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'देशभक्ति' गंदी नहीं होती, क्रिकेटर गौतम गंभीर ने दुनिया के सामने रखी मिसाल

सुकमा हमले की तस्वीरों ने गौतम गंभीर को इतना परेशान किया कि वे खेल पर ध्यान नहीं लगा पा रहे थे

Sreemoy Talukdar Updated On: May 01, 2017 11:59 AM IST

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'देशभक्ति' गंदी नहीं होती, क्रिकेटर गौतम गंभीर ने दुनिया के सामने रखी मिसाल

शाहरुख खान बोलने की कला में माहिर हैं. 'टेड टॉक' के वार्षिक सम्मेलन में 'मानवता' पर जो बयान उन्होंने दिया है वह उनकी बोलने की बेहतरीन कला का उदाहरण है और जिसका आने वाले दिनों में अक्सर जिक्र किया जाता रहेगा.

दिग्गज बॉलीवुड कलाकार के वैंकूवर में शनिवार को दिए भाषण की खूब सराहना हो रही है. उन्होंने कहा- 'मानवता बहुत कुछ मेरी तरह है. यह ढलती उम्र वाले फिल्मी सितारे की तरह है जो आसपास के नयेपन से जूझ रही है और अपना मुकाम तलाशने में लगी है.'

शाहरुख खान के शब्द बताते हैं कि उन्हें आने वाले समय का पहले से ही अहसास है. 'मिड लाइफ' क्राइसिस का मतलब उस दुनिया से है, जहां हम लगातार गिरते मूल्यों के साथ जीते रहे हैं. दुनिया के सबसे बड़े और विविधता वाले लोकतंत्र से अच्छा इसका कोई दूसरा उदाहरण शायद नहीं मिलेगा.

लेखक गुंटर ग्रास ने कभी कहा था, 'नागरिक का कर्तव्य है कि वो अपनी ज़ुबान हमेशा खुली रखे.' ठीक उसी तरह जैसे पानी में रहने वाले बत्तखों का होता है.

हम भारतीयों ने नोबल विजेता जर्मन लेखक की सलाह भी मान ली है. मुश्किल ये है कि आधुनिक बहस गहराते संकट के बीच देश को विनाश की ओर ले जाता है. वह सम्मानित तर्कवादी परंपरा के साथ खड़ा नहीं रहता.

दूसरे शब्दों में गिरते मूल्यों के हिसाब से हमारा मानदंड बहुत ही सामान्य हो गया है. ये हमें मैकबेथ की चुड़ैलों की दुनिया की याद दिलाती है, जहां 'निष्पक्षता ही बेईमानी और बेईमानी ही निष्पक्षता' हुआ करती थीं.

उदाहरण के लिए गौतम गम्भीर को लें. पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान जो इंडियन प्रीमियर लीग के कोलकाता फ्रेंचाइजी के लिए खेलते हैं उन्होंने घोषणा की है कि वे छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में माओवादी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों की बच्चों की शिक्षा का सारा खर्च वहन करेंगे.

इस नेक मकसद के लिए उनकी चारों ओर तारीफ हुई है.

Shahrukh

गंभीर की तारीफ

हिन्दुस्तान टाइम्स के अपने कॉलम में गम्भीर ने इसके पीछे की प्रेरणा के बारे में विस्तार से बताया है- 'बुधवार की सुबह, मैंने अखबार उठाया और ताजा हमले में मारे गये सीआरपीएफ जवानों की बेटियों की दिल को छूने वाली तस्वीरें देखीं. एक अपने शहीद पिता को सैल्यूट कर रही थी जबकि दूसरी तस्वीर में शोक में डूबी महिला को उनके संबंधी सांत्वना दे रहे थे.'

इन तस्वीरों ने इतना परेशान किया कि यह दिग्गज पेशेवर खिलाड़ी भी अपने खेल पर ध्यान नहीं लगा सका. कोलकाता नाइट राइडर्स के आधिकारिक वेबसाइट पर गम्भीर ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि 25 जवानों की बेरहमी से हत्या और दिल दहला देने वाली तस्वीरों ने मुद्दे की गम्भीरता की ओर हम सबको को ध्यान दिलाया है.

ये समस्या हमें लीलती जा रही है और जवानों के परिवारों को इतनी बड़ी पीड़ा झेलनी पड़ रही है. उनके शब्दों में, 'हमें (बुधवार) शाम में राइजिंग पुणे सुपरजाइंट के खिलाफ खेलना था. जैसे-जैसे दिन बीता और मैं सेलेक्शन मीटिंग, बैट्समेन मीटिंग, बोलर्स मीटिंग करता रहा, तस्वीरें मुझ पर हावी होती रहीं. मैंने खुद से सोचा कि केकेआर हारे या जीते, इससे उन 25 सीआरपीएफ जवानों के परिवारों को क्या मतलब....मैंने सोचना जारी रखा और कुछ चीजें तय कीं.'

