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संघ का वृंदावन में मंथन, मिशन 350+ की तैयारी

माना जा रहा है कि 2019 की तैयारी के लिए सभी संभावित फेरबदलों पर विचार विमर्श कर लिया गया है.

Amitesh Amitesh Updated On: Sep 01, 2017 05:01 PM IST

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संघ का वृंदावन में मंथन, मिशन 350+ की तैयारी

केंद्र में सरकार से लेकर संगठन तक बड़े बदलाव की तैयारी हो रही है. तीन सितंबर को कैबिनेट विस्तार की पूरी संभावना भी है. लेकिन, इसी बीच बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के वृंदावन पहुंचने के बाद सियासी हलचल और बढ़ गई है.

वृंदावन में आरएसएस के पदाधिकारियों की बड़ी बैठक हो रही है. जिसमें संघ के 180 पदाधिकारी शिरकत कर रहे हैं. यह बैठक एक से तीन सितंबर तक चलने वाली है. तीन दिनों की बैठक के पहले ही दिन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और बीजेपी संगठन महामंत्री रामलाल कृष्ण की नगरी पहुंच गए हैं. पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी दो सितंबर को वृंदावन पहुंचने वाले हैं.

इसे महज संयोग ही कहेंगे कि कैबिनेट विस्तार को लेकर चल रही कवायद के बीच पार्टी अध्यक्ष संघ दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे हैं. लेकिन, पूरे संघ परिवार को फिलहाल एक ही लक्ष्य दिख रहा है मिशन 350+. इसी मिशन को पूरा करने की तैयारी हो रही है. रणनीति बनाई जा रही है.

कैबिनेट विस्तार को लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने पिछले एक हफ्ते में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं से लगातार मुलाकात की है. इसके अलावा शाह की दिल्ली में ही संघ के वरिष्ठ अधिकारियों से भी चर्चा हुई है.

इस दौरान सरकार से लेकर बीजेपी संगठन में संभावित फेरबदल को लेकर होमवर्क कर लिया गया है. कोशिश है 2019 के पहले संगठन और सरकार को हर तरह से चुस्त कर लेने की, जिसके दम पर 2019 की बड़ी लड़ाई से पहले अपने-आप को पूरी तरह से तैयार किया जा सके.

वृंदावन के मंथन में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और संगठन महामंत्री रामलाल की तरफ से भी भावी रणनीति को लेकर अपनी-अपनी तैयारियों का ब्योरा रखा जाएगा. बैठक में देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था, पड़ोसी देशों के साथ सम्बंध, देश की मौजूदा स्थिति और 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर चर्चा की जानी है.

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संघ की तरफ से भी अगले लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर अभी से ही रणनीति बनाई जा रही है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में संघ भी अपने सुझाव देगा.

पिछले लोकसभा चुनाव के वक्त संघ ने अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया था. उस दौरान संघ के सभी स्वयंसेवक अलग-अलग राज्यों में बीजेपी के लिए जी-जान से लगे थे. इसके बाद भी संघ के कार्यकर्ता बैठे नहीं, बल्कि लगातार बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर यूपी सहित कई और राज्यों में भी अपने काम को अंजाम देते रहे.

संघ और बीजेपी के बीच बेहतर तालमेल का ही परिणाम है कि यूपी में इस तरह की ऐतिहासिक जीत मिली. लेकिन, संघ की कोशिश है कि केरल जैसे राज्यों में जहां संघ के कार्यकर्ताओं पर जुल्म किए जा रहे हैं बीजेपी और सरकार थोड़ा और ज़्यादा सक्रिय हो .

दूसरी तरफ, बीजेपी की भी कोशिश है कि केरल, तमिलनाडु, आन्ध्रा, तेलंगाना, बंगाल और ओडीशा जैसे राज्यों में संघ पूरी तरह बीजेपी को सहयोग करे. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के मिशन 350+ के एजेंडे में ये सभी राज्य हैं जहां बीजेपी अबतक कुछ बड़ा नहीं कर पाई है. ऐसे में बीजेपी की कोशिश है कि संघ की ताकत के दम पर यहां अपनी पैठ बनाई जाए, जिससे 2019 में इन राज्यों से बीजेपी का सूखा खत्म हो सके.

संघ भी इस बात को समझता है, लिहाजा संघ,सरकार औऱ संगठन में बेहतर तालमेल की कवायद हो रही है. ऐसा हो भी रहा है. शायद पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि संघ के साथ-साथ बीजेपी संगठन और सरकार तीनों में कोई मतभेद ना दिख रहा हो. ऐसा संघ और बीजेपी दोनों के नजरिए से फायदेमंद है.

अब तीन दिनों के मंथन के बाद फिर से संघ, बीजेपी और सरकार मिशन मोड में काम करते दिखेंगे.

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