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मोर विवाद में जस्टिस गांगुली भी कूदे, कहा ब्रह्मचारी नहीं होता मोर

एक दिन पहले जस्टिस शर्मा ने कहा था कि मोरनी मोर के आंसू से गर्भधारण करती है

FP Staff | Published On: Jun 01, 2017 06:15 PM IST | Updated On: Jun 01, 2017 06:16 PM IST

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मोर विवाद में जस्टिस गांगुली भी कूदे, कहा ब्रह्मचारी नहीं होता मोर

राजस्थान हाई कोर्ट से बुधवार को रिटायर हुए जस्टिस महेश चंद्र शर्मा के मोर को ब्रह्मचारी बताने वाले बयान को सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज ए के गांगुली ने सिरे से खारिज कर दिया.

जस्टिस गांगुली ने कहा कि मोर ब्रह्मचारी नहीं होता बल्कि अन्य पक्षियों की तरह ही मोरनी को रिझाता है. उन्होंने कहा कि जस्टिस शर्मा का यह बयान पूरी तरह अवैज्ञानिक है.

'मैंने खुद सुनी हैं मोरनी को आकर्षित करने वाली आवाजें'

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने कहा, 'मैंने दिल्ली के तुगलग रोड में मोरों को एक-दूसरे को आकर्षित करने वाली आवाजें निकालते सुना है. उस वक्त मैं सुप्रीम कोर्ट का जज था.'

एक दिन पहले जस्टिस शर्मा ने कहा था कि मोर राष्ट्रीय पक्षी है क्योंकि वह ब्रह्मचारी है और मोरनी मोर के आंसू से गर्भधारण करती है. इस पर जस्टिस गांगुली ने कहा कि यह दावा सही नहीं है.

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने वाले बयान को भी खारिज किया

साथ ही उन्होंने जस्टिस शर्मा की उस सलाह को भी खारिज कर दिया जिसमें गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की बात की गई थी. उन्होंने कहा, 'ये उनकी अपनी कल्पना है. गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने से वह सुरक्षित नहीं हो जाएगी और ना ही गोहत्या पर लगाम लगेगी. उन्हें भावनाओं के आधार पर ना चलकर एक व्यापक दृष्टिकोण की जरूरत है.'

इससे पहले जस्टिस शर्मा ने अपनी सेवानिवृत्ति के दिन दिए 12 सलाहों में से एक यह सलाह भी दिया था कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए और अगर कोई गौ हत्या करता है तो उसे आजीवन कारावास की सजा मुकर्रर की जानी चाहिए चाहिए.

साभार न्यूज़18

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