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गोरखपुर ट्रेजेडी: बच्चों की मौत की काली करतूत और गंदी सियासत के पीछे कौन?

बीआरडी मेडिकल कॉलेज का यह पूरा मामला बुनियादी तौर पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता का है

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Aug 19, 2017 07:52 PM IST

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गोरखपुर ट्रेजेडी: बच्चों की मौत की काली करतूत और गंदी सियासत के पीछे कौन?

गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 10 से 11 अगस्त के बीच 32 बच्चों की मौत हो गई थी. इसकी वजह ऑक्सीजन सप्लाई में कथित कमी बताई गई. घटना के बाद से ही विपक्ष हमलावर हो गई है. इस मामले को लेकर यूपी की योगी सरकार चौतरफा घिरती नजर आ रही है.

योगी सरकार पर विपक्षी पार्टियां तो हमला बोल ही रही हैं, पीड़ित परिवार भी अब मामले पर खुलकर बोलना शुरू कर दिया है. पीड़ित परिवार भी सरकार और अस्पताल प्रशासन पर झूठ बोलने का आरोप लगा रही है.

इधर, घटना पर राजनीति भी जोर पकड़ने लगी है. नेताओं का गोरखपुर आना-जाना पिछले एक सप्ताह से लगा हुआ है. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ 11 अगस्त की घटना के बाद दूसरी बार गोरखपुर पहुंचे.

आदित्यनाथ ने गोरखपुर पहुंचते ही कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर जोरदार हमला बोला. योगी आदित्यनाथ ने बोला है कि राहुल गांधी गोरखपुर में पिकनिक न मनाएं और घटना के लिए कांग्रेस पार्टी ही जिम्मेदार है.

शनिवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ दोनो गोरखपुर में हैं. योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर आने का शनिवार का दिन शायद इसलिए चुना कि कांग्रेस पार्टी कहीं ज्यादा हमलावर न हो.

क्योंकि, गोरखपुर योगी आदित्यनाथ का क्षेत्र है और राहुल गांधी के द्वारा घिरने पर उनकी और किरकिरी होती. अपने बचाव के लिए वह खुद मैदान में आ कर डट गए.

राहुल जहां पीड़ित परिवारों से मिल रहे हैं, वहीं योगी आदित्यनाथ शहर के एक दलित कॉलोनी में जा कर ‘स्वच्छ उत्तर प्रदेश-स्वस्थ उत्तर प्रदेश’ अभियान की शुरुआत की है, जो पूरे राज्य में 20 अगस्त से 25 अगस्त तक मनाया जाएगा.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी मांगा सरकार से जवाब

एक तरफ विपक्षी दल सरकार पर संवेदनहीनता और नाकामी का आरोप लगा रहे हैं, वहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी यूपी सरकार से बच्चों के मौत पर जवाब मांग लिया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से कहा है कि मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में हुई बच्चों की मौत की वजहें बताएं.

हम आपको बता दें कि 11 अगस्त की घटना के बाद से ही योगी सरकार इस बात को मानने से साफ इंकार करती आ रही है कि ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने से बच्चों की मौत हुई थी.

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुए बच्चों की मौत के दो दिलचस्प पहलू हैं. पहला, सरकार ने निष्कर्ष निकाल लिया है कि कोई भी मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई है.

लेकिन, सारे सबूत इसी बात की तरफ इशारा कर रहे हैं कि 10 अगस्त और 11 अगस्त के 12 बजे तक जितनी भी मौतें हुई हैं वह ऑक्सीजन की कमी के चलते ही हुई है.

दूसरी बात यह है कि कार्रवाई के नाम पर सरकार ने डॉ. कफील को नोडल अफसर के पद से हटा दिया है और कॉलेज के प्रिंसिपल राजीव मिश्रा और उनकी पत्नी पूर्णिमा मिश्रा को निलंबित कर दिया गया है.

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क्या कहते हैं सबूत?

