टी आरजेडी मुस्लिम-यादव के अपने गणित पर टिकी है और लालू यादव ने इस बार भी अपना वही पुराना सेक्युलर कार्ड खेला है लेकिन भगवा पार्टी के साथ अपने 17 साल के करीबी रिश्ते की बुनियाद पर नीतीश इस दांव को बड़ी आसानी से पटखनी दे सकते हैं.

बीजेपी एक बार फिर से नीतीश को गले लगाने के लिए तैयार है. अगर 2014 में आरजेडी नीतीश को भगवा पार्टी का साथ छोड़ने के लिए उकसा रही थी तो अब बीजेपी कुछ वैसा ही करता दिख रही है. बीजेपी की राज्य इकाई के प्रमुख नित्यानंद राय ने कहा है, 'नीतीश ना सोचें कि वे अकेले हैं. हमलोग उनके साथ हैं.'

नीतीश ने अब बिल्कुल साफ कर दिया है कि एनडीए की ओर से खड़ा किए गए राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन देने के फैसले से वे पलटेंगे नहीं. अपने सियासी गठजोड़ का संकेत देते हुए उन्होंने तंजिया लहजे में कहा कि कांग्रेस की अगुवाई वाली विपक्षी पार्टियां 2019 के लोकसभा चुनावों में अपनी हार की रणनीति बना रही हैं और इसमें मैं उनका साथ नहीं देने वाला.

NITISH-KUMAR

नीतीश कर रहे हैं सही वक्त का इंतजार 

जहां तक नीतीश के सियासी मुहावरे का सवाल है, वह अपनी पुरानी टेक पर कायम है. ये वही पुराने नीतीश हैं जिन्होंने कभी बीजेपी पर गठबंधन के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया था. और आज कुछ वैसा ही वे आरजेडी के साथ कर रहे हैं. लालू यादव का आरोप है कि नीतीश मंजूरशुदा सिद्धांतों के खिलाफ जा रहे हैं लेकिन नीतीश ने इस आरोप को नकारते हुए लालू यादव को याद दिलाया है कि महागठबंधन सिर्फ बिहार के लिए बना था.

जेडी (यू) लालू यादव के परिवार के खिलाफ चल रहे इनकम टैक्स की जांच से पहले ही अपना पिंड छुड़ा चुकी है. लालू के छोटे बेटे तेजस्वी उपमुख्यमंत्री हैं और बड़े बेटे तेजप्रताप नीतीश के मंत्रिमंडल में स्वास्थ्य मंत्री हैं.

2015 ही की तरह नीतीश नहीं चाहते कि गठबंधन टूटे लेकिन उन्होंने अपनी मंशा का इजहार कर दिया है. मामला अपने चरम पर उस घड़ी पहुंच सकता है जब लालू यादव के बेटों पर आरोपपत्र तय हो जाए.

ऐसे में नीतीश कुमार उनको मंत्रिमंडल से हटाने का फैसला ले सकते हैं. फिलहाल बिहार की सियासत टेनिस के मैदान में तब्दील हो गई है और आमने-सामने खड़े दोनों पक्ष अपनी तरफ से खेल-जिताऊ मैच प्वाइंट का दम साधे इंतजार कर रहे हैं.

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