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कर्नाटक के बैंककर्मियों को आदेश, कन्नड़ सीखो या नौकरी गंवाओ

केडीए ने कहा है कि अगर कर्मचारी छह महीने में कन्नड़ सीखने में नाकाम रहे तो भर्ती नियमों के अनुसार उन्हें उनकी नौकरी से हटा दिया जाना चाहिए

FP Staff Updated On: Aug 08, 2017 04:23 PM IST

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कर्नाटक के बैंककर्मियों को आदेश, कन्नड़ सीखो या नौकरी गंवाओ

कर्नाटक डेवलपमेंट अथॉरिटी ने राष्ट्रीय, ग्रामीण और प्राइवेट बैंकों के क्षेत्रीय प्रमुखों को अनिवार्य रुप से कन्नड़ भाषा सीखने के आदेश दिए हैं. इस आदेश के अनुसार, गैर-कन्नड़ भाषी कर्मचारियों को अगले छह महीने के अंदर कन्नड़ भाषा सीखने को कहा गया है.

बैंकों को जारी किए गए एक आदेश में, केडीए ने कहा है कि अगर कर्मचारी छह महीने में कन्नड़ सीखने में नाकाम रहे, तो भर्ती नियमों के अनुसार उन्हें उनकी नौकरी से हटा दिया जाना चाहिए.

केडीए ने कहा कि कन्नड़ में कामकाज को सभी तरह की बैंक शाखाओं में अनिवार्य किया जाना चाहिए. अपने आदेश में केडीए ने यह भी कहा कि कन्नड़ में कामकाज नहीं होने की वजह से ग्रामीण इलाकों के लोग बैंकिंग सुविधाओं का ठीक से उपयोग नहीं कर पाते हैं और उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

यूं शुरू हुआ विवाद

इससे पहले इस साल एक कस्टमर ने आईसीआईसीआई बैंक पर इस वजह से कोर्ट में मुकदमा दर्ज किया था क्योंकि बैंक ने कन्नड़ में लिखे उनके चेक को लेने से इनकार कर दिया था.

अभी तक यह साफ नहीं है केडीए को बैंक कर्मचारियों को इस आधार पर निकालने का अधिकार है या नहीं. लेकिन इस आदेश को हाल ही में हुए भाषीय विवाद की एक कड़ी के रूप में देखा जा सकता है. बेंगलुरु मेट्रो में हिंदी में लगे साइनबोर्डों को विरोधस्वरूप काले रंग से पोत दिया गया था.

बैंकों में कन्नड़ भाषा में कामकाज की मांग को लेकर सोशल मीडिया पर #नाम्माबेंकूकन्नड़ाबेकू (हमारे बैंकों को कन्नड़ की जरूरत है) नाम से कैंपेन भी चल रहा है.

लोगों इस हैशटैग के तहत उन एटीएम मशीनों की भी तस्वीर पोस्ट की थी जिनमें हिंदी और अंग्रेजी भाषा के जरिए इनका उपयोग करने की सुविधा थी लेकिन कन्नड़ में नहीं.

केडीए ने लगाया बैंकों में कन्नड़भाषियों के साथ भेदभाव का आरोप

इस सोशल मीडिया कैंपेन के प्रभाव में केडीए ने यह भी आदेश दिया है कि बैंकों द्वारा सभी सर्कुलर और गाइडलाइन्स आसान कन्नड़ भाषा में भी जारी किए जाएं. आईबीपीएस बैकों में सरकारी बैंकों में भर्ती के लिए परीक्षा लेती है. इस परीक्षा के बाद मेरिट के आधार पर लोगों का चयन होता है लेकिन यह भी नियम है जिस इलाके में चयनित लोगों की नियुक्ति की जा रही है उन्हें उस इलाके की क्षेत्रीय भाषा की जानकरी होनी चाहिए.

केडीए ने साफ-साफ यह आदेश दिया है कि जिनकी नियुक्ति हो चुकी है या होने वाली है उन्हें 6 महीने के भीतर कन्नड़ सीखना होगा और जो कन्नड़ नहीं सीख पाएं उन्हें नौकरी से निकाल देना चाहिए. इसके अलावा केडीए ने यह भी कहा कि ग्रुप सी और ग्रुप डी की नौकरियों में सरोजिनी महिषी रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय लोगों को ही भर्ती किया जाना चाहिए.

केडीए ने राज्य में कार्यरत बैंकों की सभी शाखाओं में एक कन्नड़ यूनिट खोलने का भी निर्देश दिया है जिस तरह पूरे देश में सभी बैंकों की शाखाओं में एक हिंदी यूनिट होती है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने कहा कि उनकी सरकार बैंकों द्वारा स्थानीय कन्नड़ भाषी लोगों के साथ किए जा रहे भेदभाव को सहन नहीं करेगी.

साभार: न्यूज़18 

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