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कुलभूषण जाधव पर फैसला: भारत-पाक के बीच ‘जासूसी गाथा’ की अहम तारीखें

3 मार्च 2016 को कुलभूषण जाधव को गिरफ्तार किया गया था

FP Staff | Published On: May 18, 2017 02:23 PM IST | Updated On: May 18, 2017 03:04 PM IST

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कुलभूषण जाधव पर फैसला: भारत-पाक के बीच ‘जासूसी गाथा’ की अहम तारीखें

भारत और पाकिस्तान की ओर से अंतरराष्ट्रीय अदालत में अपना अपना पक्ष रखने के बाद वह समय आ गया है जब आईसीजे कुलभूषण जाधव मामले में गुरुवार को 3.30 बजे अपना फैसला सुना रहा है.

यह फैसला भारत के उस प्रयास के सिर्फ 10 दिनों के बाद आ रहा है जिसमें भारत ने यह मांग की थी कि उसके पूर्व नेवी अधिकारी कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान मिलिटरी कोर्ट द्वारा दी गई फांसी की सजा पर तत्काल रोक लगाई जाए.

पूर्व नौसेना अधिकारी की गिरफ्तारी और उसके बाद की कहानी इस तरह है.

3 मार्च 2016

1991 के कमीशन्ड नौसेना अधिकारी जाधव को पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन आरोपों में गिरफ्तार किया था कि उनका संबंध बलूचिस्तान के फ्रीडम फाइटर्स से था. जाधव, जो 2013 में रिटायर हुए थे, उनके खिलाफ आरोप था कि वह रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के सक्रिय ऑपरेटिव थे. भारत ने ये आरोप सिरे से नकार दिया है.

सरकारी सूत्रों ने कहा कि जाधव एक छोटे बिजनेसमैन हैं. यह भी बताया गया कि जाधव अक्सर ईरानी पोर्ट्स से कार्गों लाते और ले जाते थे, जिसकी सीमा पाकिस्तान से लगती है. साथ ही उनका भारतीय बाहरी इंटेलिजेंस एजेंसी से कुछ लेना देना नहीं है. हालांकि, सूत्रों का यह भी कहना है कि इस बात के प्रमाण नहीं हैं कि रिटायर्ड नेवी अधिकारी को बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया गया, जैसा कि पाकिस्तान ने दावा किया था.

28 मार्च 2016

मामले में सरकार ने विदेश मंत्रालय से कहा कि वह पूर्व नौसेना अधिकारी को हरसंभव सहायता मुहैया कराए. पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा था, 'जहां तक मैं जानता हूं, वह एक भारतीय नागरिक हैं, और हमने मामले में दूतावास से संपर्क के लिए कहा है.' उन्होंने इस बात पर चिंता भी जताई कि वह एक पूर्व सैन्य अधिकारी हैं.

29 मार्च 2016

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की मीडिया विंग आईएसपीआर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके एक कथित कबूलनामे का वीडियो जारी किया. इस कथित वीडियो में उन्होंने स्वीकार किया है कि वह एक भारतीय जासूस हैं जिन्हें भारत ने कराची और बलूचिस्तान में विध्वंसक गतिविधियों में मदद के लिए भेजा है.

17 मई 2016

पाकिस्तान ने जाधव का इस्तेमाल भारत द्वारा कश्मीर में प्रायोजित आतंकवाद के रूप में किया. पाकिस्तानी संसद ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पास करके कहा कि उनकी सरकार उनके देश में "भारतीय हस्तक्षेप" के बारे में एक डोजियर तैयार करे और उसे दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को भेजे.

प्रस्ताव संसद के उच्च सदन में सत्ताधारी मुस्लिम लीग नवाज के सीनेटर लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) अब्दुल कय्यूम की ओर से रखा गया, जिसे पास कर दिया गया.

6 जून 2016

पाकिस्तानी अधिकारियों ने भारत के इस आग्रह को नकार दिया कि उसे जाधव से संपर्क करने दिया जाए. इंटीरियर मिनिस्टर चौधरी निसार ने कहा "जादव से संपर्क की अनुमति नहीं दी जाएगी"

उन्होंने आरोप लगाया कि जाधव ने पाकिस्तानी क्षेत्र में “विशेष कारणों” के लिए प्रवेश किया था.

6 दिसंबर 2016

विदेशी मामलों में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के सलाहकार सरताज अजीज ने स्वीकार किया कि सरकार जाधव मामले में "अपर्याप्त सबूत" ही मिले. सीनेट चैंबर को संबोधित करते हुए अजीज ने कहा कि डोजियर में सिर्फ बयान है. जिओ टीवी के मुताबिक उन्होंने कहा, 'इसमें किसी तरह के ठोस और निर्णायक प्रमाण नहीं हैं.'

