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अमेरिका यात्रा: पीएम मोदी के डोनाल्ड ट्रंप से मिलने के संभावित एजेंडे क्या होंगे?

डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी के बीच व्यापार और रक्षा जैसे मुद्दे चर्चाओं के मुख्य हिस्से होंगे

FP Staff | Published On: Jun 13, 2017 05:59 PM IST | Updated On: Jun 13, 2017 07:32 PM IST

अमेरिका यात्रा: पीएम मोदी के डोनाल्ड ट्रंप से मिलने के संभावित एजेंडे क्या होंगे?

जब डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में व्हाइट हाउस में प्रवेश किया था, तो भारत-अमेरिकी संबंध उसी राह पर चलता हुआ सा लगा रहा था, जिसपर चलकर तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में यह रिश्ता फला-फूला था.

बीबीसी के मुताबिक, जनवरी के शुरू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ हुई अपनी बातचीत को गर्मजोशी के साथ ट्वीट किया था. उसी समय, ट्रंप ने 'दुनिया भर में चुनौतियों का सामना करने में भारत को एक सच्चे दोस्त और सहयोगी' के रूप में जिक्र किया था. दोनों नेता भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और विकसित करने को लेकर आश्वस्त थे.

हालांकि, ये बातें शुरुआती दौर से कुछ बिगड़ती हुई सी दिखती हैं. पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते को लेकर उनके दिए गए भाषण में भारत को लेकर ट्रंप की अपमानजनक टिप्पणी के साथ ही इन दोनों बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच लंबे समय से स्थापित संबंधों में संभावित बदलाव के संकेत मिलने लगे थे.

मोदी ट्रंप के अलावा अमेरिकी कंपनियों के प्रमुखों से भी मिलेंगे

पेरिस समझौते से अपने हाथ खींचते ही ट्रंप ने सीधे तौर पर भारत पर हमला करते हुए कहा कि इस समझौते का हिस्सा बनने की जरूरत के रूप में भारत ने 'अरबों अरब' की विदेशी सहायता ऐंठी है. इस सीधे हमले ने ट्रंप के भारतीय समर्थकों को भड़का दिया है और इससे दोनों देशों के बीच का रिश्ता कमजोर पड़ सकता है.

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फिर भी, मोदी 26 जून को व्हाइट हाउस का दौरा करने की तैयारी में हैं. मोदी का यह अमेरिकी दौरा इस साल जुलाई में हैम्बर्ग में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन से ठीक पहले- ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद का यह पहला दौरा है. हालांकि, ऐसा लगता है कि मोदी की इस यात्रा को लेकर ज्यादा कुछ नहीं बताया गया है. यहां हम कुछ ऐसी बातों का जिक्र कर सकते हैं, जिसे लेकर हम जानते-समझते हैं.

द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, इस यात्रा में किसी भी तरह का कोई तामझाम नहीं होगा. इस यात्रा के दौरान मोदी की ट्रंप और एक-एक कर कुछ अमेरिकी कंपनियों के प्रमुखों के साथ बातचीत होगी. प्रधानमंत्री की यह यात्रा सितंबर 2014 की संयुक्त राज्य अमेरिका की उस यात्रा से अलग है, जिस दौरान उन्होंने जून 2016 में अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त बैठक में मैडिसन स्क्वायर गार्डन में उमड़ी भारी भीड़ को संबोधित किया था.

इस आलेख में प्रधानमंत्री की 26 जून की यात्रा की रूप रेखा को लेकर कुछ संभावित कारण बताए गए हैं. सबसे पहले तो दूसरे देशों के नेतृत्व के साथ ट्रंप के व्यवहार उनके 'छोटी बैठकों और मामूली परिणामों' के लिए कुख्यात रहा है. ट्रंप के चंचल और अस्थिर व्यक्तित्व और अप्रत्याशित नीति परिवर्तन को देखते हुए, डीसी का माहौल अस्थिर है.

