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मध्य प्रदेश में सरकारी शादी: मास्टरों के विषय बने पूड़ी रायता और बूंदी

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत आयोजित किए गए इस विवाह समारोह में लगभग 2800 जोडों को विवाह और निकाह एक ही मंच के नीचे आयोजित हुआ

Dinesh Gupta Updated On: May 22, 2017 06:14 PM IST

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मध्य प्रदेश में सरकारी शादी: मास्टरों के विषय बने पूड़ी रायता और बूंदी

मध्य प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं. ऐसे में राज्य सरकार नर्मदा यात्रा से लेकर सामूहिक विवाह तक करा रही है. ऐसे ही एक सरकारी आयोजन के चलते मध्य प्रदेश सरकार के एक जिला शिक्षा अधिकारी ने बाकायदा आदेश निकाल कर सरकारी टीचरों को विषय अलॉट किए. इनके विषय थे पूड़ी, रायता, बूंदी और दाल.

ये बात है मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिला मुख्यालय पर सोमवार को आयोजित हुए सरकारी विवाह समारोह की. मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत आयोजित किए गए इस विवाह समारोह में लगभग 2800 जोडों को विवाह और निकाह एक ही मंच के नीचे आयोजित हुआ. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस विवाह समारोह में हिस्सा लिया और कन्यादान की रस्म पूरी की.

सेवा में लगे रहे पांच हजार कर्मचारी

सिंगरौली जिले में तैनात हर छोटे -बड़े अधिकारी, कर्मचारी की ड्यूटी इस विवाह समारोह में मेहमानों की खतिरदारी के लिए लगाई थी. विवाह समारोह के लिए लगभग छह लाख फुट का पंडाल लगाया था. विवाह समारोह में हिस्सा लेने वाले लगभग एक लाख से अधिक मेहमानों के लिए दावत का इंतजाम किया गया था. दावत का जिम्मा मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम को सौंपा गया था.

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सिंगरौली के कलेक्टर शिवनारायण चौहान के आदेश पर सिंगरौली के जिला शिक्षा अधिकारी ने जिले के मास्टरों की ड्यूटी पातल-दोना और पूडी, पानी के वितरण में लगाई.

मध्यप्रदेश के लोक शिक्षा आयुक्त नीरज दुबे कहते हैं कि अभी स्कूलों में अवकाश है. शिक्षण कार्य बंद है. ऐसे में यदि मास्टर किसी नेक कार्य में हाथ बंटाते हैं तो बुराई क्या है?

लिम्का बुक में नाम दर्ज कराने की कवायद

सिंगरौली में व्यापक स्तर पर विवाह समारोह आयोजित करने के पीछे जिला कलेक्टर शिवनारायण चौहान की मंशा लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में अपना नाम दर्ज कराने की है. अभी लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में मध्यप्रदेश के ही कटनी जिले का नाम है.

कटनी में एक ही पंडाल में 2200 शादियां कराने का रिकार्ड बनाया गया था. इस रिकार्ड को तोड़ने के लिए ही सिंगरौली में 2800 जोडों का विवाह तय कराने का लक्ष्य रखा गया था. रिकार्ड तोड़ने के लिए जिला प्रशासन पिछले एक माह से ऐसे जोड़ों को तलाश कर रहा था,जिनके विवाह भविष्य में होने वाले हैं.

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तमाम कोशिशों के बाबजूद रविवार की शाम तक 1700 जोडें ही सूचीबद्ध हो सके. सोमवार की सुबह से जिला प्रशासन फिर सक्रिय हुआ और रिकार्ड तोड़ने लायक संख्या जुटाने का दावा कलेक्टर चौहान की ओर से किया गया.

आवास और शौचालय की राशि भी

विवाह समारोह को एतिहासिक बनाने और लोगों को आकृषित करने के लिए सरकार ने इसमें हितग्राही मूलक योजनाओं का लाभ देना भी जोड़ दिया. प्रत्येक जोड़ों को एक इंदिरा आवास, और शौचालय के निर्माण के लिए राशि भी देना तय किया गया.

प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत गैस कनेक्शन को भी इसमें जोड़ा गया है. ये मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत दी जाने वाली सुविधाओं से अलग है.

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मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत प्रत्येक जोड़ों को बीस हजार रुपए की राशि फिक्स डिपाजिट के तौर पर दी जाती है. गृहस्थी का सामान भी दिया जाता है. बिछिया, पायल और अन्य सामग्री और बर्तन देने का भी प्रावधन नियमों में है.

योजना वर्ष 2006 में शुरू हुई है. वर-वधू के चांदी के जेवर और गहनों पर सरकार लगभग डेढ़ करोड़ रुपए खर्च कर रही है. छह करोड़ फिक्स डिपाजिट हैड में रखे गए हैं. डेड़ करोड़ रुपए का खर्च सिर्फ भोजन पर किया जा रहा है. पंडाल और टेंट पर सरकार ने डेढ़ करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान लगाया है.

कॉरपोरेट घरानों की भी है भागीदारी

मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिला मुख्यालय की पहचान पावर हब के तौर है. यहां कई बड़े औद्योगिक समूह के कारखाने हैं. विवाह समारोह में सरकार ने कारपोरेट घरानों की भागीदारी भी सुनिश्चित की है. कारपोरेट घरानों की ओर से वर-वघू को कीमती उपहार भी देना तय किया गया.

जोड़ों और मेहमानों को लाने-छोड़ने तथा रुकने की व्यवस्था भी करने का जिम्मा इन घरानों के पास है. कारपोरेट घरानों द्वारा इस कार्यक्रम पर लगभग एक करोड़ रुपए खर्च किए जाने का अनुमान है.

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