3 मार्च 2017

पाकिस्तान सरकार ने कहा कि वह जाधव के प्रत्यर्पण पर विचार नहीं कर रही है. इस्तामाबाद ने यह भी कहा उनके बारे में भारत से और सूचनाएं मांगी गई हैं.

पाकिस्तान के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए नई दिल्ली में एक वरिष्ठ भारतीय सरकारी अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान को अपनी हिरासत में रखे गए विदेशी नागरिकों के साथ स्थापित अंतरराष्ट्रीय परंपराओं का पालन करना चाहिए. अधिकारी ने जाधव पर लगाए गए आरोपों को भी "बेबुनियाद” बताया.

10 अप्रैल 2017

जाधव को एक पाकिस्तानी मिलिट्री कोर्ट ने जासूसी के आरोपों में फांसी की सजा सुनाई थी. इस संबंध में आईएसपीआर ने एक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की थी.

11 अप्रैल 2017

जाधव को फांसी की सजा देने के पाकिस्तान के फैसले पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया में केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि अगर पाकिस्तान ने जाधव को सुनाई फांसी की सजा पर अमल किया तो भारत इसे "पूर्व नियोजित हत्या " मानेगा. उन्होंने ये भी कहा कि भारत इस पर चुप नहीं रहेगा और इसका माकूल जवाब देगा.

लोकसभा और राज्यसभा ने एक सुर में पाकिस्तान के इस कदम की आलोचना की.

12 अप्रैल 2017

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने कहा कि जाधव को तत्काल फांसी नहीं दी जाएगी. आसिफ ने कहा कि जाधव के पास अपील के लिए तीन फोरम हैं. आसिफ ने कहा कि जाधव को अधिकार है कि वह पाकिस्तानी आर्मी कोर्ट में अपनी सजा के खिलाफ 60 दिन में अपील करें. इसके बाद वह सेना प्रमुख और राष्ट्रपति के पास दया याचिका लगा सकते हैं.

12 अप्रैल 2017

पाकिस्तानी सेना ने कराची में एक अंडरवर्ल्ड डॉन उजैर जान बलोच को हिरासत में लिया, जिस पर यह आरोप लगाया कि वह पाकिस्तान के खिलाफ जासूसी में जाधव की मदद कर रहा था.

15 अप्रैल 2017

भारत ने पाकिस्तान के साथ सभी तरह के द्विपक्षीय संबंध रोके.

16 अप्रैल 2017

पाकिस्तान ने फांसी की सजा पाए भारतीय कैदी की उग्रवादी गतिविधियों को लेकर एक नया डोजियर तैयार किया और कहा कि वह इसे संयुक्त राष्ट्र और इस्लामाबाद में विदेशी दूतों के समक्ष रखेगा.

नए डोजियर में जाधव के कागजात, पूर्व में फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल के समक्ष दिए गए कराची और बलूचिस्तान में कथित जासूसी और विध्वंसक गतिविधियों में शामिल होने के बयान शामिल हैं.

17 अप्रैल 2017

पाकिस्तानी सेना ने जाधव को लेकर दूतावासीय संपर्क का आग्रह नकार दिया. पाकिस्तानी मिलिट्री प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने पत्रकारों से कहा, 'कानून के तहत, हम कुलभूषण को कौन्सुलर संपर्क की अनुमति नहीं देंगे, क्योंकि वह जासूसी में शामिल थे.'

8 मई 2017

भारत ने पाकिस्तानी मिलिटdरी कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में अपना मामला रखा.

10 मई 2017

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने जाधव की फांसी पर रोक लगा दी. हेग स्थित आईसीजे ने भारत के इस पक्ष के बाद फांसी पर स्टे लगा दिया कि जाधव को ईरान से किडनैप किया गया था, जहां वह नौसेना से रिटायरमेंट के बाद व्यवसाय कर रहे थे.

15 मई 2017

आईसीजे ने दोनों पक्षों की सार्वजनिक सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. भारत की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने बहस की. जबकि पाकिस्तान की तरफ से यूके में रहने वाले पाकिस्तानी कानूनविद खावर कुरैशी ने मामले में पाकिस्तान का बचाव किया.

17 मई 2017

आईसीजे गुरुवार को 3.30 बजे अपना फैसला सुना रहा है.

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