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कतर से गल्फ देशों ने तोड़ा रिश्ता: भारत पर क्या होगा असर

गल्फ देशों का आरोप है कि कतर इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा जैसे संगठनों का समर्थन करता है

FP Staff | Published On: Jun 05, 2017 06:41 PM IST | Updated On: Jun 05, 2017 06:57 PM IST

कतर से गल्फ देशों ने तोड़ा रिश्ता: भारत पर क्या होगा असर

सउदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन जैसे गल्फ देशों ने कतर के साथ अपने संबंध समाप्त कर लिए हैं. इन देशों का आरोप है कि कतर इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा जैसे संगठनों का समर्थन करता है.

कतर और इसके करीबी देशों के संबंध टूटने का मिडिल ईस्ट पर खास असर पड़ेगा. यहां गल्फ देशों ने अपनी आर्थिक और राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल लीबिया, मिस्र, सीरिया, इराक और यमन में हुई घटनाओं में किया है.

कतर में सबसे ज्यादा भारतीय प्रवासी रहते हैं. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि गल्फ देशों द्वारा कतर से रिश्ता तोड़ने का नई दिल्ली-दोहा के संबंधों पर क्या असर पड़ेगा और इससे कतर में रहने वाले भारतीय कितने प्रभावित होंगे.

यातायात

भारतीयों के लिए कतर के सफर में कोई खास असर नहीं पड़ेगा क्योंकि भारत से दोहा की फ्लाइट्स पर्सियन गल्फ रूट से होकर जाती हैं. सउदी और अन्य देशों द्वारा एयर स्पेस पर लगाए प्रतिबंध का पर्सियन गल्फ रूट पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

कतर में रहने वाले भारतीय

कतर में रहने वाले भारतीयों को यूएई जाने के लिए मुश्किल का सामना करना पड़ेगा. यूएई में भी बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं. कतर में रहने वाले भारतीयों को कतर से पहले किसी अन्य देश जाना होगा, फिर वहां से यूएई की फ्लाइट पकड़नी होगी.

व्यापार और रक्षा संबंध

भारत और कतर के रक्षा और आर्थिक संबंध काफी मजबूत हैं. साल 2014-15 में भारत ने कतर में 1.05 बिलियन डॉलर का सामान एक्सपोर्ट किया था. कुल बाइलेटरल व्यापार 15.67 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था.

मार्च 2014 में भारतीय कॉन्ट्रैक्टर एलएंडटी को 2.1 बिलियन रियाल (कतर की करेंसी) का प्रोजेक्ट दिया गया था. कतर रेलवे ने दोहा मेट्रो के लिए रेल लाइन के डिजाइन और निर्माण के लिए एलएंडटी को 740 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट दिया है.

भारत के साउदी अरब से भी घनिष्ठ संबंध हैं, लेकिन हमें किसी एक का पक्ष लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि रिश्ता खत्म करने का फैसला गल्फ देशों के आपसी संबंधों को देखते हुए लिया गया है.

5.गैस-आपूर्ति

भारत के पेट्रोनेट एलएनजी ने कहा कि इसका कतर से होने वाली गैस आपूर्ति पर असर पड़ने की उम्मीद नहीं है. कतर में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा गैस रिजर्व है. भारत में कतर से समुद्र के रास्ते से गैस की आपूर्ति होती है.

पेट्रोनेट एलएनजी भारत का सबसे बड़ा गैस आयातक है. यह कतर से सालाना 8.5 मिलियन टन लिक्विफाइड नैचुरल गैस (एलएनजी) का आयात करता है.

साभार न्यूज़ 18 

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