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जुनैद हत्याकांड में कहां फंस रही हैं जांच एजेंसियां ?

जुनैद की मौत की जांच में वही भीड़ बाधा बनेगी, जिसने जुनैद को पिटते हुए देखा और आगे नहीं आई.

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Jun 30, 2017 02:50 PM IST

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जुनैद हत्याकांड में कहां फंस रही हैं जांच एजेंसियां ?

बल्लभगढ़ में ट्रेन में हुए एक मामूली विवाद के बाद एक मुस्लिम युवक को जान से मार दिया जाना अपने-आप में कई सवाल खड़ा कर रहा है. सीट को लेकर बढ़ा विवाद धार्मिक रंग में बदल गया जो बाद में जुनैद की मौत के साथ ही खत्म हुआ.

जुनैद हत्याकांड को लेकर सोशल साइट पर अफवाहों का बाजार गर्म है. हत्या को लेकर तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं. इन विवादों में सीट पर बैठने के विवाद को मुख्य वजह बताया जा रहा है.

जबकि, दूसरी बात जो निकलकर आ रही है उसमें जुनैद और उसके साथ सफर कर रहे लोगों के व्यवहार को लेकर हो रही है. माना ये जा रहा है कि जुनैद ने ट्रेन के कोच में कुछ ऐसी बात कह दी, जिससे ट्रेन में सफर करने वाले लोग भड़क गए.

अब सच्चाई क्या है यह पुलिस की जांच में ही सामने आएगी. पर, इस मामले में गिरफ्तार कुछ आरोपियों ने कई अहम खुलासे किए हैं. इस खुलासे में जुनैद को ज्यादा कसूरवार ठहराया जा रहा है.

आरोपी के बयान पैदा करेंगे मुश्किलें

हो सकता है कि आरोपी के द्वारा किए जा रहे नए खुलासे आरोपी बचने के लिए कर रहा हो फिर भी इस खुलासे के बाद पुलिस की जांच में कई परेशानी खड़ी हो सकती है.

जिस तरह से राजनीतिक बयानबाजी हो रही है उससे यह नहीं लगता है कि मामला इतना जल्दी सुलझ पाएगा. पिछले कुछ सालों के अनुभव को ध्यान में रखते हुए यह कहा जा सकता है कि जुनैद हत्याकांड की जांच भी लंबी खिंचने जा रही है.

जुनैद की हत्या का एक आरोपी गुरूवार को फरीदाबाद कोर्ट में सुनवाई के दौरान.

जुनैद की हत्या का एक आरोपी गुरूवार को फरीदाबाद कोर्ट में सुनवाई के दौरान.

ट्रेन वाली भीड़ अब भी वही भीड़ है

जांच एजेंसियों को यह साबित करना पड़ेगा कि दिल्ली-मथुरा ईएमयू ट्रेन में हुई वारदात सीट को लेकर हुई थी या फिर कोई और वजह है? जो कि इतना आसान नहीं है. ट्रेन में सफर करने वाले लोग अलग-अलग धर्मों से हैं.

पुलिस बयान में जो बात सामने आ सकती है उसमें सफर करने वाले लोग अपने-अपने समुदाय के साथ सहानुभूति रख सकते हैं.

घटना को लेकर दिल्ली सहित देश के कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. कुछ जगहों पर ईद नहीं मनाई गई न हीं ईदी बांटी गई.

दिल्ली के जंतर-मंतर पर बुधवार को नॉट इन माई नेम नाम से विरोध प्रदर्शन हुआ. तमाम बुद्धिजीवी और पत्रकार वहां मॉब लिंचिंग की घटनाओं का विरोध करने के लिए जुटे.

जंतर-मंतर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के एक हिंदी के प्रोफेसर पिछले लगभग 6 दिनों से उपवास पर बैठे हैं. उनके साथ कुछ छात्र और सामाजिक संगठनों के लोग उपवास कर रहे हैं.

लेकिन इस घटना का सबसे दुखद पहलू ये है कि हमारे देश के राजनीतिक दल अब इसको मुद्दा बनाकर अपनी रोटी सेंकने में लग गए हैं.

