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जन्मदिन विशेष: पाकिस्तान का हीरो या भारत का जासूस?

1968 में स्थापित रॉ ने पाकिस्तान पर रणनीतिक दबाव बनाने के लिए 1971 में एक मिशन लॉन्च किया. जिसका मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान को बेनकाब करना था

FP Staff Updated On: Oct 01, 2017 02:02 PM IST

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जन्मदिन विशेष: पाकिस्तान का हीरो या भारत का जासूस?

हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच लड़ाई चलती रहती है. दोनों देशों की खुफिया एजेंसियां बिना लोगों की नजर में आए तमाम मिशन को अंजाम देती हैं. 1971 के युद्ध से पहले पाकिस्तान के झूठ को बेनकाब करने के लिए रॉ ने एक मिशन शुरू किया था.

इस मिशन की सबसे खास बात यह थी कि इसमें जिस कथित जासूस ने सबसे अहम भूमिका निभाई थी, उस पर भारत और पाकिस्तान का डबल एजेंट होने का आरोप लगा था. मामला क्योंकि रॉ का था लिहाजा इसकी पूरी सच्चाई अभी तक किसी को नहीं पता चली. तमाम लोग अलग-अलग समय पर अलग-अलग दावे करते रहे हैं. कहा जा रहा है कि सुशांत सिंह राजपूत की आने वाली फिल्म रॉ इसी मिशन पर आधारित है.sushant-singh-raw-poster-759_270317-100332-600x314

रॉ अपने एजेंट को एक मिशन के लिए भेजा

1968 में स्थापित रॉ ने पाकिस्तान पर रणनीतिक दबाव बनाने के लिए 1971 में एक मिशन लॉन्च किया. पाक अधिकृत कश्मीर में अल-फतह नाम का एक आतंकवादी संगठन था. इसके 36 मेंबर बीएसएफ ने गिरफ्तार कर लिए. रॉ ने अपने एक एजेंट को ‘अल-फतह’ में भर्ती करवा दिया. पाकिस्तान की आईएसआई ने इस एजेंट को आतंकवादी समझ कर ट्रेन किया. उसे पाकिस्तानी सेना ने प्लेन उड़ाने और हाइजैक करने की ट्रेनिंग दी. कुछ कहानियां बताती हैं कि पाकिस्तान की योजना भारत के किसी हवाई जहाज को हाइजैक करवाने की थी.

खुफिया मिशन की कहानियों में कई बार किस्सों और तथ्यों में फर्क करना मुश्किल हो जाता है. इसके बाद की कहानी के कई वर्जन हैं. कुछ दावे बताते हैं कि रॉ के इस एजेंट ने डबल क्रॉस करने की कोशिश की थी मगर पता चल गया था. कुछ में बताया जाता है कि अलगाववादी मकबूल बट के साथी हाशिम कुरैशी ही वो एजेंट थे, जिनसे जोर-जबरदस्ती करके इस खुफिया मिशन को अंजाम दिलवाया गया.

बहरहाल, एयर इंडिया का एक पुराना रिटायर हो चुका विमान ‘गंगा’ हाइजैक हुआ. विमान को लाहौर ले जाया गया. वहां जुल्फिकार अली भुट्टो ने हाइजैकर्स का स्वागत किया. उन्हें संरक्षण और हीरो जैसा दर्जा दिया गया. अल-फहत के 36 आतंकियों को रिहा करने की मांग हुई, जो पूरी नहीं हुई.

इसके बाद के घटनाक्रम में कुछ ऐसे बिंदु हैं जो इस पूरे प्रकरण में रॉ के शामिल होने की थ्योरी को हवा देते हैं. इस हाइजैक ने पाकिस्तान को रणनीतिक तौर पर बहुत नुकसान पहुंचाया था. हाईजैकिंग होते ही भारत ने पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों को मदद देने की बात दुनिया के सामने रखी. इसी आधार पर भारत के हवाई क्षेत्र से पाकिस्तान की फ्लाइट्स का निकलना बैन हो गया. इस बैन के चलते ही पाकिस्तानी सेना का बांग्लादेश पहुंचना काफी धीमा हो गया जिसका सीधा फायदा सेना को 1971 के युद्ध में मिला.

हाशिम कुरैशी को पाकिस्तान ने गिरफ्तार कर लिया

शुरुआत में हाशिम कुरैशी को ISI ने हीरो बनाया, कुछ समय बाद ही हाशिम को पाकिस्तान में गिरफ्तार कर लिया गया. हाईजैकर्स की कोई भी मांग नहीं मानी गई. अल फतह के कई एजेंट इसके बाद पकड़ लिए गए.

गंगा के सारे यात्री पैदल रास्ते से लाहौर से अमृतसर आ गए. भारत ने गंगा को वापस लेने की कोई कोशिश नहीं की और पाकिस्तानी सेना ने उसको जला दिया. रॉ के कुछ पूर्व अधिकारियों का दावा है कि हाइजैकर बने हाशिम कुरैशी के पास महज खिलौना बंदूक और नकली ग्रेनेड था.

एमएल सिन्हा जैसे कई पूर्व इंटेलिजेंस अफसर और पाकिस्तान सरकार भी इस मिशन में भारत सरकार के शामिल होने की बात कह चुके हैं. मगर अलगाववादी कश्मीरी नेता के रूप में पहचान बना चुके हाशिम अभी भी इसे खारिज करते हैं. इन सभी मिशन का पूरा सच क्या होता है, जनता को कभी पता नहीं चल पाता है. फिल्म में भी कई घटनाओं को कल्पना के साथ मिलाकर एक फैंटेसी बुन दी जाती है. इस फिल्म में भी ऐसा होगा. मगर इस बहाने ही सही, गुमनाम रहकर देश के लिए काम करने वाले इन लोगों की कहानी के कुछ हिस्से सबके सामने आ जाते हैं.

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