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यूपी विधानसभा में विस्फोटक: 1994 में भी मिली थी लाश

करीब 23 साल पहले यूपी असेंबली में एक युवक का शव परिसर के भीतर ही मिला था

Amitesh Amitesh Updated On: Jul 14, 2017 03:19 PM IST

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यूपी विधानसभा में विस्फोटक: 1994 में भी मिली थी लाश

यूपी विधानसभा में इस वक्त विस्फोटक मिलने के बाद सदन की सुरक्षा सवालों के घेरे में है. लेकिन, यूपी विधानसभा के लिए ये कोई नई बात नहीं है. वहां की सुरक्षा तो पहले से ही राम भरोसे रही है.

हालिया विवाद के बीच 1994 की उस घटना की याद एक बार फिर से ताजा हो रही है. उस वक्त यूपी विधानसभा के भीतर ही एक युवक का शव मिला था. उस वक्त इस पूरे मामले में समाजवादी पार्टी के एक बड़े नेता का नाम भी उछला था. इस मामले में सीबीआई ने जांच भी की थी, लेकिन, सीबीआई जांच के बावजूद भी दोषी को पकड़ा नहीं जा सका.

मौजूदा दौर में यूपी विधानसभा का हाल कुछ ऐसा ही है लग रहा है जिसमें सुरक्षा के नाम पर कोई खास इंतजाम नहीं है. पूरा इलाका घनी बस्ती से घिरा है और ठीक उसी से सटा हुआ सचिवालय है. लेकिन, सुरक्षा के नाम पर महज खानापूर्ति ही दिखती है. यहां तक कि वहां काम कर रहे कर्मचारियों तक का पुलिस वेरिफिकेशन नहीं हो रखा है.

विधानसभा की सुरक्षा की खुली पोल

manoj pandey

मनोज पांडे

अब विधानसभा के भीतर विस्फोटक मिलने के बाद सबकी नींद टूटी है. सदन के भीतर समाजवादी पार्टी के विधायक मनोज पांडे की सीट के नीचे 150 ग्राम विस्फोटक PETN मिला, जिसके बाद हड़कंप मच गया है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सदन के भीतर बयान ने खुद ही विधानसभा के भीतर की सुरक्षा की पोल खोल दी है. मुख्यमंत्री ने सदन में कहा विधानसभा के भीतर काम करने वाले सभी स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन होना चाहिए.

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने सदन के भीतर विधायकों की तरफ से मोबाइल के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल खड़ा किया. योगी ने सुझाव दिया है कि सदन की कार्यवाही के दौरान विधानसभा के भीतर माननीय सदस्य मोबाइल और बैग ना लेकर आएं. मतलब सदन में अब मोबाइल के इस्तेमाल पर रोक लगाने की तैयारी है. बैग को भी अब बाहर रखकर ही सदन में दाखिल होना होगा.

लेकिन, मुख्यमंत्री की परेशानी सदन की लचर सुरक्षा -व्यवस्था को लेकर साफ दिख रही थी. अबतक सांसद रहे योगी आदित्यनाथ सीधे मुख्यमंत्री बनकर लखनऊ में विधानसभा में दाखिल हुए हैं. बतौर सांसद उन्होंने संसद की सुरक्षा की सख्ती देखी है, लेकिन, विधानसभा के भीतर की लापरवाही उनके लिए भी चिंता की बात है.

सदन के भीतर उन्होंने सुरक्षा पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि ‘सचिवालय, विधानभवन और सदन के भीतर रहने वाले मार्शल में किसी तरह का कोई तालमेल ही नहीं है.’

तालमेल के अभाव में सदन के भीतर किसी आतंकी हमला होने की सूरत में सुरक्षा को लेकर योगी ने बड़ा सवाल खड़ा किया है. सदन परिसर मे कोई ‘क्विक रिस्पॉन्स टीम’ नहीं है जो सीधे आतंकवादियों का मुंहतोड़ जवाब दे सके.

मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच एनआईए से कराने की बात कही जिसे विधानसभा स्पीकर ने मंजूरी दे दी है. अब एनआईए इस बात की जांच करेगी कि आखिरकार विधानसभा के भीतर इतना खतरनाक विस्फोटक कैसे आ गया?

आखिरकार इसमें किसकी साजिश है क्या इसमें कोई आतंकी कनेक्शन है. एनआईए जांच के बाद से ही इस बात की पुष्टि हो पाएगी. विधानसभा स्पीकर हृदयनारायण दीक्षित ने मुख्यमंत्री के इस सुझाव को मंजूरी दे दी है. अब सदन की मंजूरी के बाद पूरे इलाके की सुरक्षा भी मजबूत होगी और एनआईए मामले की तह तक जाकर विस्फोटक रखने के पीछे की साजिश का पर्दाफाश कर सकेगी.

योगी आदित्यनाथ के कड़े तेवर और उस पर स्पीकर की सहमति के बाद अब लग रहा है कि लखनऊ विधानसभा की मौजूदा स्थिति में कोई बड़ा बदलाव आए और देश की सबसे बड़ी विधानसभा के भीतर और बाहर सुरक्षा कुछ इस कदर हो जाए जैसे संसद के भीतर है.

योगी पर है पहले से खतरा

Yogi Adityanath

दरअसल योगी आदित्यनाथ की छवि एक हिंदूवादी नेता की रही है. मुख्यमंत्री बनने से पहले भी उनका बयान विवादों में रहा है. अपने विवादित बयानों और कट्टरपंथी सोंच के चलते योगी पहले से भी आतंकी निशाने पर रहे हैं. उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी खुद की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.

योगी जहां जाते हैं वहां सुरक्षा की पूरी व्यवस्था होती है. बावजूद इसके अभी पिछले महीने योगी का बिहार दौरा हुआ था, तो दरभंगा की रैली के दौरान योगी आदित्यनाथ ने बुलेट प्रूफ शीशे के पीछे से ही लोगों को संबोधित किया.

2007 में संसद के भीतर अपनी सुरक्षा की बात करते-करते योगी रो पड़े थे. उस वक्त योगी ने असामाजिक तत्वों से अपनी जान को खतरा बताया था. योगी ने लोकसभा स्पीकर से संरक्षण मांगा था. लेकिन, अब बतौर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस वक्त यूपी विधानसभा में बैठ रहे हैं तो उन्हें एक बार फिर से अपने अलावा बाकी सभी विधायकों की सुरक्षा की चिंता सता रही है. शायद यही चिंता अब यूपी की विधानसभा को संसद की तरह सुरक्षित कर दे.

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