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दिल्ली-एनसीआर को ‘दि ग्रेट स्मॉग’ से बचाने में जुटे केंद्र, दिल्ली सरकार और पंजाब

केंद्र, दिल्ली और पंजाब सरकार ने दिल्ली-एनसीआर को ‘दि ग्रेट स्मॉग’ से बचाने के लिए कमर कस ली है

Bhasha Updated On: Sep 17, 2017 05:40 PM IST

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दिल्ली-एनसीआर को ‘दि ग्रेट स्मॉग’ से बचाने में जुटे केंद्र, दिल्ली सरकार और पंजाब

जैसे-जैसे दीपावली नजदीक आ रही है, दिल्लीवासियों को दि ग्रेट स्मॉग की याद सताने लगी है. उस वक्त 10-12 दिनों तक पूरी दिल्ली को धुएं और धुंध ने अपने चपेट में ले लिया था. लोगों ने सांस लेने में तकलीफ, बेचैनी, आंखों में जलन, दमा और एलर्जी की शिकायत की थी. मीडिया ने इसे ‘दि ग्रेट स्मॉग’ का नाम दिया था.

घबराइए मत. केंद्र, दिल्ली और पंजाब सरकार ने दिल्ली-एनसीआर को ‘दि ग्रेट स्मॉग’ यानी धुएं और धुंध की जहरीली चादर से बचाने के लिए कमर कस ली है. पंजाब सरकार खेतों में किसानों की ओर से पराली यानी फसल के अवशेष जलाने पर सख्ती से पेश आ रही है.

पराली जलाने पर देना होगा पांच हजार रुपए का जुर्माना 

A thick layer of smog engulfs New Delhi, India, on November 5, 2016. Some 1,800 primary schools in Delhi have been ordered to shut down on Saturday as the capital city grapples with some of the worst pollution in recent years. Data from a pollution monitoring agency has measured the toxic smog to as much as 13 times the safe limit. Locals blame the overdose of bursting crackers and fireworks during Diwali, for the alarming pollution level. (Jyoti Kapoor/SOLARIS IMAGES)

दिल्ली के पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने और दीपावली में बड़े पैमाने पर आतिशबाजी को इस जहरीले ‘स्मॉग’ का प्रमुख कारण बताया गया था.

पंजाब सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव और कृषि विभाग के प्रमुख सचिव एम. पी. सिंह ने बताया कि पराली जलाने वाले किसानों पर 2500 से 5000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा रहा है.

सिंह ने बताया, ‘रिमोट सेंसिंग एजेंसी के जरिए सरकारी एजेंसियों को सूचित किया जाता है कि किस इलाके में पराली जलाई जा रही है. फिर यह जानकारी संबंधित पुलिस स्टेशनों को दी जाती है और कांस्टेबल उन खेतों में जाकर पराली जलाने वाले किसानों पर जुर्माना लगा रहे हैं.’

सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट से लगाई जा रही पराली जलाने पर रोक 

उन्होंने कहा, ‘सरकार ने एक ‘सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट’ (एसएसएम) सिस्टम भी शुरू किया है, जिसके तहत किसान खास तरह की मशीनों के जरिए फसलों की कटाई करते हैं. फसलों की कटाई के बाद पराली छोटे-छोटे टुकड़ों में खेतों में बिखर जाती है. इससे पराली जलाने की नौबत भी नहीं आती और खेतों की उर्वरा-शक्ति बरकरार रहती है.’

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अतिरिक्त निदेशक डॉ. दीपांकर साहा ने ‘स्मॉग’ से निपटने की तैयारियों के बारे में बताया कि सीपीसीबी की पूरी टीम दिन-रात सर्वे कर रही है. हवा की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखी जा रही है. यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि कहीं आग नहीं लगे और आग लगने की सूरत में उस पर तुरंत काबू पाया जाए.

बारूद-पटाखों की बिक्री पर निगरानी तेज करेगी दिल्ली सरकार 

इधर दिल्ली सरकार ने त्योहारों के मद्देनजर दिल्ली के बाजारों में बारूद -पटाखों की बिक्री संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तेज कर दी है. निगरानी दल आने वाले कुछ दिनों में छापेमारी शुरू कर देंगे.

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के खतरे को देखते हुए पिछले साल ‘ग्रेडेड रिस्पॉन्स सिस्टम’ तैयार किया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी थी. कोर्ट के आदेश पर केंद्र ने इस चार स्तरीय व्यवस्था को अधिसूचित किया था.

इसके तहत जैसे ही दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण गंभीर और आपात स्थिति में पहुंचेगा, निजी वाहनों में खुद ही ‘ऑड-ईवन’ फार्मूला लागू हो जाएगा. निर्माण कार्य बंद कर दिए जाएंगे. जरूरी वस्तुओं को छोड़कर डीजल ट्रकों को दिल्ली में दाखिल होने से रोक दिया जाएगा. जरूरत पड़ी तो स्कूल भी बंद कर दिए जाएंगे.

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