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रेलवे होटल स्कैम: 20 साल बाद क्या फिर दोहराई जाएगी वही कहानी?

दो दशक पहले शायद देश के राजनीतिक इतिहास में यह पहली घटना थी जब किसी मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर सीबीआई का छापा पड़ा था

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Sep 08, 2017 08:54 AM IST

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रेलवे होटल स्कैम: 20 साल बाद क्या फिर दोहराई जाएगी वही कहानी?

यह महज एक संयोग ही है कि जिस सीबीआई अधिकारी ने 20 साल पहले चारा घोटाला मामले में लालू यादव की जेल यात्रा सुनिश्चित कराने में अहम भूमिका अदा की थी, वही अधिकारी एक बार फिर से आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव के लिए मुसीबत बनकर आया है.

सीबीआई ने रेलवे के होटल टेंडर घोटाला मामले में बाप-बेटे को पूछताछ के लिए बुलाया है. सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव को 11 सितंबर को 11 बजे और तेजस्वी यादव को 12 सितंबर को 11 बजे पूछताछ के लिए नोटिस जारी की है. दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय में दोनों से पूछताछ होगी.

सीबीआई के एडिशनल डायरेक्टर राकेश अस्थाना लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे से पूछताछ करेंगे. राकेश अस्थाना ही इस केस की मॉनिटरिंग कर रहे हैं. गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी और सीबीआई के एडिशनल डायरेक्टर राकेश अस्थाना लालू प्रसाद यादव के लिए कोई नया नाम नहीं हैं.

लालू प्रसाद यादव और राकेश अस्थाना का सामना पहले भी कई मौकों पर हो चुका है. लेकिन, इस बार लालू प्रसाद यादव के साथ उनके पुत्र तेजस्वी यादव का भी सामना होगा. दोनों बाप-बेटे को आमने-सामने बैठाकर सीबीआई पूछताछ करेगी.

राकेश अस्थाना को लेकर भले ही आपके दिमाग में घंटी न बजती हो लेकिन लालू प्रसाद यादव के समर्थकों के बीच अस्थाना काफी मशहूर हैं.

राकेश अस्थाना इससे पहले भी देश में चर्चित चारा घोटाले की प्रारंभिक जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं. राकेश अस्थाना के सीबीआई में रहते ही लालू प्रसाद यादव पर चारा घोटाले में शिकंजा कसा गया था.

राकेश अस्थाना के हाथ एक बार फिर लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की बेनामी संपत्ति और साल 2006 में लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते रेलवे के दो होटलों की नीलामी में गड़बड़ी की जांच की जिम्मेदारी है.

सीबीआई के मुताबकि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि होटल आवंटन में गड़बड़ियां की गई. होटल लीज पर लेने के बदले जमीन ली गई. 65 लाख में 32 करोड़ की जमीन ली गई. धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के केस में आईपीसी की धारा 420 और 120बी के तहत मामला दर्ज किया गया.

rakesh asthana

लालू यादव के लिए 20 साल पहले का समय लौट आया है

20 साल बाद एक बार फिर से लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे के लिए परेशानियों का दौर लौट आया है. सीबीआई ने लालू यादव के 22 ठिकानों पर तीन महीने पहले ही छापा मारा था.

20 साल पहले जब चारा घोटाला मामले में लालू यादव के ठिकानों पर सीबीआई की रेड हुई थी, तब वह बिहार की सत्ता पर काबिज थे. आज उनकी पार्टी आरजेडी बिहार में मुख्य विपक्षी पार्टी है.

सीबीआई पहले भी चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव से कई बार पूछताछ कर चुकी है. इस बार के सीबीआई के पूछताछ में काफी अंतर है. दो दशक पहले तक लालू प्रसाद यादव देश के बड़े ताकतवर राजनीतिक हस्तियों में से एक होते थे. एक फर्क यह भी है कि उस समय लालू यादव राज्य के मुख्यमंत्री थे और अब उनके दोनों बेटे बिहार की राजनीति में हैं.

