S M L

निर्भया कांड: आखिरकार खत्म हुआ निर्भया का इंतजार

5 मई 2017 का दिन इतिहास में अमर हो जाएगा क्योंकि यह न्याय का दिन है

Pratima Sharma Pratima Sharma | Published On: May 05, 2017 05:21 PM IST | Updated On: May 05, 2017 07:49 PM IST

निर्भया कांड: आखिरकार खत्म हुआ निर्भया का इंतजार

16 दिसंबर 2012------------------------------------------------5 मई 2017 

...और खत्म हुआ निर्भया का इंतजार

करीब साढ़े चार साल बाद निर्भया को न्याय मिला है. इस न्याय का सुख भोगने के लिए निर्भया आज हमारे साथ नहीं हैं. लेकिन सुप्रीम कोर्ट की तरफ से मौत की सजा बरकरार रखने से ऐसे अपराध करने वालों को एक सबक जरूर मिलेगा.

जिन लोगों को यह लगता है कि इन दोषियों को रहम मिलना चाहिए. उन्हें एकबार फिर निर्भया के साथ हुए हादसे पर विचार करना चाहिए.

निर्भया... बनने का दर्द

दिसंबर 2012 का दूसरा पखवाड़ा. दिल्ली में सर्दियां शुरू हो चुकी थी. इंडिया गेट पर बड़े-बूढ़े महिलाओं के साथ हजारों की संख्या में युवाओं का हुजूम हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रहा था.

भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठियों के साथ पानी की बौछार करनी शुरू कर दी. दिसंबर के सर्द दिन में ठंडे पानी की बौछार झेलने के बाद भी लोगों का गुस्सा ठंडा नहीं पड़ा था.

न्याय की मांग कर रहे ये लोग अपने लिए नहीं बल्कि निर्भया के लिए पुलिस के डंडे झेल रहे थे.

सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था केस

16 दिसंबर 2016 को दिल्ली को पूरी दुनिया में निर्भया कांड के 4 साल हो गए. आज से ठीक 4 साल पहले दिल्ली के साथ पूरा देश निर्भया को न्याय दिलाने के लिए एक साथ खड़ा हो गया था.

5 मई 2017 को न्याय के लिए निर्भया का इंतजार खत्म हुआ है. इस मामले में बचाव पक्ष के वकील एम एल शर्मा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि इसमें कोई इंडिपेंडेंट आई विटेनस नहीं है. 'निर्भया की तरफ से यह केस सरकारी वकील सिद्धार्थ लूथरा लड़ रहे थे.

बरसी मनाने से नहीं बनेगी बात

Nirbhaya London

समाज और परिवार की चिंता किए बगैर निर्भया के परिवार ने अपनी बेटी को न्याय दिलाने की हर मुमकिन कोशिश की थी.

फास्ट ट्रायल में इस केस की सुनवाई चली जिसके बाद लोअर कोर्ट ने पांच आरोपियों को मौत की सजा सुनाई थी. एक आरोपी की उम्र 18 साल से कम थी जिसे जुवेनाइल कोर्ट भेजा गया था. अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इसपर मुहर लगा दिया है.

निर्भया मामले के बाद आम जनता में काफी रोष था. ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी केस की वजह से कानून में संशोधन करके उसे निर्भया एक्ट नाम दिया गया.

निर्भया कांड के बाद ऐसी लड़कियों की मदद के लिए 10 अरब रुपए से निर्भया फंड बनाया गया, लेकिन अभी तक ठीक से इसका इस्तेमाल नहीं हुआ है. दिवंगत पूर्व मुख्य न्यायधीश जस्टिस जे एस वर्मा की अगुवाई में एक कमेटी बनी थी.

वर्मा कमेटी ने अपनी सिफारिशों में पीड़ितों की मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग की बात भी कही थी.

क्या है मनोवैज्ञानिक पक्ष

Swati_Protest_nirbhaya

इस मामले में जाने-माने मनोवैज्ञानिक के डी ब्रूटा का कहना है, 'किसी भी मामले में फैसला जल्द आने से उसका असर ज्यादा होता है.' उन्होंने कहा कि इसे मनोवैज्ञानिक टर्म में 'पॉजिटिव रीइनफोर्समेंट'और 'नेगेटिव रीइनफोर्समेंट' कहते हैं.

ब्रूटा ने कहा, 'उस वक्त लोगों में जोश था. लोग इस खबर से जुड़े थे. जब खबर आनी बंद हो जाती है तो लोग इसे भूल जाते हैं.'

उन्होंने कहा कि अगर फैसला जल्दी लिया जाता है तो इसका असर पीड़ितों पर 'पॉजिटिव रीइनफोर्समेंट' और अपराधियों पर 'नेगेटिव रीइनफोर्समेंट' के तौर पर पड़ता है.

ब्रूटा ने कहा कि सजा में देरी होने पर अपराधियों में 'इंटेंशनर फॉरगेटिंग' सेंटीमेंट बढ़ जाता है. इस सेंटीमेंट से अपराध होने की आशंका बढ़ जाती है.

उन्होंने कहा, 'इंटेंशनल फॉरगेटिंग' की वजह से लोगों में ऐसी भावना प्रबल हो जाती है कि उनके साथ कुछ भी बुरा नहीं होने वाला है. इससे उनमें अपराध करने की प्रवृति बढ़ती है.

निर्भया की लड़ाई पूरे देश ने एक साथ लड़ी थी, लेकिन कानून के सामने अभी भी निर्भया कतार में है. अब देखना है कि निर्भया का इंतजार कब खत्म होगा.

पॉपुलर

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi

लाइव

Match 3: India 98/2Virat Kohli (C) on strike