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सेना को हॉवित्‍जर्स तोप: बोफोर्स के 30 साल बाद उन्नत तोपें मिलीं

बोफोर्स पर विवाद के तीस साल बाद भारतीय सेना में दो तोपें आएंगी

FP Staff | Published On: May 18, 2017 12:51 PM IST | Updated On: May 18, 2017 12:51 PM IST

सेना को हॉवित्‍जर्स तोप: बोफोर्स के 30 साल बाद उन्नत तोपें मिलीं

बोफोर्स पर विवाद के तीस साल बाद भारतीय सेना में दो तोपें आएंगी. 145 एम 777 अल्ट्रा लाइट ये आर्टिलरी गन (हॉवित्‍जर्स तोप) अमेरिका से मंगाई गई हैं. उम्मीद जताई जा रही है कि इस हफ्ते ये सेना में शामिल हो जाएगी. बीएई सिस्टम के प्रवक्ता ने अपने एक बयान में कहा, आर्टिलिरी समझौते के तहत यह तोपें एक महीने पहले ही इस हफ्ते भारत पहुंच जाएंगी.

साल 2010 से चल रही थी बातचीत

145 एम-777 हॉवित्‍जर्स तोपों को लेकर अमेरिका से साल 2010 से बातचीत हो रही थी थी. इसके बाद 26 जून 2016 को नरेंद्र मोदी सरकार ने 145 तोपों को खरीदने की घोषणा की थी. 2900 करोड़ रुपये के इस सौदे पर नवंबर 2016 में मुहर लगी थी.

नवंबर में केंद्रीय कैबिनेट से मिली थी मंजूरी

इसके बाद 17 नवंबर केंद्रीय कैबिनेट से इसे मंजूरी मिली थी. चीन के साथ बढ़ते तनाव को देखते हुए यह सौदा काफी अहम माना जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, इन तोपों को चीन से सटी पूर्वी सीमा की पहाड़ियों पर तैनात किया जाएगा. इसके साथ ही एअर पोर्टेबल 155एमएम/39 कैलिबर गन को लेकर भी बीएई के साथ समझौता हुआ है. इसका अधिकतम रेंज 30 किमी है.

साल 1980 में खरीदी गई थी बोफोर्स तोपें

बताते चलें कि साल 1980 में स्वीडिश कंपनी से बोफोर्स तोपें खरीदी गई थी. इस सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगा था. इन तोपों की खरीद में दलाली का खुलासा अप्रैल 1987 में स्वीडन रेडियो ने किया था. रेडियो के मुताबिक बोफोर्स कंपनी ने 1437 करोड़ रुपये का सौदा हासिल करने के लिए भारत के बड़े राजनेताओं और सेना के अधिकारियों को रिश्वत दी थी.

राजीव गांधी सरकार ने मार्च 1986 में स्वीडन की एबी बोफोर्स से 400 हॉवित्जर तोपें खरीदने का करार किया था. इस खुलासे ने भारतीय राजनीति में खलबली मचा दी और राजीव गांधी पर सवाल उठा. 1989 के लोकसभा चुनाव का ये मुख्य मुद्दा था जिसने राजीव गांधी को सत्ता से बाहर कर दिया.

(न्यूज 18 से साभार)

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