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जीएसएलवी एमके थ्री लॉन्च: इसरो के कीर्तिमानों पर एक नजर

इसरो लगातार अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक के बाद एक कीर्तिमान स्थापित करता जा रहा है

FP Staff Updated On: Jun 05, 2017 05:03 PM IST

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जीएसएलवी एमके थ्री लॉन्च: इसरो के कीर्तिमानों पर एक नजर

भारत सोमवार को अपने सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी एमके थ्री डी-1 का श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपण करेगा. यह रॉकेट कम्युनिकेशन सेटेलाइट जीसैट-19 को लेकर अंतरिक्ष जाएगा.

इस रॉकेट को शाम 5 बजकर 28 मिनट पर चेन्नई से तकरीबन 120 किलोमीटर दूर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से उड़ान भरना है.

अब तक भारी सेटेलाइट्स के लिए विदेशी रॉकेट्स पर रहते थे निर्भर

अब तक 2300 किलोग्राम से अधिक वजन के संचार उपग्रहों के लिए इसरो को विदेशी लॉन्चरों पर निर्भर करना पड़ता था. जीएसएलवी एमके थ्री-डी 1 चार हजार किलोग्राम तक के पेलोड उठाकर जीओसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) और 10 हजार किलोग्राम तक के पेलोड को पृथ्वी की निचली कक्षा में पहुंचाने में सक्षम है.

इसरो लगातार अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक के बाद एक कीर्तिमान स्थापित करता जा रहा है.

Isro

प्रतीकात्मक तस्वीर.

ये हैं इसरो द्वारा किये गए कुछ बड़े प्रक्षेपण

  • 5 मई 2017- जीएसएलवी-एफ09 राकेट द्वारा जीसैट-9 दक्षिण एशिया (सार्क) कम्युनिकेशन सेटेलाइट लॉन्च किया गया.
  •  15 फरवरी 2017- पीएसएलवी-सी37 द्वारा 104 सेटेलाइट्स लांच किए गए जिनमे 101 अन्य देशों के सेटेलाइट्स थे. ऐसा कर भारत ने रूस के 37 सेटेलाइट्स के रिकॉर्ड को तोड़ दिया.
  • 7 दिसम्बर 2016- पीएसएलवी-सी36 द्वारा रिमोट सेंसिंग सेटेलाइट रिसोरसैट-2ए लॉन्च किया गया.
  • 6 अक्टूबर 2016- 3408 किलो वजनी जीसैट-18 कम्युनिकेशन सेटेलाइट जिसमें 48 कम्युनिकेशन ट्रांसपोंडर थे, लांच किया गया.
  • 26 सितम्बर 2016- पीएसएलवी-सी35 द्वारा मौसम का अध्ययन करने के लिए 8 सेटेलाइट्स लॉन्च किये गए.
  • 8 सितम्बर 2016- 2211 किलो के अत्याधुनिक इन्सैट-3डीआर का प्रक्षेपण जीएसएलवी-एफ05 द्वारा मौसम के अध्ययन के लिए किया गया.
  • 28 अगस्त 2016- देश के पहले स्क्रैमजेट इंजन का परीक्षण किया गया जो दोबारा इस्तेमाल किये जाने वाले यान को अंतरिक्ष में ले जाने में सक्षम होगा.
  • 23 मई 2016- इस दोबारा इस्तेमाल किये जा सकने वाले प्रक्षेपण राकेट आरएलवी- टीडी के जरिये प्रक्षेपण की लागत को कम किया सकेगा.
  • 28 अप्रैल 2016- पीएसएलवी-सी36 द्वारा आईआरएनएसएस- 1जी का सफल प्रक्षेपण किया गया जो भारत की अपनी जियो-लोकेशन तकनीक विकसित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है.

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