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गुरुग्राम गैंगरेप: 9 महीने की बेटी का शव लिए मां जब मेट्रो से दिल्ली में जिंदगी ढूंढने निकली...

हैवानियत, गैंगरेप और हत्या के बाद प्रताड़ना का दूसरा दौर उस मां ने देखा जब वो बेटी का शव लिए घूम रही थी.

Kinshuk Praval Kinshuk Praval | Published On: Jun 07, 2017 06:48 PM IST | Updated On: Jun 07, 2017 06:48 PM IST

गुरुग्राम गैंगरेप: 9 महीने की बेटी का शव लिए मां जब मेट्रो से दिल्ली में जिंदगी ढूंढने निकली...

30 मई की सुबह दिल्ली मेट्रो के लिए और दिनों से अलग थी. अपनी मंजिल पर रोजाना जाने वाले हजारों मुसाफिरों ने एक मां की बेबसी और उसके साथ हुए दर्दनाक हादसे को देखा. आंखों में आंसू भरे अपनी बेटी की लाश को गोद से चिपकाए ये मां गुरुग्राम से दिल्ली के एम्स जा रही थी.

वो ये जानती थी कि उसकी बेटी नहीं रही इसके बावजूद उसकी ममता के भीतर एक उम्मीद सांस भर रही थी कि शायद उसकी बेटी को जिंदगी मिल जाए. दरअसल अपने कलेजे के टुकड़े को सीने से चिपटाए ये मां गैंगरेप की शिकार थी. आधी रात को हैवानियत से भरे हादसे में इस मां ने अपनी 9 महीने की बेटी को दरिंदों के हाथों गंवा दिया था.

29 मई की रात को ये महिला अपनी बेटी के साथ अपने मायके जाने के लिए ऑटो में सवार हुई थी. ऑटो में पहले से ही दो लोग सवार थे. कुछ दूर चलने पर ही बदमाशों ने महिला के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी थी. इस दौरान बेटी के रोने पर उन्होंने उसे चलते ऑटो से बाहर फेंक दिया. फिर महिला के साथ गैंगरेप किया. रात के दो बजे महिला को बदमाश छोड़कर फरार हो गए.

खबर के सुर्खियों में आने बाद जागी पुलिस

उसके बाद किसी तरह खुद को समेट कर ये मां सबसे पहले उस जगह पहुंची जहां बेटी को फेंका गया था. बेटी को गोद में लेकर पूरी रात सुबह का इंतजार करती रही. फिर सुबह एक फैक्ट्री के गार्ड की मदद से अपने ससुराल पहुंची और गुरूग्राम के एक निजी अस्पताल में बेटी को इलाज के लिए ले गई. जहां डॉक्टरों ने बेटी को मृत घोषित कर दिया.

पुलिस द्वारा तीन आरोपियों के बनाए स्कैच

पुलिस ने तीनों आरोपियों के स्कैच बनाए

इसके बावजूद मां को ये भरोसा नहीं था कि उसके कलेजे का टुकड़ा 9 महीने की बेटी अब नहीं रही है. उसके बाद जैसे तैसे ये पुलिस थाने पहुंची तो पुलिस ने केवल हत्या और यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया. इतने बड़े मामले के बावजूद पुलिस ने रेप का मामला दर्ज करना जरूरी नहीं समझा. संवेदनहीनता की इंतहा ये रही कि उसने रेप विक्टिम की बेटी को डॉक्टर को दिखाने की जरुरत भी नहीं समझी.

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जब ये मामला खबरों की सुर्खियां बना तब जा कर गुरुग्राम पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ गैंगरेप का मामला दर्ज किया. अबतक केवल एक ही शख्स की गिरफ्तारी हो सकी है.

