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जीएसकैश अच्छे से काम कर रहा था: जेएनयू के पूर्व वीसी सोपोरी

गत 18 सितंबर को जेएनयू प्रशासन ने जीएसकैश को खत्म कर उसकी जगह आंतरिक शिकायत समिति का गठन किया था

FP Staff Updated On: Oct 08, 2017 05:01 PM IST

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जीएसकैश अच्छे से काम कर रहा था: जेएनयू के पूर्व वीसी सोपोरी

जेएनयू के पूर्व वीसी एसके सोपोरी ने कहा है कि विश्वविद्यालय की खत्म कर दी गई यौन उत्पीड़न संस्था अच्छे से काम कर रही थी और लोगों को इसमें पूरा विश्वास था.

सोपोरी वर्ष 2011 से 2016 के बीच जेएनयू के प्रमुख थे. उन्होंने ‘कार्यस्थल पर महिलाओं का उत्पीड़न अधिनियम, 2013’ के अनुकूल बनाकर जीएसकैश (यौन उत्पीड़न के खिलाफ लैंगिक संवेदनशीलता समिति) को मजबूत बनाया था.

उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘जीएसकैश एक मजबूत और स्वतंत्र संस्था थी और यह जेएनयू में अच्छी तरह से काम कर रही थी. लगभग तीन वर्ष पहले कई चर्चाओं के बाद इसे कामकाज स्थल अधिनियम 2013 के अनुकूल बनाया गया था. इसे कार्यकारी परिषद ने मंजूरी दी थी. कुछेक लोगों को छोड़कर सभी पक्षकारों का इसकी कार्यप्रणाली में पूरा विश्वास था.'

जेएनयू प्रशासन ने खत्म कर दिया है जीएसकैश को

गत 18 सितंबर को जेएनयू प्रशासन ने जीएसकैश को खत्म कर उसकी जगह आंतरिक शिकायत समिति का गठन किया था. इस संस्था के सदस्यों में अधिकांश ऐसे हैं जिन्हें प्रशासन ने नामित किया है. इसकी सभी ओर काफी आलोचना हुई थी.

इसके विरोध की मुख्य वजह यह है कि इस नई कमिटी में चुने गए प्रतिनिधियों का कोई प्रावधान नहीं है. पुराने नियमों के अनुसार जीएसकैश में शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों के बीच से चुने गए प्रतिनिधि भी इसके सदस्य होते थे. इसमें नामित सदस्य भी होते थे लेकिन इन्हें नामित करने की प्रक्रिया भी पारदर्शी थी.

जेएनयूएसयू और शिक्षक संघ ने प्रशासन के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा है कि इससे अब नई कमिटी में प्रशासन का हस्तक्षेप बढ़ जाएगा. इससे यौन उत्पीड़न के मामलों के फैसले भी प्रभावित हो सकते हैं.

जेएनयूएसयू और शिक्षक संघ ने जीएसकैश को भंग करने के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है.

जेएनयूएसयू चुनावों को बहाल करने वाले सोपोरी छात्रों और शिक्षकों के बीच खासे लोकप्रिय थे. उन तक संपर्क बनाना छात्र संघों और जेएनयू शिक्षक संघों के लिए भी आसान था.

उन्होंने जोर देकर कहा कि जेएनयू जैसे प्रशासन को किसी से भी अप्रभावित रहते हुए फैसले लेने की जरूरत है ताकि विवाद और अविश्वास जैसे माहौल से बचा जा सके क्योंकि इसका शोध के परिणाम पर असर पड़ सकता है.

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