Patna: RJD Chief Lalu Prasad Yadav with his son and Bihar Deputy Chief Minister Tejaswi Yadav during a press conference in Patna on Wednesday. PTI Photo (PTI7_26_2017_000133B)

पहली बार किसी मुख्यमंत्री के घर छापा पड़ा था

दो दशक पहले शायद देश के राजनीतिक इतिहास में यह पहली घटना थी जब किसी मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर सीबीआई का छापा पड़ा था. केंद्र में उस समय जनता दल के नेतृत्व वाली सरकार थी और इंद्र कुमार गुजराल देश के प्रधानमंत्री थे.

सीबीआई के तत्कालीन निदेशक जोगिंदर सिंह ने हर तरह के दबावों को दरकिनार कर लालू को गिरफ्तार किया था. लालू ने गिरफ्तारी से ठीक पहले अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाकर सबको हैरान कर दिया था.

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि लालू की कारगुजारियों की सजा अब उनके बेटे और बेटियों को मिलने वाली है. इसका अंदेशा इस बात से और प्रबल होता है कि इस बार भी लालू यादव को वही दो व्यक्ति घेर रहा है जो पहले भी उन्हें घेरा करता था.

बिहार के उपमुख्यमंत्री और बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी 20-25 साल पहले भी लालू यादव के खिलाफ मोर्चा खोल कर संघर्ष करते थे. यही काम वो फिर कर रहे हैं. पिछले तीन महीनों से लालू प्रसाद यादव के परिवार पर भारत की तमाम जांच एजेंसियों ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया था. वहीं, बेनामी संपत्ति में लालू प्रसाद यादव के परिवार के कई सदस्य आयकर विभाग और ईडी के रडार पर हैं.

कुछ दिन पहले ही ईडी ने कार्रवाई करते हुए मीसा भारती और उनके पति शैलेष के दिल्ली स्थित बिजवासन फार्म हाउस को सील कर दिया है. वहीं कुछ दिनों पहले ही बेनामी संपत्ति मामले में ही आयकर विभाग ने पटना स्थित कार्यालय में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव से लंबी पूछताछ की थी.

हम आपको बता दें कि सीबीआई ने लालू प्रसाद और उनसे संबंधित आधा दर्जन लोगों के पटना से लेकर दिल्ली स्थित कुल 12 ठिकानों पर विगत 7 जुलाई को बड़े पैमाने पर छापेमारी की थी.

इस छापेमारी के दौरान रेलवे होटल लीज से संबंधित कुछ कागजात मिले थे. इन कागजातों से यह पता चला है कि प्रसिद्ध होटल व्यवसायी विनय कोचर और विजय कोचर को रांची और पूरी में रेलवे के दो बड़े होटल लीज पर दिए जाने के बदले में कोचर बंधुओं से बड़े पैमाने पर लाभ लिया गया. इस संपत्ति में पटना के बेली रोड पर तेजस्वी यादव के निर्माणाधीन मॉल की जमीन भी शामिल है.

आयकर विभाग और सीबीआई की छापेमारी में बरामद दस्तावेज बताते हैं कि पूर्व में कोचर बंधुओं को रांची और पूरी के होटल 30 साल की लीज पर दी गई थी.

लेकिन, बाद में इसकी अवधि बढ़ाकर 60 साल कर दी गई. लालू प्रसाद पर आरोप है कि होटलों की लीज की अवधि बढ़ाने में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है. इस मामले की जांच में सीबीआई ने कई तरह की अनियमितताओं से संबंधित दस्तावेज जब्त किए थे. सीबीआई इन दस्तावेजों का सत्यापन खुद लालू प्रसाद और तेजस्वी प्रसाद से पूछताछ कर करेगी.

Lalu Prasad Yadav appears before CBI Court

चारा घोटाले की जांच के साथ अब नया मामला सामने आया

चारा घोटाले की जांच अभी चल रही है और ऊपर से यह नया मामला सामने आ गया है. ऊपर से मोदी की सरकार और इन सबसे ऊपर राकेश अस्थाना के हाथों में केस की जिम्मेदारी.

1984 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस अफसर अस्थाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वासपात्र माने जाते हैं. मोदी से नजदीकियों की वजह से सीबीआई में उनकी खासी धाक है.

राकेश अस्थाना के जिम्मे कई राजनेताओं की जांच की जिम्मेदारी है. मसलन मुलायम सिंह यादव, मायावती, ममता बनर्जी और अब लालू प्रसाद यादव और उनके पत्नी और बेटे.

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