वे आगे लिखते हैं, 'पहली कि मेरी टीम केकेआर काली पट्टी लगाकर खेलेगी ताकि शोक में डूबे परिवारों के साथ मजबूती दिखायी जा सके. दूसरी कि गौतम गम्भीर फाउन्डेशन उन शहीदों के सभी बच्चों की पढ़ाई का ख्याल करेगी. मेरी टीम ने इस पर काम करना शुरू भी कर दिया है और जल्द ही इसकी प्रगति आप सब से साझा करूंगा.'

इस फैसले ने शायद उन्हें थोड़ी राहत दी हो लेकिन जैसा कि उन्होंने बाद में अपने पोस्ट में बताया कि संघर्ष ने उनका पीछा नहीं छोड़ा. एक कप्तान के रूप में उदाहरण रखते हुए चुनौतियों का सामना करने की जगह उन्होंने टीम के साथियों को उनकी गलतियों के लिए फटकारा तक नहीं.

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, 'कुछ घटनाएं मुझे इतना हिला देती हैं कि मैं क्रिकेट खेलने का मतलब ही भूल जाता हूं.' गम्भीर ने यह भी घोषणा की कि 10वें आईपीएल से मिलने वाली पुरस्कार राशि सुकमा में शहीद हुए जवानों के परिवारों को दान कर देंगे.

उन्होंने कहा कि, 'टीम वर्क और निस्वार्थ भावना जैसे मूल्यों के प्रति सम्मान ही सशस्त्र सुरक्षा बलों के प्रति उनके प्यार की भी वजह है. हालांकि, उन्होंने सावधानी से यह भी जोड़ा कि, 'देश के लिए अपनों को खोने की तुलना क्रिकेट मैच में हार से कभी नहीं हो सकती.'

COLCHESTER, ENGLAND - AUGUST 20: Gautam Gambir of Essex during day one of the LV County Championship Division Two game between Essex and Northamptonshire at Castle Park on August 20, 2013 in Colchester, England. (Photo by Scott Heavey/Getty Images)

संजीदा पेशेवर

हम जो यहां देखते हैं वह है मानवता की अभिव्यक्ति जिसे एक बेहद सफल और संजीदा पेशेवर ने दिखाया है. जिस मूल्य में वे विश्वास रखते हैं जिस आचार-व्यवहार को वे जीते हैं उसके प्रति उन्होंने गहरा लगाव दिखाया है.

आचारसंहिता और मूल्यों में यह विश्वास ही हमें जोड़ता है और जिसकी वजह से ही हमारे सबसे प्रशंसित और निपुण एथलीटों ने (क्रिकेटर, पहलवान) ट्विटर पर अपने गुस्से का इजहार किया है.

इसमें जवानों ने जो दिक्कतें झेलीं जिन त्रासदियों का वे शिकार हुए उसके लिए उन्होंने उनकी तारीफ और दुख का इजहार किया. ये पेशेवर एकता के मूल्य को अहमियत देते हैं क्योंकि हमारी तुलना में वो इसके साथ ज्यादा जीते हैं.

उनके लिए देशभक्ति कोरे विचार नहीं है बल्कि वास्तविकता है जिसके लिए लड़ना होता है और जिसकी रक्षा करनी होती है. दुर्भाग्य से मूल्य का मतलब इतना उलट गया है कि देशभक्ति अब बहुत गंदा शब्द बन गया है. जो इसकी कसम खाते हैं उन्हें कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है और वे ट्रोल होते हैं.

गम्भीर ने खुद को ऐसे व्यक्ति के तौर पर दिखाया है जो तय मुहावरों से परे जाते हुए अपनी कथनी के मुताबिक काम भी करते हैं. इस रुख के लिए वे आलोचनाओं की जद में आ गए हैं.

इस मिसाल में जैसा कि बताया जा रहा है 'देशभक्ति' फासीवाद की अभिव्यक्ति है. दुख की बात है कि इस देश में भारत की अखंडता और इसे टुकड़ों में बांटने को लेकर लगते नारे का मतलब 'देशभक्ति' माना जाता है लेकिन जवानों के साथ खड़े रहने को फासीवादी करार दिया जाता है.

आतंकवाद के पीछे के 'जमीनी कारणों' को ढूंढ़ना 'देशभक्ति' है. लेकिन हिंसा और खून का सहारा लेने वाली ताकतों को कुचलने का आह्वान 'देशभक्ति नहीं है.

हमने नैतिकता को ताक पर रख दिया है और व्यक्तिगत आजादी के पवित्र डोर को पकड़कर चिल्ला रहे हैं. हम भूल गए हैं कि ऐसी देशभक्ति बिना ऑक्सीजन के जिन्दा नहीं रह सकती.

जरूरत है कि जो व्यक्ति एक देश को बांधता और जोड़ता है उसकी पहचान की जाए. इसके बिना एक देश अपना आधार खो देता है. मानवता का संकट जिसका शाहरुख खान ने अपने बयान में जिक्र किया है उस सिद्धांत का मतलब है जो सामूहिकता को व्यक्तिगत से ऊपर रखता है.

यही हमारी सभी परेशानियों की जड़ है.

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