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16 दिसंबर निर्भया गैंगरेप केस: कब-क्या और कैसे हुआ

आज सुप्रीम कोर्ट इस मामले में फैसला सुना सकता है.

FP Staff | Published On: May 05, 2017 11:11 AM IST | Updated On: May 05, 2017 02:34 PM IST

16 दिसंबर निर्भया गैंगरेप केस: कब-क्या और कैसे हुआ

दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 की रात को हुए एक मामले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया. मामले की दरिंदगी के पूरे देश को झकझोर दिया. इस मामले के बाद देश में महिलाओं के साथ अपराध को लेकर एक नई बहस शुरू हुई. नए कानून बने और नए उपाय किए गए. इस बीच मामले के आरोपियों पर मुकदमा चलता रहा, सजा भी हुई. अब सुप्रीम कोर्ट में भी आरोपियों की अपील खारिज हो गई है. जानिए इस मामले में क्या-क्या हुआ-

16 दिसंबर 2012: दक्षिणी दिल्ली में एक चलती बस में पैरामेडिकल की छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया. उसके दोस्त की पिटाई की गई. दोनों को महिपालपुर में घायल अवस्था में फेंका गया.

17-18 दिसंबर 2012: पुलिस ने अगले ही दिन चार आरोपियों बस चालक राम सिंह, मुकेश, विनय शर्मा और पवन गुप्ता की पहचान की. चारों को गिरफ्तार कर लिया गया.

18 दिसंबर 2012: लड़की के साथ हुई दरिंदगी की पूरी जानकारी सामने के बाद देशभर में गुस्सा भड़का. संसद में तब की नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने दोषियों के लिए फांसी की मांग की.

20 दिसंबर 2012: बड़ी संख्या में छात्रों ने दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के घर के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया.

21-22 दिसंबर 2012: घटना का पांचवा आरोपी भी पकड़ा गया. वह नाबालिग था. छठा आरोपी अक्षय ठाकुर बिहार से गिरफ्तार हुआ.

22 दिसंबर 2012: निर्भया कांड पर लोग सड़कों पर उतरे. इंडिया गेट पर युवाओं का भारी विरोध शुरू.

23 दिसंबर 2012: निर्भया की हालत गंभीर. प्रदर्शन के दौरान चोट लगने से पुलिस कांस्टेबल सुभाष तोमर की मौत.

26 दिसंबर 2012: निर्भया को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ हॉस्पिटल ले जाने का फैसला.

29 दिसंबर 2012: सुबह के समय दो बजकर 15 मिनट पर निर्भया की सिंगापुर में मौत.

2 जनवरी 2013: तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर ने मामले की तेजी से सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था कराई.

3 जनवरी 2013: पांच आरोपियों के खिलाफ हत्या, गैंगरेप, अपहरण और अन्य आरोपों में चार्जशीट दाखिल.

28 जनवरी 2013: छठवें आरोपी को नाबालिग पाया गया. उस पर जुवेनाइल कोर्ट में मामला.

2 फरवरी 2013: पांचों आरोपियों पर हत्या सहित 13 मामलो में आरोप दाखिल.

11 मार्च 2013: पांच आरोपियों में से एक रामसिंह ने तिहाड़ जेल के अंदर कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.

21 मार्च 2013: नए एंटी-रेप कानून पर मुहर लगी. रेप के लिए फांसी की सजा का प्रावधान किया गया.

11 जुलाई 2013 : नाबालिग को मामले में दोषी पाया गया. जुवेनाईल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग को तीन साल के लिए बाल सुधार गृह भेजा. यह किसी भी नाबालिग के लिए अधिकतम सजा है.

10 सितंबर 2013: चार अन्य बालिग आरोपियों को भी कोर्ट ने मामले में दोषी पाया. 13 मामलों में उन्हें दोषी पाया गया.

13 सितंबर 2013: चारों आरोपियों मुकेश, विनय शर्मा, पवन गुप्ता और अक्षय ठाकुर को मौत की सजा सुनाई गई.

7 अक्टूबर 2013: चार में से दो विनय ठाकुर और अक्षय ठाकुर ने सजा के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की.

13 मार्च 2014: दिल्ली हाईकोर्ट ने चारों आरोपियों को फांसी की सजा के फैसले को सही ठहराया.

2 जून 2014: फिर से दो आरोपियों ने हाईकोर्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की.

14 जुलाई 2014: सुप्रीम कोर्ट ने चारों आरोपियों की फांसी पर सुनवाई पूरी होने तक के लिए रोक लगाई.

18 दिसंबर 2015: नाबालिग की रिहाई से कोर्ट का इंकार. तीन साल की सजा पूरी कर बाहर निकला.

27 मार्च 2017: सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा.

5 मई 2017: सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से दी गई सजा बरकरार रखी.

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