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रेलवे के लिए कितना असरदार साबित होगा नए रेल मंत्री का प्रयास?

रेल मंत्री ने आखिरकार काफी सालों से लंबित सेफ्टी कैटेगरी के एक लाख पदों पर लगी रोक को हटा ही दिया

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Sep 18, 2017 04:55 PM IST

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रेलवे के लिए कितना असरदार साबित होगा नए रेल मंत्री का प्रयास?

भारत के नए रेल मंत्री पीयूष गोयल भारतीय रेल को पटरी पर लाने के लिए अपना भगीरथ प्रयास तेज कर दिया है. गोयल ने रविवार को रेलवे बोर्ड और देश के सभी जोनल महाप्रबंधकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर सेफ्टी कैटेगरी के एक लाख खाली पदों को भरने सहित कई निर्णय लिए.

पिछले कुछ सालों से लगातार हो रहे रेल दुर्घटनाओं के बाद रेल मंत्रालय एक्शन में आ गई है. रेल मंत्री ने आखिरकार काफी सालों से लंबित सेफ्टी कैटेगरी के एक लाख पदों पर लगी रोक को हटा ही दिया.

भारतीय रेल इस समय 64 हजार किलोमीटर के ऑपरेशनल नेटवर्क पर दौड़ रही है. इसकी निगरानी और मेनटेनेंस के लिए लोग काफी कम पड़ रहे हैं. भारतीय रेल दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है और फिलहाल उसके पास 13 लाख कर्मचारी हैं.

रेलवे को इसके बावजूद अभी भी 2 लाख कर्मचारियों की जरूरत है. पिछले काफी सालों से रेलवे में दो लाख कर्मचारियों के पद खाली थे.

Piyush Goyal

रेलवे के सामने सबसे बड़ी चुनौती मैनपावर ढूंढ़ने की है

रेलवे से जुड़े एक अधिकारी कहते हैं, ‘अगर मैनपावर बढ़ाकर रेलवे का टर्नअराउंड टाइम कम कर दिया जाए तो रेलवे की ऑपरेटिंग क्षमता और रेलवे की कमाई की क्षमता में कई गुणा तेजी आ जएगी. रेलवे के सामने सबसे बड़ी चुनौती मैनपावर ढूंढ़ने की है. साथ ही ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाना एक ऐसा मुद्दा है जिस पर पीएम मोदी भी जोर दे चुके हैं.’

पीयूष गोयल कुर्सी संभालते ही रेलवे ब्यूरोक्रेसी को ये इशारा कर चुके हैं कि ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने में वे किसी किस्म की कोताही बर्दाश्त नहीं करेंगे.

रेल मंत्रालय अगले कुछ महीनों में 700 ट्रेनों को अपग्रेड करने जा रही है. कई पैसेंजर्स ट्रेन को मेल या एक्सप्रेस में बदला जाएगा और कई एक्सप्रेस ट्रेनों को सुपरफास्ट ट्रेनों में बदला जाएगा.

रेल मंत्री के साथ हुए बैठक के बाद रेलवे महानिदेशक (कार्मिक) ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘इस बैठक में सेफ्टी कैटेगरी में जूनियर इंजीनियरों और सीनियर्स सेक्शन इंजीनियरों की सभी सीटों को भरे जाने का निर्णय लिया गया. अगले तीन महीनों में सहायक स्टेशन मास्टरों और गार्डों में भी बड़े पैमाने पर भर्तियां निकाली जाएगी.’

इस बैठक में सेफ्टी श्रेणी के कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए फिलहाल रिटायर्ड कर्मचारियों की भी सेवा लेने को कहा गया है. साथ ही वित्त और कार्मिक विभाग से विशेष टीम का गठन कर पेंशनभोगी कर्मचारियों की समस्या को भी दूर करने को कहा गया है.

पिछले कुछ दिनों में रेलमंत्री ने कई ऐसे फैसले लिए हैं जो लंबित थे

हम आपको बता दें कि देश के नए रेल मंत्री पीयूष गोयल के पास सिर्फ 17-18 महीने का ही वक्त बचा है. ऐसे में गोयल लगातार फैसले पर फैसले ले रहे हैं. पिछले कुछ दिनों में रेल मंत्री ने कई ऐसे फैसले लिए हैं जो काफी सालों से लंबित पड़े थे.

रेल मंत्रालय ने ट्रेन में आरक्षित श्रेणी में यात्रियों के सोने की टाइमिंग में भी बदलवा किया है. लोअर और मिडिल बर्थ पर सफर करने वाले यात्रियों को अब रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ही सोने की अनुमति मिल सकेगी. यात्रियों के सोने के समय में एक घंटे की कटौती की गई है.

रेल मंत्रालय ने यात्रियों की सुविधा का ख्याल करते हुए सभी जोन को आदेश जारी कर दिया है. मीडिल बर्थ में आराम करने वाले यात्रियों के कारण लोअर और अपर बर्थ के यात्रियों को दिक्कत होती है. उन्हें नीचे बैठने का मौका नहीं मिल पाता है. यही वजह है कि अब सुबह की मीडिल बर्थ वाले को सीट छोड़ कर नीचे बैठना होगा.

हालांकि, इस फैसले से यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है. देर रात यात्रा करने वाले यात्री का अगर मीडिल बर्थ है तो उसे सुबह 6 बजे उठाना विवाद का कारण बन सकता है. दूसरी तरफ मीडिल बर्थ को खोलने के लिए सुबह लोअर बर्थ पर आराम कर रहे यात्रियों को उठाना भी विवाद का कारण बन सकता है.

पिछले कुछ सालों से रेलवे में प्रयोग तो कई किए गए, पर किसी भी प्रयोग का परिणाम उत्साहवर्धक नहीं रहा. पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रेलवे को सुधारने के लिए यात्री किरायों में बढ़ोत्तरी के साथ सेफ्टी के क्षेत्र में भी कई निर्णय लिए. इसके बावजूद रेल दुर्घटनाओं में कोई कमी नहीं आई.

अगस्त महीने में उत्तर प्रदेश में हुए लगातार दो रेल हादसों के बाद भारतीय रेल महकमे में काफी फेरबदल किए गए थे.

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ए के मित्तल को हटा कर अश्विनी लोहानी को रेलवे बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया था. इसके कुछ दिन बाद ही कैबिनेट विस्तार में पीयूष गोयल को ऊर्जा मंत्रालय से बदल कर रेल मंत्रालय का कामकाज दिया गया.

Kalinga-Utkal Express Train Accident

रेलवे की यह दुर्दशा आज की देन नहीं है

रेलवे के अनुसार लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद सुविधा और सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की बात कही जा रही है.

जानकारों का कहना है कि रेल प्रबंधन अब गंभीर हो गया है. लापरवाह और निकम्मे अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है जो कि एक अच्छा कदम है.

भारतीय रलवे के एक अधिकारी का कहना है कि भारतीय रेल नेटवर्क की आकलन करने के लिए जापानी विशेषज्ञों का एक दल पिछले सप्ताह भारत के दौरे पर था. यह यात्रा एक के बाद एक रेल हादसों की पृष्ठभूमि में हुई थी. जापानी विशेषज्ञ भारतीय रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों से मिले थे और स्थलों का दौरा किया था.

माना यह जा रहा है कि जापानी विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद ही रेल मंत्रालय ने अहम बदलाव की शुरुआत की है. रेलवे की यह दुर्दशा आज की देन नहीं है. इस हालत के लिए कहीं न कहीं रेलवे की घिसी-पिटी पुरानी तकनीक और सिस्टम को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है.

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