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बाबरी विध्वंस मामला: आडवाणी पर लगा 'आरोप' अपने सर लेने लगे रामभक्त

कांग्रेस ने कहा, इस मामले में प्रधानमंत्री को अवश्य आगे आना चाहिए

Bhasha | Published On: May 31, 2017 11:10 AM IST | Updated On: May 31, 2017 11:28 AM IST

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बाबरी विध्वंस मामला: आडवाणी पर लगा 'आरोप' अपने सर लेने लगे रामभक्त

बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, केंद्रीय मंत्री उमा भारती और नौ अन्य 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में आपराधिक साजिश के आरोप में मुकदमे का सामना करेंगे. लखनऊ की एक विशेष अदालत ने आरोपियों के खिलाफ मंगलवार को आरोप तय किए.

कोर्ट की कार्रवाई से पहले कई बारे में कई बयान सामने आए. उमा भारती ने साजिश के आरोपों को खारिज किया और पीएम मोदी से मामले में हस्तक्षेप की अपील की. वहीं, महंत राम विलास वेदांती ने कहा कि अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाने वालों में वह भी शामिल थे लेकिन आडवाणी और जोशी की इसमें कोई भूमिका नहीं है.

सभी 12 आरोपियों पर आपराधिक साजिश के गंभीर आरोपों के तहत उनके खिलाफ मुकदमा चलेगा. निचली अदालत ने 2001 में उनके खिलाफ ये आरोप हटा दिए थे और 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस फैसले को बरकरार रखा था.

हाई कोर्ट ने 19 अप्रैल को उनके खिलाफ आपराधिक साजिश के आरोप को बरकरार रखने का आदेश दिया था.

आडवाणी, जोशी, भारती, बीजेपी सांसद विनय कटियार, के विष्णु हरि डालमिया और साध्वी रितंभरा के खिलाफ आरोप तय किए गए. सभी आरोपी मंगलवार को अदालत के समक्ष उपस्थित हुए थे.

विशेष सीबीआई कोर्ट एस के यादव ने सभी 6 आरोपियों में से प्रत्येक को 50-50 हजार रुपए के पर्सनल बॉन्ड पर जमानत दे दी. सीबीआई ने आरोपियों की जमानत याचिका का विरोध किया था. कोर्ट बुधवार को सुनवाई बहाल करेगा.

आरोपियों ने आपराधिक साजिश के आरोप से खुद को आरोप मुक्त करने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया. आरोपियों ने अदालत में तकरीबन तीन घंटे बिताए.

आपराधिक साजिश का आरोप उनके खिलाफ धार्मिक आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता फैलाने के पहले से मौजूद आरोपों के अतिरिक्त है. समूहों के बीच शत्रुता फैलाने के आरोप में वे पहले ही मुकदमे का सामना कर रहे हैं.

शीर्ष अदालत ने आपराधिक साजिश के आरोपों को बहाल करने के दौरान विध्वंस से जुड़े दोनों मामलों को जोड़ने का निर्देश दिया था. अदालत ने यह भी आदेश दिया था कि दो साल में मुकदमे को समाप्त किया जाए.

इन 6 लोगों के अलावा आपराधिक साजिश के आरोप रामविलास वेदांती, बैकुंठ लाल शर्मा, चंपत राय बंसल, महंत नृत्य गोपालदास, धरमदास और सतीश प्रधान सभी उस वक्त मौजूद थे, जब अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को गिराया गया था.

न्यायाधीश यादव ने एक आदेश जमानत देने के लिए और दूसरा आरोप तय करने के लिए दिया.

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'राम मंदिर निर्माण को कोई ताकत नहीं रोक सकती'

सीबीआई की विशेष अदालत में सुनवाई के लिए आए साक्षी महाराज ने कहा, 'मैंने कोई अपराध नहीं किया है. मैंने कुछ गलत नहीं किया है. वस्तुत मैं सौभाग्यशाली हूं . धरती की कोई ताकत अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण को नहीं रोक पाएगी.'

उन्होंने कहा, 'अब इस बारे में और बहस नहीं होनी चाहिए क्योंकि जिन्होंने राम मंदिर का विरोध किया था, आज वे ही राम भक्त हो गए हैं. मुसलमान खुद इसके लिए आगे आ रहे हैं.'

महाराज ने कहा कि बाबर विदेशी था और उसका भारत से कोई लेना देना नहीं था. मीडिया को भी बार बार इसे ‘बाबरी’ नहीं कहना चाहिए. यह ‘राम जन्मभूमि’ है.

उधर महंत राम विलास वेदान्ती ने कहा कि अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाने वालों में वह भी शामिल थे. बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी की इसमें कोई भूमिका नहीं है.

अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाये जाने के मामले की सुनवाई के सिलसिले में सीबीआई की विशेष अदालत में पेश होने आये वेदांती ने कहा, 'अयोध्या में विवादित ढांचे की मीनार गिराने वालों में मैं भी शामिल था.'

उन्होंने कहा, 'आडवाणी और जोशी निर्दोष हैं.' वेदांती ने कहा कि वह अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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तस्वीर: पीटीआई

राज्यपाल के पद तक कल्याण सिंह को मुकदमे से छूट

हालांकि, शीर्ष अदालत ने कहा था कि बीजेपी नेता और राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह जब तक राज्यपाल के पद पर रहेंगे तब तक उन्हें मुकदमे से छूट है. कल्याण सिंह बाबरी मस्जिद को जब गिराया गया था, उस वक्त उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे.

सीबीआई ने इस मामले में 21 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था. शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे और विहिप के आचार्य गिरिराज किशोर, अशोक सिंघल, परमहंस रामचंद्र दास और महंत अवैद्यनाथ समेत कई की मौत हो चुकी है.

मंदिर गिराने में बीजेपी के करोड़ों कार्यकर्ता थे शामिल

केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने अदालत के समक्ष उपस्थित होने से पहले कहा कि मस्जिद को आपराधिक साजिश के तहत नहीं गिराया गया था, बल्कि खुले आंदोलन के तहत गिराया गया था.

उन्होंने कहा, मैं 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में मौजूद थी, जो रहस्य नहीं है. करोड़ों बीजेपी कार्यकर्ता, लाखों अधिकारी और हजारों नेताओं ने उसमें हिस्सा लिया था.

यह आपातकाल के खिलाफ आंदोलन की तरह एक खुला आंदोलन था. मैं इसमें कोई साजिश नहीं देखती हूं.' बीजेपी सांसद विनय कटियार ने कहा, ‘कोई साजिश नहीं थी क्योंकि ढांचे को बड़ी भीड़ ने खुलेआम गिराया.'

प्रधानमंत्री को मामले में आगे आना चाहिए

उधर, कांग्रेस ने आज केंद्रीय मंत्री उमा भारती के इस्तीफे की मांग की और प्रधानमंत्री से कहा कि वह विधि के शासन और संविधान को कायम करें. भारती के खिलाफ बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में लखनऊ की एक विशेष अदालत ने आपराधिक साजिश का आरोप तय किया है.

कांग्रेस ने उम्मीद जताई कि ढांचे को गिराए जाने के 25 साल बाद न्याय होगा और दोषी को देश के कानून के अनुसार दंडित किया जाएगा.

कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने कहा, 'आरोपियों में से एक उमा भारती केंद्रीय कैबिनेट मंत्री हैं. आरोप पत्र दायर किए जाने के बाद उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए. प्रधानमंत्री को अवश्य आगे आना चाहिए और विधि के शासन और संविधान को कायम करना चाहिए.'

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