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ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए देना होगा ट्रेनिंग स्कूल का सर्टिफिकेट

नए नियम के तहत ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने और रिन्यू करवाने के लिए आपको ड्राइविंग स्कूल का सर्टिफिकेट देना होगा.

Bhasha Updated On: Oct 08, 2017 01:19 PM IST

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ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए देना होगा ट्रेनिंग स्कूल का सर्टिफिकेट

ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में गड़बड़ी को रोकने के लिए सरकार ने मोटर वाहन नियमों को सख्त बनाने की पहल की है. अब ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आपके पास किसी मोटर ट्रेनिंग सेंटर से वाहन चलाने का प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा. सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित नए नियमों के मसौदे में इसे शामिल किया गया है.

मंत्रालय ने हाल ही में केंद्रीय मोटर वाहन नियम 2017 के मसौदे पर सभी पक्षों से सुझाव मांगे हैं. प्रस्तावित नियमों में फर्जी तरीके से डीएल बनवाने की समस्या से निपटने के लिए दो मुख्य उपाय किए गए हैं.

इनमें डीएल बनवाने के लिए किसी मान्यताप्राप्त मोटर ड्राइविंग स्कूल के सर्टिफिकेट को आवेदन फॉर्म के साथ जमा करने के अलावा नए और मौजूदा डीएल को आधार कार्ड से जोड़ने की अनिवार्यता को शामिल किया गया है.

ट्रेनिंग सर्टिफिकेट के बिना नहीं बनेगा ड्राइविंग लाइसेंस

प्रस्तावित नियमवाली का मसौदा बनाने वालों में शामिल परिवहन विशेषज्ञ अनिल चिकारा ने बताया कि डीएल को 12 अंक वाले आधार नंबर से जोड़ने से फर्जी लाइसेंस बनाने और एक ही व्यक्ति के विभिन्न राज्यों के परिवहन प्राधिकरणों से बनवाए गए एक से अधिक डीएल का पता लगाना आसान हो सकेगा. इसके अलावा नए नियम लागू होने पर डीएल बनवाने के इच्छुक व्यक्ति को मोटर ड्राइविंग स्कूल से वाहन चलाना सीखने का पूरा ब्योरा देना होगा.

इसमें ड्राइविंग स्कूल में लिए गए दाखिले का रजिस्ट्रेशन नंबर, रजिस्ट्रेशन की तारीख, ट्रेनिंग की अवधि और प्रशिक्षण पूरा करने का सर्टिफिकेट भी देना होगा. प्रस्तावित नियमों के तहत पुराने डीएल रिन्यू करवाने से पहले भी आवेदक को किसी ड्राइविंग स्कूल में दो दिन का प्रशिक्षण लेना होगा.

Traffic moves along a busy road in New Delhi

चिकारा ने बताया कि यह पहला मौका है जब मंत्रालय ने देश में वाहन चालकों की गलती से होने वाले सड़क हादसों की वजह फर्जी डीएल धारकों को मानते हुए इन पर नकेल कसने के लिए सख्त नियमों का मसौदा बनाया है. इतना ही नहीं गलत ड्राइविंग पर लगाम लगाते हुए सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रस्तावित नियमों में डीएल की परिभाषा को भी बदल दिया गया है.

इसके तहत उसी व्यक्ति को डीएल धारक होने के योग्य माना जाएगा जिन्होंने मोटर वाहन लाइसेंस संबंधी फॉर्म 5 भर कर रजिस्टर्ड अथॉरिटी से ड्राइविंग ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट हासिल कर लिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जिनके पास ट्रेनिंग सर्टिफिकेट नहीं है, लेकिन उन्हें वाहन चलाना आता है, उन लोगों को भी फॉर्म 5 भर कर सक्षम अथॉरिटी से ट्रेनिंग सर्टिफिकेट लेना होगा.

भारत में सड़क हादसों से जुड़ी साल 2017 की रिपोर्ट के हवाले से उन्होंने बताया कि देश में सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह ड्राइवर की गलती का होना पाया गया है. इनमे से 84 फीसदी सड़क दुर्घटनाएं ड्राइवर की गलती से होती है, जबकि ड्राइवर की गलती से मौत का कारण बनने वाली दुर्घटनाओं का प्रतिशत 80.3 है .

इस साल के अंत तक होगा लागू

पिछले साल देश में 4,80,652 सड़क हादसे हुए इनमें 1,50,785 लोगों की मौत हुई, जबकि 4,94,624 लोग गंभीर रूप से घायल हुए.

मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित नियमों पर 20 अक्टूबर तक सभी पक्षकारों से सुझाव मांगे गए है. मंत्रालय ने प्राप्त सुझावों के अनुरूप मसौदे में बदलाव कर इस साल के अंत तक इन्हें लागू करने का लक्ष्य तय किया है.

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