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बिहार टॉपर को कोसने से बेहतर है सिस्टम को सुधारिए जनाब

गणेश ठाकुर की आलोचना होना तो जायज है लेकिन ये केस बिहार में शिक्षा तंत्र के बर्बाद होने की तरफ भी इशारा करता है

Ravishankar Singh Ravishankar Singh | Published On: Jun 02, 2017 09:37 PM IST | Updated On: Jun 02, 2017 10:34 PM IST

बिहार टॉपर को कोसने से बेहतर है सिस्टम को सुधारिए जनाब

बिहार बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में टॉप करने वाले गणेश कुमार ठाकुर का बिहार पुलिस ने गिरफ्तार कर रिजल्ट रोक दिया है. उन्हें लेकर तमाम तरह की कहानियां भी चल रही हैं. उनके ज्ञान का भी ऑनस्क्रीन टेस्ट लिया जा रहा है. लेकिन बीते साल की टॉपर रूबी राय से हमनें क्या सबक लिए, इसकी बात कोई भी नहीं कर रहा है.

गणेश ठाकुर और रूबी राय ने अगर गलत किया है तो उसकी सजा उन्हें मिलेगी ही लेकिन बिहार में शिक्षा तंत्र जिस तरह से सड़ चुका है, उसकी समीक्षा कौन करेगा?

राज्य में इस बार के बोर्ड के नतीजों ने सभी को हैरान कर दिया. बिहार के लगभग 3027 स्कूल-कॉलेजों के 12 लाख 40 हजार 168 छात्र इस बार इंटर की परीक्षा में शामिल हुए. लेकिन, इनमें से 654 स्कूल-कॉलेजों में कोई भी स्टूडेंट पास नहीं हो सका.

नतीजे आने के बाद इंटरमीडिएट आर्ट्स साइड के टॉपर गणेश ठाकुर को संगीत विषय में मिले अंक को लेकर मीडिया की तरफ से सवाल खड़े किए जाने लगे. नतीजतन बोर्ड ने भी अब उसका संज्ञान लेते हुए गणेश के रिजल्ट पर रोक लगा दी है.

बोर्ड की धांधलियों को निशाने पर क्यों नहीं लेता मीडिया?

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गणेश ठाकुर के बारे में मीडिया में कई प्रकार की खबरें प्रसारित की जा रही हैं. लेकिन, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति पर सवाल नहीं किए जा रहे हैं. इस बार के रिजल्ट में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के द्वारा भी कई गड़बड़ियां की गई हैं.

प्रभात खबर ने अपनी एक रिपोर्ट में बोर्ड की कई गड़बड़ियां को उजागर किया है. खबर के मुताबिक, ‘इंटर के खराब रिजल्ट को लेकर बिहार बोर्ड भले ही छात्रों की क्वालिटी पर सवाल उठा रहा हो, लेकिन बोर्ड का खुद का गणित भी गड़बड़ है. बिहार बोर्ड ने अंकों की गिनती में  कई तरह की गड़बड़ियां की हैं. किसी के मार्क्सशीट पर अंकों को गलत जोड़ा गया है, तो किसी के मार्क्सशीट में एबसेंट लिख दिया गया है.’

खबर के मुताबिक शंकर कुमार (रोल नंबर 17010657, रोल कोड 22012) नाम के साइंस छात्र के रिजल्ट में गड़बड़ी है. बिहार बोर्ड के अनुसार वह सारे विषयों में पास है. लेकिन, उसके सारे विषयों के अंकों की टोटलिंग में बोर्ड ने गड़बड़ी कर दी है.

शंकर के सभी विषयों के अंकों को जोड़ने पर कुल 258 अंक हो रहे हैं, लेकिन बोर्ड ने कुल 197 अंक ही दिए हैं और शंकर कुमार को फेल की मार्क्सशीट थमा दिया है. अब शंकर कुमार अपना मार्क्सशीट लेकर भटक रहा है.

साइंस के छात्र मनीष कुमार (रोल नंबर 17011271 व रोल कोड 33013) ने बायोलॉजी विषय नहीं लिया है, लेकिन उसे बायोलॉजी में अंक दे दिए गए हैं.

एेसे अनगिनत केस हैं जो बिहार बोर्ड की पोल खोल रहे हैं लेकिन निशाने पर गणेश ठाकुर ही ज्यादा हैं.

फेल बच्चों और उनके माता-पिता ने सबसे पहले उठाए सवाल 

सबसे पहले फेल छात्रों और अभिभावकों ने परीक्षा परिणाम पर सवाल उठाना शुरू किया. 13 लाख परीक्षार्थियों में से आठ लाख छात्र फेल हो गए हैं. ऐसे में छात्र और अभिभावकों ने रिजल्ट की विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं.

बिहार में इस मसले को लेकर सियासत गरमा गई है. विपक्षी पार्टी बीजेपी ने अब पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है. बीजेपी ने कहा कि नीतीश सरकार में राज्य की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गई है. 12वीं की परीक्षा के रिजल्ट ने इसको एक बार फिर से बिहार की हकीकत को सामने ला दिया है.

सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि किसी भी छात्र-छात्रा को लगता है कि उसकी कॉपी ठीक ढंग से नहीं जांची गई है तो उसे कॉपी दोबारा चेक करवाने का अधिकार है.

राजनीति में शिक्षा को न घसीटें

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बिहार बोर्ड के नतीजों पर राजनीति पर शुरू गई है. लेकिन पक्ष और विपक्ष दोनों के ही नेताओं को ये बात समझनी होगी कि मामला लाखों किशोरों के भविष्य से जुड़ा है. अगर जेडीयू सरकार परीक्षा में कड़ाई को लेकर अपनी पीठ थपथपाना चाहती है तो थपथपाए. इससे इतर उसे ये भी याद रखना होगा कि सिर्फ कठोर नियम लगाकर परीक्षा करवा देना से ही तंत्र नहीं सुधरेगा.

सरकार को ये जिम्मेदारी तय करनी ही होगी कि तथागत अवतार तुलसी वाले राज्य की तुलना रूबी राय और गणेश ठाकुर से न होने लगे.

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