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मुकुल रोहतगी ने दोबारा नियुक्ति से किया इंकार, प्राइवेट प्रैक्टिस में लौटने की तैयारी

मुकुल रोहतगी का कार्यकाल साल 2019 में समाप्त होगा

FP Staff | Published On: Jun 11, 2017 10:10 PM IST | Updated On: Jun 11, 2017 10:10 PM IST

मुकुल रोहतगी ने दोबारा नियुक्ति से किया इंकार, प्राइवेट प्रैक्टिस में लौटने की तैयारी

अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सरकार से शीर्ष विधि अधिकारी के पद पर उनकी दोबारा नियुक्ति के बारे में विचार न करने को कहा है. उन्होंने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी.

उन्होंने ट्वीट कर कहा कि मैं पद के लिए पुन: नियुक्ति नहीं करना चाहता हूं. रोहतगी ने सरकार को इस बारे में एक पत्र लिखकर अवगत करा दिया है. उन्होंने अब निजी प्रैक्टिस की इच्छा जताई है.

रोहतगी ने कहा कि उन्हें ऐसा लगता है कि यह अवधि पर्याप्त है और अब वह अपनी प्रैक्टिस पर लौटना चाहते हैं.

मोदी सरकार के सत्ता में आने के तत्काल बाद रोहतगी को एजी नियुक्त किया गया था. इस दौरान उन्होंने उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित एनजेएसी अधिनियम को चुनौती जैसे कई विवादित मुद्दे संभाले.

हाल में, उन्होंने 'तीन तलाक' के मामले में शीर्ष अदालत को सहायता प्रदान की थी, इस मामले में अभी फैसला नहीं आया है. इस महीने की शुरुआत में मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने आगामी आदेश तक उनका कार्यकाल बढ़ा दिया था.

19 जून 2014 को रोहतगी की नियुक्ति की गई थी

दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अवध बिहारी रोहतगी के पुत्र मुकुल रोहतगी ने 2002 गुजरात दंगों के मामले में उच्चतम न्यायालय में गुजरात सरकार का प्रतिनिधित्व किया था. उन्होंने फर्जी मुठभेड़ मामलों मसलन बेस्ट बेकरी तथा जाहिरा शेख मामलों में भी सरकार का प्रतिनिधित्व किया था.

रोहतगी कॉपरेरेट मामलों के वकील हैं. टूजी घोटाले में वह बड़ी कॉपरेरेट कंपनियों की ओर से पेश हुए थे. मुकुल रोहतगी देश के 14वें अटॉर्नी जनरल हैं. उन्हें 19 जून 2014 को इस पद पर नियुक्त किया गया था. जो 3 सालों के लिए होती है. उनका कार्यकाल साल 2019 में समाप्त होगा.

उनके कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही सरकार ने उनका कार्यकाल बढ़ा दिया था, जिस पर मुकुल रोहतगी ने सरकार से दुबारा इस पद पर बने रहने में असमर्थता जाहिर की है.

(साभार: न्यूज़18)

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