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सरकारें क्यों नाकाम हैं दाऊद को भारत लाने में

1993 के बाद भारत की कोई भी सरकार दाऊद इब्राहिम को भारत लाने में क्यों नहीं कामयाब हो पाई है?

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Jan 04, 2017 08:13 AM IST

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सरकारें क्यों नाकाम हैं दाऊद को भारत लाने में

भारत के मोस्ट वांटेड अपराधी और 1993 मुंबई ब्लास्ट के आरोपी दाऊद इब्राहिम को लेकर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने एक बार फिर रटा-रटाया जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि दाऊद को पकड़े जाने के प्रयास जारी हैं. गृहमंत्री ने पत्रकारों से बात करते हुए ये बातें कहीं.

दाऊद पर गृहमंत्री का यह बयान बीते सालों में दूसरी सरकारों के बयान से कतई अलग नहीं है. इस मामले में गृह मंत्रालय के एक पूर्व अधिकारी की मानें तो स्थिति बेहद बुरी है. अधिकारी का कहना है कि भारतीय जांच एजेंसियों के पास दाऊद के बारे में ठीक-ठाक जानकारी का अभाव है. सच्चाई तो ये है कि भारतीय जांच एजेंसियां इंटरपोल और एफबीआई से मिली सूचनाओं पर ही निर्भर हैं.

दाऊद की गिरफ्तारी एक चुनौती

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पिछले 22 वर्षों से भारत की सभी सरकारें दाऊद को भारत लाने की बात करती रही है. पर आज तक कोई भी सरकार दाऊद इब्राहिम को भारत लाने में कामयाबी हासिल नहीं कर पाया है. जानकारों के मुताबिक, पिछले 22 वर्षों में भारत की जांच एजेंसियों को दाऊद की बदले हुलिए तक का भी पता नहीं चल पाया है, तो भारत लाने की बात तो दूर की कौड़ी ही है.

तीन सालों में कोई कामयाबी नहीं

नरेंद्र मोदी की सरकार आए भी लगभग तीन साल हो गए हैं. मोदी सरकार भी दाऊद को लाने की बात करती आ रही है. गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने 11 मई 2015 को लोकसभा में बयान दिया था जिसमें कहा था कि भारत सरकार दाऊद को हर कीमत पर वापस लाएगी.

राजनाथ सिंह ने लोकसभा में दिए बयान में कहा था कि दाऊद से जुड़ी हर जानकारी पाकिस्तान को दी जा चुकी है. पाकिस्तान को अब कार्रवाई करनी ही होगी. जरूरत पड़ी तो पाकिस्तान से इस मामले में बात भी की जाएगी.

पाकिस्तान से किस तरह की बात हो रही है, यह पाकिस्तान के हमारे रिश्ते ही बयां कर रहे हैं. राजनाथ सिंह का यह बयान सरकार की प्रतिबद्धता को जरूर दर्शाता है.

दाऊद को लेकर अफवाहों का बाजार

पिछले कई सालों से दाऊद के बारे में तरह-तरह की बातें हवा में तैरती रहती है. कभी सुनने को मिलता है कि दाऊद ने अपना ठिकाना बदल लिया तो कभी सुनने में आता है दाऊद बीमार हो गया है तो कभी ये सुनने को मिलता है कि दाऊद अपना काला कारोबार को समेटने में लगा है.

पूर्व अधिकारियों के निशाने पर सरकार

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दाऊद इब्राहिम मामले की जांच कर चुके कई अधिकारी सरकार की नीयत पर सवाल खड़े कर चुके हैं. दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार ने भी एक अखबार को इंटरव्यू में खुलासा किया था कि सरकार की नीयत में खोट है.

बीजेपी सांसद और पूर्व गृह सचिव आर के सिंह ने भी एक पूर्व गृह मंत्री पर दाऊद की खास करीबी पर दिल्ली पुलिस को हाथ नहीं डालने से रोकने का आरोप लगाया था.

देश की मीडिया में दाऊद को पकड़ने से जुड़ी कई कहानियां आती रही हैं. साल 2014 के जनवरी महीने में तत्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने स्वीकार किया था कि दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में है. उसे गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है. शिंदे ने उस वक्त कहा था कि भारत सरकार अमेरिका की मदद से दाऊद को भारत लाएगी.

शिंदे के बयान पर मोदी का पलटवार

साल 2014 में देश के तात्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे के उस बयान पर नरेंद्र मोदी ने आलोचना की थी. मोदी ने कहा था कि ऐसे ऑपरेशन बयान जारी कर नहीं किए जाते हैं.

मोदी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इस तरह की चीजें मीडिया के माध्यम से की जाती हैं? मोदी ने अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मारे जाने का जिक्र करते हुए कहा था कि क्या अमेरिका ने ओसामा को मारने के लिए उससे पहले बात की थी, न ही पाकिस्तान में अपने प्लान के बारे में अमेरिका ने मीडिया से जिक्र किया था.

नरेंद्र मोदी ने सुशील कुमार शिंदे के बयान को बचकाना बयान बताया था. मोदी ने कहा था कि मुझे शर्म आती है कि भारत के गृहमंत्री इस तरह के बयान देते हैं.

दाऊद पर भारत के पूर्व गृहसचिव आर के सिंह ने कहा था कि दाऊद के बारे में एफबीआई को कोई जानकारी नहीं है. आर के सिंह का यह बयान सुशील कुमार शिंदे के उस बयान से चंद दिन पहले आया था, जिसमें शिंदे ने दावा किया था कि भारत एफबीआई के सहयोग से दाऊद को जल्द भारत लाएगी.

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