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भारत में खाद्य प्रोसेसिंग क्षेत्र में निवेश के विशाल अवसर: कोविंद

कोविंद ने कहा कि यह उद्योग एक बड़ा नियोक्ता हो सकता है. देश की बड़ी युवा आबादी को देखते हुए यह उद्योग काफी महत्वपूर्ण हो जाता है

Bhasha Updated On: Nov 05, 2017 07:17 PM IST

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भारत में खाद्य प्रोसेसिंग क्षेत्र में निवेश के विशाल अवसर: कोविंद

देश की खाद्य खपत 2025 तक 1,000 अरब डॉलर पर पहुंच जाएगी. राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने रविवार को कहा कि देश में खाद्य उत्पादों के उत्पादन से लेकर विपणन तक की पूरी मूल्य श्रृंखला में देशी विदेशी के लिए निवेश के भारी अवसर उपलब्ध हैं.

यहां तीन दिन के वैश्विक खाद्य सम्मेलन एवं प्रदर्शनी के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कोविंद ने कहा कि यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें कारोबार की काफी संभावनाएं हैं. इस क्षेत्र में महिलाओं और बड़ी संख्या में देश की युवा आबादी के लिए रोजगार सृजन की संभावनाएं हैं.

उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण पर ध्यान देने से न केवल अनाज की बर्बादी के अस्वीकार्य स्तर को समाप्त किया जा सकेगा, बल्कि इससे किसानों की आय को दोगुना करने में भी मदद मिलेगी.

देश की अमरूद की 16 प्रतिशत फसल बर्बाद हो जाती है

राष्ट्रपति ने कहा, ‘खाद्य एक संस्कृति है, लेकिन इसके साथ ही यह वाणिज्य भी है. भारत की खाद्य खपत या उपभोग अभी 370 अरब डॉलर है. इसके एक दशक से भी कम यानी 2025 तक 1,000 अरब डॉलर पर पहुंचने की उम्मीद है. देश की समूची खाद्य मूल्य श्रृंखला में काफी संभावनाएं हैं.’

उन्होंने कहा कि कटाई बाद सुविधाओं, लॉजिस्टिक्स, शीत भंडारण श्रृंखला और विनिर्माण में काफी अवसर हैं. यह घरेलू और विदेशी निवेश आकर्षित करने वाला एक प्रमुख क्षेत्र है.

उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारतीय खाद्य उत्पादों का बाजार काफी बड़ा है.‘ यह दक्षिण एशिया के 1.8 अरब लोगों से लेकर तीन करोड़ की मजबूत प्रवासी आबादी से लेकर दुनिया के अन्य हिस्सों में लाखों करोड़ों लोगों तक फैला है.

राष्ट्रपति ने कहा कि इस तरह भारतीय खाद्य उद्योग आपको चबाने का अवसर देता है. हजम करें और निवेश करें. कोविंद ने कहा कि आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण से चीजों को बदलने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों की बर्बादी रोकने के लिए निवेश के साथ प्रौद्योगिकी समाधन की भी जरूरत है, जो अभी अस्वीकार्य स्तर पर है.

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि देश की अमरूद की 16 प्रतिशत फसल बर्बाद हो जाती है. आम व सेब की भी दस प्रतिशत फसल बर्बाद होती है.

कोविंद ने कहा कि यह उद्योग एक बड़ा नियोक्ता हो सकता है. देश की बड़ी युवा आबादी को देखते हुए यह उद्योग काफी महत्वपूर्ण हो जाता है.

 

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