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नवरात्र स्पेशल: बकरियां बेचकर टॉयलेट बनवाने वाली कुंवर बाई

कुंवर बाई ने अपनी आधा दर्जन बकरियों को सिर्फ इसलिये बेच दिया क्योंकि उन्हें घर में शौचालय बनवाना था.

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: Sep 22, 2017 07:42 PM IST

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नवरात्र स्पेशल: बकरियां बेचकर टॉयलेट बनवाने वाली कुंवर बाई

देश के प्रधानमंत्री ने जिस मां के पैर छुए उसकी कायनात का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है. 104 साल की उम्र की इस महिला के आदर्श को देश प्रणाम कह रहा है. आज ये नारी स्वच्छता और समर्पण की प्रतीक है. नाम है कुंवर बाई.

छत्तीसगढ़ में रायपुर से करीब 90 किमी दूर धमतरी की रहने वाली कुंवर बाई की कहानी सुन कर खुद पीएम मोदी भी उनके कायल हो गए. ‘मन की बात’ में पीएम को कुंवर बाई का जिक्र करना पड़ा. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि उन्होंने स्वच्छता के लिए जो काम किया वो कम ही दिखाई देता है.

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कुंवर बाई ने अपनी पाली हुई आधा दर्जन बकरियों को सिर्फ इसलिए बेच दिया था, क्योंकि उन्हें गांव में शौचालय बनवाना था. गांव में टॉयलेट बनवाने के लिए उन्होंने बकरियों को बेचकर 22 हजार रुपए जुटाए. उस पैसे से गांव में महिलाओं और पुरुषों के लिए पहला टॉयलेट बनवाया.

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इतना ही नहीं उन्होंने गांव में लोगों को टॉयलेट बनवाने के लिए जागरुकता अभियान चलाया. जिन लोगों के पास टॉयलेट बनवाने के लिए पैसे नहीं थे उन्हें आर्थिक मदद दी. कुंवर बाई की कोशिश का ही नतीजा है कि उनके गांव में हर घर में टॉयलेट है.

22 हजार की बकरियां बेचकर बनवाए शौचालय

कुंवर बाई की कहानी में भी त्रासदी और संघर्ष की विरासत है. दो बेटों की मौत ने उन्हें नितांत अकेला बना दिया. छोटे बेटे की बचपन में मौत और बड़े बेटे की जवानी में मौत ने गरीबी में संघर्ष को बढ़ा दिया.

कुंवर बाई के लिए सबसे मुश्किल समय शौचालय के लिए बाहर जाना होता था. यही समस्या जब उन्होंने अपनी बहू और पोती के लिए देखी तो उन्होंने तय किया कि वो घर में शौचालय बनवाएंगीं. उन्होंने अपनी बकरियां बेचकर 22 हजार रुपए जुटाए और उसे शौचालय बनवाने में लगा दिया.

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कुंवर बाई ने गांव की दूसरी महिलाओं को भी घर में शौचालय बनाने के लिए प्रेरित किया. उनके गांव में कुल 18 परिवार हैं और अब उनकी वजह से हर घर में शौचालय है.

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कुंवर बाई के स्वच्छता को लेकर जागरूक प्रयास से धमतरी के बाहर भी उनकी ख्याति पहुंची. राजनांदगांव में श्यामा प्रसाद मुखर्जी शहरी मिशन के समारोह में पीएम मोदी ने मंच पर कुंवर बाई के पैर छुए. कुंवर बाई को स्वच्छ भारत अभियान के लिए शुभंकर भी चुना गया है.

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स्वच्छता को लेकर कुंवर बाई ने अपनी रोजी रोटी का जरिया ही बेच डाला. यहां तक कि गांववालों को भी स्वच्छता का पाठ पढ़ा डाला. खास बात ये है कि पीएम मोदी के मन की बात में स्वच्छता की बात उन तक पहुंच गई.

दरअसल कुंवर बाई न टीवी देखती हैं और न ही अखबार पढ़ती हैं, लेकिन मन की बात उनके मन तक उतर गई और उन्होंने पीएम मोदी से प्रेरणा लेकर टॉयलेट बनवाने का प्रण किया और उसे पूरा भी किया.

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