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मेट्रो मैन श्रीधरन: वक्त की पाबंदी ने बनाया खास

वक्त पर काम खत्म करने पाबंद श्रीधरन ने साबित कर दिया है कि ब्यूरोक्रेसी और गवर्नेंस के साथ भी काम वक्त पर खत्म किया जा सकता है

Pratima Sharma Pratima Sharma | Published On: Jun 17, 2017 04:47 PM IST | Updated On: Jun 17, 2017 06:18 PM IST

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मेट्रो मैन श्रीधरन: वक्त की पाबंदी ने बनाया खास

वक्त की पाबंदी के बारे में भारतीयों की आदतों को कौन नहीं जानता. खासतौर पर बात जब सरकारी अधिकारियों की हो तो उन्हें टालमटोल के लिए ही जाना जाता है. लेकिन इन सबके बीच एक शख्स ने वक्त की पाबंदी की मिसाल पेश की. यह शख्स कोई और नहीं बल्कि देश में मेट्रो शुरू करने वाले मेट्रो मैन ई. श्रीधरन हैं.

कोच्चि मेट्रो भी दौड़ाई

ब्यूरोक्रेसी और गवर्नेंस की उलझनों के बावजूद श्रीधरन ने दिल्ली में न सिर्फ टाइम पर मेट्रो शुरू किया बल्कि कुछ लाइनों का काम वक्त से पहले भी पूरा कर दिया. दिल्ली में श्रीधरन की काबिलियत को देखकर ही कोच्चि मेट्रो की जिम्मेदारी उन्हें दी गई थी.

कोच्चि मेट्रो प्रोजेक्ट 5000 करोड़ रुपए का है. श्रीधरन को कोच्चि मेट्रो की जिम्मेदारी देने को लेकर शुरुआत में काफी बहस हुई थी. कोच्चि मेट्रो की शुरुआत उस वक्त हुई थी जब वहां ए के एंटोनी सीएम थे. उस वक्त खाद्य एवं कंज्यूमर मामलों के मंत्री के वी थॉमस ने कहा था कि व्यक्तिगत तौर पर उन्हें लगता है कि डीएमआरसी को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और श्रीधरन को इसकी निगरानी का काम देखना चाहिए.

क्या है काम करने का स्टाइल?

श्रीधरण के काम करने के स्टाइल के बारे में जानने वाले लोगों का कहना है कि वे मुश्किलों का हल बड़ी आसानी से निकाल लेते हैं. शायह यही वजह है कि दिल्ली के बाद कोच्चि ही वह शहर है, जहां मेट्रो का काम इतनी तेजी से हुआ है. इन दोनों का श्रेय श्रीधरन को ही जाता है.

कोच्चि में पहले फेज में 13 किलोमीटर की दूरी तय की गई है. इसमें 11 स्टेशन हैं और यह पूरी दूरी तय करने में 25 मिनट का वक्त लगता है. 2017 में कोच्चि के अलावा हैदराबाद, लखनऊ और ग्रेटर नोएडा में भी मेट्रो का काम शुरू होगा.

श्रीधरन की अगुवाई में दिल्ली मेट्रो के पहले फेज का काम 1998 में निर्माण कार्य शुरू हुआ था. इसके तहत 2002 में सबसे पहले रेड लाइन पर मेट्रो चलनी शुरू हुई थी. पहले फेज में रेड लाइन (शाहदरा-रिठाला), येलो लाइन (विश्वविद्यालय -सेट्रल सेक्रेटेरियट), ब्लू लाइन (द्वारका सेक्टर 9-इंद्रप्रस्थ) है. ब्लू लाइन की मेट्रो 2006 में शुरू हुई थी.

जरूरी है वक्त पर काम पूरा होना

भारत जैसे देश जहां इंफ्रास्ट्रक्चर की इतनी कमी है, वहां वक्त पर काम पूरा होने से लोगों की कई समस्याओं का अंत हो सकता है. श्रीधरन ने 4 नवंबर 1997 में दिल्ली मेट्रो की जिम्मेदारी ली थी. उनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2011 तक रहा. इस दौरान उन्होंने दिल्ली मेट्रो के फेज 1 और फेज 2 का काम पूरा किया था. श्रीधरन ने जिस तेजी और कुशलता से दिल्ली मेट्रो का काम पूरा किया, उससे उनकी एक खास पहचान बनी. हालांकि यही तेजी मेट्रो के तीसरे चरण में देखने को नहीं मिली.

1 जनवरी 2012 से दिल्ली मेट्रो की जिम्मेदारी मंगू सिंह को मिल गई. मंगू सिंह के आने के बाद मेट्रो की स्पीड धीमी हो गई. इसका एक फर्क आपको हेरिटेज लाइन में देखने को मिला. हेरिटेज लाइन में लगातार देरी होती रही. पिछले महीने 26 मई को इस लाइन का उद्घाटन हुआ था.

इस प्रोजेक्ट के बारे में डीएमआरसी के प्रमुख मंगू सिंह ने कहा कि पिछले साल दिसंबर में यह लाइन तैयार थी, लेकिन मजदूरों के संकट के कारण इसमें देरी हुई थी.

दिल्ली मेट्रो आजकल अपनी सुविधा के लिए कम और तकनीकी खामियों के लिए ज्यादा लोकप्रिय हो गया है. आए दिन किसी न किसी खामी की वजह से मेट्रो की रफ्तार कम हो जाती है. ऐसे में दिल्लीवालों को श्रीधरन की याद खूब सताती है.

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