चश्मदीदों के बयान अलग-अलग

जुनैद हत्याकांड में गिरफ्तार एक शख्स रमेश पलवल के जोधपुर का निवासी है. वह फरीदाबाद में नौकरी करता है. रमेश के अनुसार वह फरीदाबाद रेलवे स्टेशन से दिल्ली-मथुरा शटल में पलवल के लिए सवार हुआ था. उसने देखा कि डिब्बे में अल्ससंख्यक समुदाय और दूसरे पक्ष के युवा आपस में झगड़ रहे थे.

मुस्लिम समुदाय के युवकों ने फोन करके बल्लभगढ़ रेलवे स्टेशन के पास खंदावली गांव से कई युवाओं को स्टेशन पर बुला लिया था. जब ट्रेन बल्लभगढ़ स्टेशन पर रुकी तो अल्पसंख्यक समुदाय के लड़के दूसरे पक्ष के युवाओं को ट्रेन की बोगी से बाहर खींचने की कोशिश कर रहे थे.

इस मामले के प्रत्यक्षदर्शी और मृतक जुनैद के भाई हाशिम ने खुलासा किया है कि विवाद की जड़ वो बुजुर्ग व्यक्ति था, जिसे बैठने के लिए जुनैद ने सीट दी थी. उसी ने जुनैद पर पहला वार किया था.

हाशिम का कहना है कि पुलिस ने जिस आरोपी को पकड़ा है, वो हमलावरों में शामिल जरूर था, लेकिन चाकू से वार करने वाला अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है.

#NotInMyName प्रदर्शन में कोलकाता में शामिल होते नमाजी.

#NotInMyName प्रदर्शन में कोलकाता में शामिल होते नमाजी.

जुनैद के भाई का बयान खड़े करता है कई सवाल

जुनैद के भाई हाशिम ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ईद की खरीदारी करने के लिए हम चार लोग (जुनैद, हाशिम, मोहसिन व मोइन) दिल्ली गए थे. सदर बाजार स्टेशन से हम लोग ईएमयू में सवार हुए. उस समय बोगी की सीटें खाली थीं तो हम लोग लूडो खेलने लगे.

इस बीच एक बुजुर्ग व्यक्ति आया और जुनैद से बोला ‘बेटा सीट दे दो’ इतना सुनकर जुनैद उठ गया और बुजुर्ग को अपनी सीट दे दी.

हाशिम ने बताया ओखला स्टेशन पर 20-25 लोग ईएमयू में सवार हुए और धक्का-मुक्की करने लगे. इन लोगों ने जुनैद को जोर से धक्का दिया, जिसका मैंने विरोध किया तो हमारे साथ बदसलूकी शुरू हो गई.

कोई हम पर जातिगत टिप्पणी कर रहा था तो कोई बीफ खाने वाला बता रहा था. इस बीच वो बुजुर्ग व्यक्ति उठा जिसे हमने सीट दी थी उसने जुनैद को थप्पड़ जड़ दिया. इसके बाद 10-15 अन्य लोगों ने हमारे साथ मारपीट शुरू कर दी.

अब यह प्रश्न उठ रहा है जब जुनैद ने उस बुजुर्ग व्यक्ति को अपनी सीट दे दी तो वो भला क्यों जुनैद को थप्पड़ मारेगा.

हाशिम ने बताया कि तुगलकाबाद स्टेशन पर ईएमयू पहुंचने पर उसने शाकिर को फोन किया. शाकिर जैसे ही बल्लभगढ़ स्टेशन पर पहुंचा तो उन्होंने हाथ दिखाकर उसे बुलाया. हमलावर उसे देख तैश में आ गए, क्योंकि शाकिर के साथ भीड़ दिखाई दे रही थी.

डर के कारण हमलावरों ने जुनैद और अन्य भाइयों को उतरने नहीं दिया. बल्कि, भीड़ को इतर कर शाकिर को भी बोगी में चढ़ा लिया.

अब सवाल यह है कि ट्रेन के अंदर अगर शाकिर को खींचा गया तो स्टेशन पर और लोगों ने जीआरपी या स्टेशन मास्टर को शिकायत क्यों नहीं दर्ज कराई? स्टेशन पर जीआरपी या रेलवे के और कर्मचारियों के सामने पूरा हंगामा नजर क्यों नहीं आया या फिर कहीं ऐसा तो नहीं कि इस घटना पर पर्दा डालने का काम किया जा रहा है?

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