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जावेद हबीब विवाद: दुर्गा पूजा पर हिंदुत्व की ठेकेदारी मत शुरू करिए!

अगर जावेद हबीब का विज्ञापन देवी का अपमान है तो दुर्गा पूजा मनाने वाले हिंदू इसे दशकों से करते आ रहे हैं.

Animesh Mukharjee Animesh Mukharjee Updated On: Sep 10, 2017 12:32 PM IST

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जावेद हबीब विवाद: दुर्गा पूजा पर हिंदुत्व की ठेकेदारी मत शुरू करिए!

शनिवार को जावेद हबीब के लखनऊ स्थित सैलून में तोड़-फोड़ हुई. इस घटना के पीछे हिंदुत्ववादी संगठनों का हाथ बताया जा रहा है. जावेद हबीब जाने माने हेयर स्टायलिस्ट हैं, जिनके देश भर में कई सैलून हैं. जावेद के सैलून की तरफ से कोलकाता के अखबारों वगैरह में एक विज्ञापन छपा था जिसके चलते ये घटना हुई.

इस कथित विवादास्पद विज्ञापन में इस महीने के आखिर में आने वाली दुर्गा पूजा की तैयारियों की बात की गई थी. इसमें मां दुर्गा अपने सभी बच्चों (गणेश, कार्तिक, लक्ष्मी और सरस्वती) के साथ ब्यूटी पार्लर में मेकअप करा रही हैं.

इस विज्ञापन को लेकर उत्तर प्रदेश में हिंसात्मक प्रतिक्रिया को हास्यास्पद है. दुर्गा पूजा और नवरात्रि दोनों एक ही समय में मनाए जाने वाले त्योहार जरूर हैं मगर उनको मनाए जाने का अंदाज बिलकुल अलग है. पश्चिम बंगाल के लिए दुर्गा पूजा धार्मिक व्रतोत्सव नहीं एक सांस्कृतिक मौका है.

दुर्गा पूजा के पंडालों में आपको तरह-तरह का नॉनवेज बिकता दिख जाएगा. साथ ही पूजा की अंजली देने के बाद प्रसाद खाकर ओल्ड मॉन्क पीते भौद्रोलोक भी एक सामान्य बात हैं. देश भर में होने वाली तमाम दुर्गा पूजा पंडालों में अक्सर ये प्रतियोगिता होती है कि देवी की प्रतिमा को कितने ‘क्रिएटिव’ तरीके से बनाया जा सकता है.

जावेद हबीब ने जो किया है वो हर साल होता आया है और होता रहेगा, ऐसे में उन्हें निशाना बनाना गलत है. क्योंकि जावेद उसी परंपरा में बात कह रहे थे जिसमें तमाम हिंदू पूजा पंडाल दशकों से कहते आ रहे हैं और कहते रहेंगे. आप खुद ही कुछ उदाहरण देखिए.

नाव पर परिवार के साथ आरही देवी दुर्गा की इस तस्वीर के बारे में क्या कहेंगे. फोटो- फेसबुक

नाव पर परिवार के साथ आरही देवी दुर्गा की इस तस्वीर के बारे में क्या कहेंगे. फोटो- फेसबुक

इस मूर्ति में 10 की जगह 1,000 हाथ हैं. फोटो- यूट्यूब स्क्रीन ग्रैब

इस मूर्ति में 10 की जगह 1,000 हाथ हैं. फोटो- यूट्यूब स्क्रीन ग्रैब

देवी की छवि को किसी बार्बी डॉल जैसा न बनाकर सामान्य महिला सा बनाया गया है. फोटो- फेसबुक

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ये शायद देश में देवी की पहली ट्रांसजैंडर मूर्ति है.

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इस तस्वीर में महिषासुर के साथ दुर्गा युद्ध की मुद्रा में नहीं हैं. फोटो- फेसबुक

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शांति का संदेश देती देवी प्रतिमा

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दुर्गा पूजा उत्सव है इसलिए दुर्गा के हाथ में शस्त्र नहीं हैं और वो नाच रही हैं.

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अगर यही रचनात्मकता एम एफ हुसैन जैसे किसी कलाकार ने दिखाई होती तो?

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धर्म में राजनीति का मेल कहीं न कहीं हो ही जाता है.

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