लेकिन, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी की पड़ताल में जितनी भी सबूत निकल कर आ रहे हैं वे सब इस ओर इशारा कर रहे हैं कि बच्चों की मौतों की पूरी जिम्मेदारी पूरे अस्पताल प्रशासन के सिर पर बराबर है.

गोरखपुर के स्थानीय अखबारों में काफी पहले से ही ऑक्सीजन खत्म होने की खबर छप रही थी. जिस पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया.

बीआरडी मेडिकल कॉलेज का यह पूरा मामला बुनियादी तौर पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता का है. कॉलेज के प्रिंसिपल से लेकर डॉक्टर्स और फार्मासिस्ट सब इसके लिए समान रुप से जिम्मेदार हैं.

बच्चों की हो रही लगातार मौतें वर्तमान व्यवस्था में भ्रष्टाचार का क्लासिकल उदाहरण है. जहां हर व्यक्ति अपनी-अपनी जिम्मेरदारी का ठिकरा दूसरे पर फोड़ रहा है. कोई भी अपनी जिम्मेदारी निभाने को तैयार नहीं है. जिसका नतीजा बच्चों की मौत के रूप में सामने आ रहा है.

फ़र्स्टपोस्ट हिंदी को वो तमाम सबूत और पेपर के कटिंग हैं जो घटना को पहले से हीं इंगित कर रहे थे. इसके बावजूद न तो शासन और न ही प्रशासन ने समय पर कोई जरूरी इंतजाम कर पाई.

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इन तमाम सबूतों के बाद भी गोरखपुर कांड पर कहने को और कुछ नहीं बच रहा है. सारे कागजात खुद सरकार की करस्तानी की पोल खोल रही है.

सबसे बुनियादी बात यह है कि जब सरकार ने पहले ही मान लिया कि मौतें ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई थीं, तो किसी भी जांच रिपोर्ट या साक्ष्य का कोई महत्व नहीं रह जाता है.

फ़र्स्टपोस्ट हिंदी ने बीआरडी मेडिकल कालेज में बच्चों की मौत के लिए ऑक्सीजन की कमी के बारे में कई लोगों से बात की. कई सारे सबूत भी फ़र्स्टपोस्ट हिंदी के हाथ लगे हैं.

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इन सबूतों और मरने वाले बच्चों के माता-पिता और परिजनों से बात कर यह पता चला है कि 10 अगस्त की रात 7.30 बजे से 100 बेड वाले इंसेफेलाइटिस वार्ड और 54-54 बेड वाले वार्ड नंबर 12 और 14 में ऑक्सीजन की कमी होने लगी थी.

डॉक्टर्स अस्पताल में भर्ती बच्चों को जरूरत के मुताबिक ऑक्सीजन नहीं उपलब्ध करा पा रहे थे. आधी रात के बाद हालात और बिगड़ गए थे. इसके बाद मरीजों के परिजनों को एम्बू बैग दिया गया और बच्चों से उससे ऑक्सीजन देने को कहा गया.

11 तारीख को सुबह होते-होते वार्ड संख्या 12 और 14 में ऑक्सीजन की सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई थी. स्थिति पूरी तरह से बेकाबू हो गई थी.

गोरखपुर न्यूज लाइन के संपादक मनोज कुमार सिंह फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘हमारी पड़ताल से कई नए तथ्य सामने आए हैं. गोरखपुर न्यूज लाइन ने 11 अगस्त की रात को ही रिपोर्ट प्रकाशित की थी कि लिक्विड ऑक्सीजन गैस की आपूर्ति रुकने और प्लांट की ऑक्सीजन खत्म हो जाने के बावजूद वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए गए थे.’

बकौल मनोज, ‘10 अगस्त की रात साढ़े सात बजे के बाद जब ऑक्सीजन प्लांट से प्रेशर कम होने लगा उस वक्त स्टाक में 52 जंबों सिलेंडर ही थे. पूरी रात इसी से काम चलता रहा और ऑक्सीजन सिलेंडर अगले दिन दोपहर में मिल पाए.’

