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रेलवे भी LPG की तरह करेगा सब्सिडी छोड़ने की अपील, कुछ इस तरह पड़ेगा असर

वर्तमान में भारतीय रेल अपने मुसाफिरों को सफर पर 43 फीसदी की सब्सिडी देता है

FP Staff | Published On: Jul 06, 2017 01:16 PM IST | Updated On: Jul 06, 2017 01:16 PM IST

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रेलवे भी LPG की तरह करेगा सब्सिडी छोड़ने की अपील, कुछ इस तरह पड़ेगा असर

भारतीय रेल अगले महीने से अपने मुसाफिरों से गैस सब्सिडी की तर्ज पर रेल किराए में मिलने वाली सब्सिडी छोड़ने की अपील करेगा. रेलवे फिलहाल यात्री किराए पर 43 फीसदी की सब्सिडी देता है. सब्सिडी छोड़ने के लिए रेलवे की तरफ से टिकट बुक कराते समय तीन ऑप्शन दिए जाएंगे. इसमें 100 फीसदी सब्सिडी छोड़ने या 50 फीसदी सब्सिडी छोड़ने की अपील होगी. इसमें तीसरा ऑप्शन होगा कि मुसाफिर कोई सब्सिडी छोड़ना नहीं चाहता है.

इसे सीधे तौर पर इस तरह से समझ सकते हैं

दिल्ली से हावड़ा के बीच सुपरफास्ट ट्रेन के स्लीपर क्लास का टिकट 630 रुपए का होता है. लेकिन इसपर पूरी सब्सिडी छोड़ते हैं तो आपको इसके लिए 1110 रुपए, एसी 3 क्लास के लिए पूरी सब्सिडी छोड़ने पर 1670 की जगह 2930 रुपए, एसी 2 क्लास के लिए पूरी सब्सिडी छोड़ने पर 2425 रुपए की जगह 4255 रुपए और एसी 1 के लिए 4165 की जगह 7310 रुपए चुकाने होंगे.

रेलवे देता है सब्सिडी

भारतीय रेल इसकी तैयारी लंबे समय के कर रहा था. लेकिन उसे डर था कि कहीं लोगों के बीच इससे नाराज़गी न पैदा हो जाए. फिर भी अचानक यह फैसला लेने के पीछे 950 रुपए का एक चेक है. भारतीय रेल को एक मुसाफिर ने 950 रुपए का यह चेक भेजा है. जब आप रेलवे रिज़र्वेशन कराते हैं तो आपके टिकट पर लिखा होता है, 'क्या आप जानते हैं कि आपके किराये का 43 फीसदी देश के आम नागरिक वहन करते हैं' यानी कि रेल मुसाफिरों के सफर पर रेलवे 43 फीसदी की सब्सिडी देती है. यह सब्सिडी आम जनता के टैक्स के पैसे से दी जाती है. 950 रुपए के इस ऐतिहासिक चेक के पीछे भी यही कहानी है.

रेल मंत्री को चिट्ठी लिख भेजा कैश 

फरीदाबाद के अवतार सिंह खेर ने 18 मई को दिल्ली से जम्मू राजधानी का टिकट लिया. जब उन्होंने टिकट पर भी 43 फीसदी सब्सिडी की बात लिखी देखी तो उन्हें ख्याल आया कि रेलवे को ये पैसे वापस कर देने चाहिए. अवतार सिंह को लगा कि यह लाभ केवल उन लोगों को लेना चाहिए जो आर्थिक रूप से बहुत सक्षम नहीं हैं. फिर अवतार सिंह ने हिसाब लगाया कि उन्हें टिकट पर कितने रुपये की छूट मिली है. यह रकम निकली 950 रुपये की. उसके बाद उन्होंने रेल मंत्री के नाम एक चिट्ठी लिखी और 950 रुपये के चेक के साथ रेल मंत्री को भेज दी.

एसी 3 पर पड़ेगा असर

यह चेक आईआरसीटीसी के नाम पर है. अब रेलवे के सामने ये समस्या है कि न तो ‘आईआरसीटीसी’ के नाम से कोई बैंक खाता है और न ही कानूनन भारतीय रेल इस पैसे को वापस ले सकता है. इसलिए भारतीय रेल गैस सब्सिडी के तर्ज पर किराये पर मिलने वाली सब्सिडी छोड़ने की अपील करने की योजना बनाई है. लेकिन सब्सिडी छोड़ने की इस योजना का सबसे ज्यादा नुकसाल एसी-3 के मुसाफिरों को होगा. क्योंकि यात्री किराये पर भले ही रेलवे को 43 फीसदी का नुकसान हो रहा है लेकिन रेलवे को मुनाफा केवल एसी-3 के मुसाफिर ही देते हैं.

अलग-अलग क्लास को रेलवे किराये पर मिलने वाली सब्सिडी पर गौर करें तो...

> सब-अर्बन ट्रेन पर 64 फीसदी का नुकसान उठाना पड़ता है.

> जबकि नॉन सब अर्बन ट्रेन के सवारी डिब्बों पर 40 फीसदी का नुकसान.

> एसी-1 पर करीब 24 फीसदी का नुकसान.

> एसी-2 पर करीब 27 फीसदी नुकसान.

> स्लीपर क्लास से करीब 34 फीसदी का नुकसान.

> चेयर कार से करीब 16 फीसदी का नुकसान होता है.

> रेलवे को केवल एसी 3 क्लास के सवारियों को ढोने में फायदा होता है जो कि करीब 7 फीसद का फायदा है.

(साभार: न्यूज़ 18 हिंदी)

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