लेकिन मां के लिए इंसाफ से पहले बेटी की जिंदगी थी. गैंगरेप से पूरी तरह टूटने के बावजूद वो अपनी बेटी को हर डॉक्टर को दिखाने की कोशिश करती रही. इसी कोशिश में वो एक उम्मीद के साथ मेट्रो से दिल्ली पहुंची और एम्स गई. जिन लोगों ने भी मां की गोद में बेटी के शव को लेकर सफर करते देखा वो उसे भूल नहीं सकेंगे. उसकी ममता ये मंजूर नहीं कर रही थी कि सबकुछ खत्म हो चुका है.

उसने पहले खुद को मरते महसूस किया और बाद में अपनी बेटी को मरते देखा. उसकी आत्मा रात के पहर में गैंगरेप के समय कुचली जा चुकी थी लेकिन बेटी का शव देखने के बावजूद ममता जिंदा थी.

‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के नारे की गूंज के बीच एक बेटी दम तोड़ चुकी थी और एक मां इंसाफ और इलाज की लड़ाई में दरबदर भटकने को मजबूर थी.

संवेदनहीनता की ये इंतहा है कि गुरुग्राम पुलिस रेप का केस नहीं दर्ज करना चाहती थी. ये जानना भी जरुरी नहीं समझा कि बेटी के जिस्म में जान बची है या नहीं. केवल हत्या का मामला दर्ज कर खानापूर्ति पूरी कर दी.

रेप विक्टिम के प्रताड़ना का दूसरा दौर थाने में शुरू हो जाता है

क्या इसकी वजह ये है कि ये मामला हाईप्रोफाइल नहीं था?  या फिर हरियाणा पुलिस के भीतर रेप जैसे मामले को लेकर भी संजीदगी खत्म हो गई?

पुलिस ने खबर को सुर्खियों में आने से पहले गैंग रेप का मामला ही नहीं दर्ज किया

पुलिस ने खबर को सुर्खियों में आने से पहले गैंग रेप का मामला ही नहीं दर्ज किया

दिन बदल गए,  महीने बीत गए, साल गुजर गए, सरकारें आईं और गईं, मौसम बदल गए और तो और गुड़गांव से नाम गुरुग्राम तक बदल गया लेकिन नहीं बदला तो खाकी का किसी रेप विक्टिम को लेकर मिजाज. देश की हाईटेक और एडवांस्ड सिटी गुरुग्राम में महिलाओं की सुरक्षा के भरपूर दावे सुनाई देते हैं. लेकिन जब एक आम लड़की अपना सबकुछ गंवाने के इंसाफ और इलाज के लिए भटकती है तो उसके लिए कहीं कोई आसरा नहीं मिलता है.

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बेटी के शव को लेकर आई रेप विक्टिम मां को इंसाफ तो दूर इलाज देने तक के बारे में हरियाणा पुलिस ने जरूरी नहीं समझा. ऐसे में सवाल लाजिमी है कि कहां गए वो हुक्मरान जो बेटी पढ़ाओ और बेटी बचाओ का नारा बुलंद करते हैं? कहां सो रहे हैं वो सियासतदान जो हरियाणा में सेक्स रेशियो के कम होने का दंभ भरते हैं?

क्यों खामोश बैठे हैं वो हुक्मरान जो बेटियों की हिफाजत का झूठा भरोसा दिलाते हैं?

दावा किया जाता है कि क्रिमिनल एमेंडमेंड एक्ट में बहुत से बदलाव किए गए हैं. रेप विक्टिम महिला ही एफआईआर लिखेगी तो उसके बयान की वीडियोग्राफी कराई जाएगी. यहां तक कि रेप ट्रायल के दौरान उसका आरोपियों से सामना तक नहीं कराया जाएगा.

लेकिन रेप विक्टिम के लिए प्रताड़ना का दूसरा दौर थाने में शुरु हो जाता है. यही मानेसर में इस मां के साथ भी हुआ. हैवानियत, गैंगरेप और हत्या के बाद प्रताड़ना का दूसरा दौर उस मां ने देखा जब वो बेटी का शव लिए घूम रही थी.

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