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दार्जिलिंग: बागी नेता बिनय तमांग बने नए एडमिनिस्ट्रेशन बोर्ड के चीफ, जीजेएम ने किया खारिज

लेकिन अलग गोरखालैंड के लिए आंदोलन की अगुवाई कर रहे जीजेएम ने इसे खारिज करते हुए इस कार्रवाई को जनता की आकांक्षाओं का मखौल उड़ाना बताया.

FP Staff Updated On: Sep 21, 2017 11:25 AM IST

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दार्जिलिंग: बागी नेता बिनय तमांग बने नए एडमिनिस्ट्रेशन बोर्ड के चीफ, जीजेएम ने किया खारिज

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दार्जिलिंग में नया प्रशासन चीफ नियुक्त कर दिया है. मुख्यमंत्री ने गोरखालैंड जनमुक्ति मोर्चा को नेता बिनय तमांग को गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन बोर्ड का चीफ नियुक्त किया है.

लेकिन अलग गोरखालैंड के लिए आंदोलन की अगुवाई कर रहे जीजेएम ने इसे खारिज करते हुए इस कार्रवाई को जनता की आकांक्षाओं का मखौल उड़ाना बताया. जीजेएम ने कहा कि इस मुद्दे का समाधान केंद्र, राज्य सरकार और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के बीच त्रिपक्षीय वार्ता से ही निकलेगा.

ममता ने कोलकाता में संवाददाताओं से कहा, ‘आज हमने नौ सदस्यीय बोर्ड ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स के गठन का महत्वपूर्ण फैसला लिया है.’ बागी जीजेएम सदस्यों बिनय तमांग और अनित थापा को बोर्ड का क्रमश: अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनाया गया है. छह अन्य सदस्य उन संगठनों से हैं जो गोरखालैंड की मांग और जीजेएम के नेतृत्व वाले आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं.

ममता ने कहा कि यह पैनल गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) की जगह लेगा. जीटीए पर पहले जीजेएम का नियंत्रण था. उन्होंने कहा कि जब तक जीटीए के चुनाव कराने लायक माहौल नहीं बन जाता तब तक पहाड़ी क्षेत्रों में विकास कार्य नया प्रशासन देखेगा.

गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) घाटी में बंगाल की सरकार के साथ मिलकर अर्द्ध-स्वायत्त सरकार चलाती है.

दार्जिलिंग में पिछले जून से ही अस्थिरता का माहौल बना हुआ है. जीजेएम लीडर और जीटीए के पूर्व चीफ बिमल गुरुंग जून में इस बोर्ड से अलग हो गए थे. तबसे घाटी में गोरखालैंड की मांग फिर से और जोरों-शोरों से उठने लगी थी. ये मांग हिंसक आंदोलन में भी बदल गया. घाटी में पिछले महीनों में भयंकर हिंसा हुई हैं. इस आंदोलन में 9 लोगों की मौत हो गई थी.

बंगाल सरकार ने गुरुंग के जाने के 4 महीने बाद जीटीए का नया चीफ नियुक्त किया है. जीटीए के अंतर्गत लगभग 40 विभाग हैं, जिनमें लगभग 5,000 कर्मचारी काम करते हैं. गुरुंग के अलग होने पर इन 5,000 कर्मचारियों की नौकरी पर बन आई थी. सवाल उठ रहे थे कि उनका क्या होगा?

इस पर जीजेएम के दार्जिलिंग के विधायक अमर सिंह राय ने कहा था कि पार्टी के सरकार से अलग होने का जीटीए पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

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