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हालांकि, मेडिकल कालेज की ओर से और प्रशासन की ओर से बार-बार दावा किया जा रहा है कि उसके पास पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन सिलेंडर थे और ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई. लेकिन, उस वक्त वार्ड में भर्ती मरीजों के परिजनों के बयान कुछ और कह रहे हैं.

10 अगस्त की रात से 11 अगस्त की दोपहर तक मरीजों को ऑक्सीजन नहीं मिल पा रहा था और वे तड़प-तड़प कर मर रहे थे.

गोरखपुर में बीते पांच दिन में इनसेफेलाइटिस (दिमागी बुखार) से 63 बच्चों की मौत हो चुकी है

क्षमता से अधिक होती है भर्ती

हम आपको बता दें कि बीआरडी मेडिकल कालेज के नेहरू अस्पताल में 100 बेड के इंसेफेलाइटिस वार्ड में ही 44 बेड का एनआईसीयू वार्ड है. जिसमें, नवजात शिशुओं का इलाज होता है. इस वार्ड में लगातार ऑक्सीजन की जरूरत होती है. यहां पर क्षमता से दोगुने-तिगुने से अधिक बच्चे भर्ती रहते हैं.

जुलाई से लेकर अगस्त महीने में यहां पर एक समय में 80-90 से अधिक बच्चे भर्ती रहते हैं. जब 10 अगस्त को ऑक्सीजन संकट हुआ, उस समय भी यहां 80 से अधिक बच्चे भर्ती थे.

गोरखपुर न्यूज लाइन वेबसाइट के मुताबिक, 11 अगस्त को सुबह छह बजे ऑक्सीजन संकट पर चरम पर हो गया तो वार्ड नम्बर 12 और 14 में ऑक्सीजन आपूर्ति रोक दी गई और इसे 100 बेड के इंसेफेलाइटिस वार्ड तक सीमित कर दिया गया.

हालांकि, यहां भी मरीजों को जरूरत के मुताबिक ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही थी. वार्ड में भर्ती सभी मरीजों के परिजनों को एम्बू बैग के जरिए ऑक्सीजन देने को कहा गया. जिसमें मरीजों को एम्बू बैग चलाते रहने को कहा गया.

11 अगस्त की सुबह 10 बजे डॉ. कफील खान ने ऑक्सीजन सिलेंडर लाने के लिए वाहन मंगाने का प्रयास किया क्योंकि खलीलाबाद से ऑक्सीजन सिलेंडर मिलने की बात हो गई थी.

वाहन मिलने में देरी होने पर डॉ. कफील अहमद एसएसबी के सेक्टर ऑफिस पहुंचे और डीआईजी से मिलकर एक वाहन देने का अनुरोध किया. एसएसबी ने फौरन उन्हें वाहन उपलब्ध कराया और साथ ही अपनी मेडिकल कोर के 11 जवान भी दिए.

डॉ. कफील वाहन के साथ झुगिया गेट आए और वहां से एक जगह से 11 जम्बो गैस सिलेंडर लिया और उसे लेकर मेडिकल कॉलेज आए.

सिलेंडर उतारने के बाद वाहन को ऑक्सीजन सिलेंडर लाने फिर खलीलाबाद भेजा गया. वहां से भी कुछ सिलेंडर लाए गए.

इस वक्त तक बच्चों की मौत से परिजन आक्रोशित हो रहे थे लेकिन एसएसबी के जवानों को सिलेंडर के साथ देख उन्हें भरोसा हुआ और वे शांत हो गए. फिर भी यह संकट 11 अगस्त की रात तक चलता रहा जिसकी वजह से 10 और 11 अगस्त की तारीख में सरकारी रिकार्ड के मुताबिक 34 बच्चों और 18 वयस्कों की मौत हो गई.

पिछले कुछ दिनों से बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत का आंकड़ा लगतार बढ़ ही रहा है. पिछले कुछ दिनों में इस अस्पताल में कम से कम 200 बच्चे की मौत की खबर मिल रही है. इसके बावजूद राजनेता बच्चों की हो रहे मौतों पर राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे हैं.

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