इसमें कोई शक नहीं कि इससे मोदी की यात्रा और निर्णय भी प्रभावित होंगे. दरअसल, यह यात्रा व्हाइट हाउस के नए अधिकारियों को 'जानने को लेकर' ज्यादा केंद्रित लगती है और द्विपक्षीय नीति परिणाम पृष्ठभूमि में होंगे.

साथ ही, कुछ मुद्दों को निश्चित रूप से छुआ जाएगा, जिनमें से एक H1B वीजा होगा. हिंदुस्तान टाइम्स के एक आलेख के मुताबिक, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज H1B वीजा को सख्ती से लागू किए जाने को लेकर ट्रंप के संभावित फैसले से चिंतित हैं.

भारत और अमेरिका मिलकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ेंगे

ट्रंप ने पहले ही एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसकी मांग है कि H1B वीजा सिर्फ 'सबसे ज्यादा कुशल और उच्चतम भुगतान करने वाले' आवेदकों (और एकाएक लॉटरी के माध्यम से नहीं) को दिया जा सकता है. इसके अलावा, उन्होंने घोषणा की है कि उन्हें अमेरिकियों को नौकरी से हटाने के लिए भी इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. यह 'पहले अमेरिका' वाली पहल भारत के श्रमिकों को दिए गए वीजा की संख्या को संभावित रूप से कम कर सकती है.

मोदी की यात्रा के दौरान एक अन्य मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना सबसे ज्यादा है और वह है, भारत-अमेरिकी आतंकवाद विरोधी साझेदारी. यह एक ऐसा विषय है जिसे मोदी और ट्रंप ने जनवरी में हुई अपनी पहली बातचीत में उठाया था और जिसमें अभी तक कोई बदलाव नहीं हुआ है.

जैसा कि रॉयटर ने लिखा है कि उस पहली बातचीत में दोनों नेताओं ने 'यह संकल्प लिया था कि संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में कंधे से कंधे मिलाकर खड़े रहेंगे.'

Donald Trump

द इकोनॉमिक टाइम्स के आलेख के मुताबिक, सीमा पार आतंकवाद से निपटने की बातचीत के दौरान, अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र पर भी चर्चा होगी. इसके अलावा, इस लेख में स्तंभकार बताते हैं, 'पिछले दशक में रक्षा साझेदारी भारत-अमेरिका संबंधों का एक खास स्तंभ रही है.'

भारत के साथ अमेरिका का 'महत्वपूर्ण' वस्तु व्यापार घटा है

इस समय, अमेरिका रक्षा प्रणाली भारत की खरीद बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है और जैसा कि लगता है कि रक्षा प्रौद्योगिकी और व्यापार पहल (डीटीटीआई) के तहत रक्षा वाहनों और हथियारों के साझा उत्पादन का मुद्दा भी बातचीत का एक अन्य हिस्सा होगा.

आखिरकार, ट्रंप प्रशासन बढ़ते अमेरिकी व्यापार घाटे से चिंतित है और व्यापार भागीदारों में से एक के रूप में भारत का नाम लेते हुए कहा है कि भारत के साथ अमेरिका का 'महत्वपूर्ण' वस्तु व्यापार घटा है. इस तरह प्रधानमंत्री की इस यात्रा के दौरान एक दूसरे से जुड़े हुए व्यापार और रक्षा जैसे मुद्दे ट्रंप और मोदी के बीच की चर्चाओं के हिस्से होंगे.

आखिर में द इंडियन एक्सप्रेस की इस बात का जिक्र करना शायद ज्यादा जरूरी होगा, जिसमें अमेरिका में भारतीय राजदूत, नवतेज सरना के हवाले से बताया गया है कि भारत-अमेरिका संबंधों को 'साझेदारी' के रूप में परिभाषित करना इन दोनों देशों के बीच के संबंधों में सकारात्मक घटनाक्रम की कुंजी होगी. दूसरे शब्दों में, दोनों देश एक दूसरे को लेकर बराबर और सकारात्मक रूप से योगदान देते हैं और इसे आगे भी जारी रहना चाहिए.

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