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नक्सल को 'काटेगा' कोबरा: सुकमा में 2000 कमांडो की तैनाती जल्द

कोबरा कमांडो की कुल 154 में से 44 टीमें इस समय बस्तर मंडल में तैनात हैं

Bhasha | Published On: May 09, 2017 10:12 AM IST | Updated On: May 09, 2017 11:07 AM IST

नक्सल को 'काटेगा' कोबरा: सुकमा में 2000 कमांडो की तैनाती जल्द

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिये केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के छापामार युद्ध में पारंगत कोबरा बटालियन के 2000 कमांडो को जल्द तैनात किया जाएगा.

सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सुकमा और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बल के जवानों पर 24 अप्रैल को हुए हमले के बाद हाल ही में नक्सलियों के अब तक के सबसे घातक हमलों को देखते हुए यह फैसला किया गया है. इससे पहले 11 मार्च को नक्सल हमले में सीआरपीएफ के 12 जवान और 24 अप्रैल के हमले में 25 जवान शहीद हो गए थे.

अधिकारी ने बताया कि इस तरह के हमलों के मद्देनजर इस क्षेत्र में कोबरा कमांडो की कम से कम 20 से 25 कंपनियां तैनात करने की कार्ययोजना तैयार कर ली गई है. कोबरा कमांडो की एक कंपनी में लगभग 100 जवान होते हैं.

इनकी तैनाती फिलहाल पश्चिम बंगाल, बिहार, तेलंगाना और मध्य प्रदेश के सर्वाधिक नक्सल प्रभावित इलाकों में है. उन्होंने यहां से जल्द ही कोबरा कमांडो को सुकमा क्षेत्र में स्थानांतरित करने की पुष्टि की. सिर्फ खुफिया सूचनाओं पर नक्सलरोधी अभियानों को संचालित करने के लिए प्रशिक्षित किए जाने वाले कोबरा कमांडो की कार्रवाई शत्रु के ठिकानों को नष्ट कर धन-जन की हानि को न्यूनतम करने पर केन्द्रित होती है.

कोबरा कमांडो की कुल 154 में से 44 टीमें इस समय छत्तीसगढ़ के बस्तर मंडल में तैनात हैं. बस्तर मंडल में सुकमा और दंतेवाड़ा सहित अन्य जिले शामिल हैं.

सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में नक्सल प्रभावित राज्यों की बैठक में नक्सली हिंसा से निपटने के लिये केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की बटालियनों की संख्या बढ़ाने की मांग पर केन्द्र सरकार ने असहमति जताई है. इसमें केन्द्र सरकार की दलील है कि बटालियन की संख्या बढ़ाने के बजाय नक्सल विरोधी अभियानों को प्रभावी बनाने पर जोर दिया जाना चाहिए.

हालांकि मंत्रालय ने बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों की अति सक्रियता वाले इलाकों में सीआरपीएफ और बीएसएफ की बटालियनों की फिर से तैनाती पर सहमति जताई है. साथ ही मंत्रालय ने इन इलाकों में वायु सेना के हेलीकॉटर से निगरानी की अवधि को बढ़ाने की योजना बनायी है. इसमें हेलीकॉप्टर से प्रतिमाह 120 घंटे निगरानी को बढ़ाकर 160 घंटे करने का विचार है.

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