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तवांग मठ पहुंचे दलाई लामा, पूरे तवांग को भारत और तिब्बत के झंडों से सजाया गया

आठ सालों बाद दलाई लामा का यह पहला अरुणाचल दौरा होगा इससे पहले सन् 2009 में उन्होंने अरुणाचल प्रदेश का दौरा किया था

IANS Updated On: Apr 07, 2017 11:42 PM IST

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तवांग मठ पहुंचे दलाई लामा, पूरे तवांग को भारत और तिब्बत के झंडों से सजाया गया

तिब्बतियों के आध्यात्मिक गुरु दलाईलामा चीन की नाराजगी को नजरअंदाज कर शुक्रवार को तवांग मठ पहुंचे. मठ में बौद्ध भिक्षुओं और कई श्रद्धालुओं ने उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया.

शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित दलाई लामा तवांग मठ में ठहरेंगे. यह मठ भारत का सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बौद्ध मठ है. दुनिया का सबसे बड़ा बौद्ध मठ तिब्बत का पोटला पैलेस है.

प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू तिब्बती धर्मगुरु के साथ ही हैं. दलाई लामा सन् 1959 से ही भारत में निर्वासित जीवन जी रहे हैं.

बर्फ से घिरे पहाड़ों और 10,000 फुट की ऊंचाई पर स्थित तवांग में मोनपा लोग रहते हैं, जो तिब्बती बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं.

पूरे तवांग को भारत और तिब्बत के झंडों से सजाया गया

दलाई लामा के दौरे के मद्देनजर पूरे तवांग को भारत और तिब्बत के झंडों और फूलों के साथ रंगीन प्रार्थना झंडों से सजाया गया. सड़कों को रंगा गया और नालों की सफाई की गई.

एक अधिकारी ने बताया , ‘सैकड़ों की तादाद में लोग पारंपरिक औपचारिक स्कार्फ लिए हुए सड़क पर अगरबत्तियां जला कर दलाई लामा के दर्शन और उनका आशीर्वाद लेने के लिए कतार में खड़े थे.’

दलाई लामा की एक झलक पाने के लिए लद्दाख और पड़ोसी देश भूटान से हजारों की तादाद में लोग तवांग पहुंचे.

मठ के सचिव लोबसांग खुम ने कहा, ‘हम दलाई लामा की यात्रा की तैयारी पिछले दो महीने से कर रहे हैं. हर कोई उनकी एक झलक पाना, उनसे बातें करना और उनका आशीर्वाद लेना चाहता है. दलाई लामा हमारे श्रद्धेय धर्मगुरु हैं.’

1959 में कुछ दिनों के लिए तवांग मठ में ठहरे थे दलाईलामा

तवांग मठ गोलुगपा स्कूल ऑफ महायान बुद्धिज्म से जुड़ा है और इसका संबंध ल्हासा के द्रेपुंग मठ से है, जो ब्रिटिश काल से ही बरकरार है.

सन् 1959 में तिब्बत से निर्वासित होने के बाद असम पहुंचने से पहले दलाईलामा कुछ दिनों के लिए तवांग मठ में ठहरे थे.

दलाई लामा सबसे पहले बोमडिला पहुंचे. जो अरुणाचल प्रदेश में पश्चिमी कामेंग का जिला मुख्यालय है. जहां उन्होंने धार्मिक प्रवचन दिया और लोगों से बातचीत की.

आठ सालों बाद दलाई लामा का पहला अरुणाचल दौरा

उसके बाद वह तवांग से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित दिरांग घाटी पहुंचे.  जहां उन्होंने थूपसंग धारगेलिंग मठ में गुरुवार को प्रवचन दिया.

वह शुक्रवार को ही दिन में सड़क मार्ग के जरिए दिरांग से तवांग के लिए रवाना हुए थे. यह आठ सालों के बाद दलाई लामा का पहला अरुणाचल दौरा होगा.

दलाई लामा ने इस पहाड़ी राज्य का पहला दौरा सन् 1983 में किया था और अंतिम दौरा सन् 2009 में किया था. चीन ने दलाईलामा के अरुणाचल प्रदेश दौरे का विरोध किया है. चीन अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा मानता है.

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