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कांग्रेस की रणनीति: कोविंद को टक्कर देने के लिए खड़ा करेगी दलित उम्मीदवार

दलित के मुकाबले किसानों का मसीहा कहे जाने वाले स्वामीनाथन, कोविंद को कड़ी टक्कर देंगे

FP Staff Updated On: Jun 20, 2017 10:36 PM IST

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कांग्रेस की रणनीति: कोविंद को टक्कर देने के लिए खड़ा करेगी दलित उम्मीदवार

राष्ट्रपति चुनाव की गहमागहमी के बीच कांग्रेस ने नया पैंतरा चलाया है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के मुकाबले कांग्रेस ने हरित क्रांति के जनक स्वामीनाथन को चुनावी मैदान में उतारने का मन बना लिया है.

कांग्रेस की रणनीतिक सोच ये है कि दलित के मुकाबले किसानों का मसीहा कहे जाने वाले स्वामीनाथन, कोविंद को कड़ी टक्कर देंगे. कांग्रेस को उम्मीद है कि शिवसेना स्वामीनाथन के नाम पर समर्थन दे सकती है क्योंकि खुद शिवसेना ने ही सबसे पहले उनका नाम उछाला था. कांग्रेस को डर है कि नीतीश, कोविंद का समर्थन कर सकते हैं, लिहाजा उसकी भरपाई के लिए शिवसेना को साधा जाना ज़रूरी है.

वैसे कांग्रेस इस बार अपना कोई नेता मैदान में नहीं उतारना चाहती है. वो 2019 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए बड़ा दिल दिखाने के लिए सहयोगियों की पसंद को ही समर्थन देना चाहती है. स्वामीनाथन इस फॉर्मूले पर फिट बैठते हैं. वो किसी दल के नहीं हैं और उनका नाम पहले ही उछाला जा चुका है. कद भी बड़ा है. स्वामीनाथन का नाम कलाम की तर्ज पर सबको मंजूर हो सकता है.

ये विचारधारा की लड़ाई है न की व्यक्ति या पद की.

वैसे स्वामीनाथन के नाम पर आम सहमति न बन पाने को सूरत में दूसरे विकल्प भी कांग्रेस के पास तैयार हैं. प्लान बी के मुताबिक अगर लेफ्ट सहित अन्य दल दलित के मुकाबले दलित ही उतारने पर ज़ोर दें तो पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार या पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे को मैदान में उतारा जा सकता है.

बीएसपी प्रमुख मायावती पहले ही संकेत दे चुकी हैं कि कोविंद के दलित होने के नाते वे उनका विरोध नहीं कर सकतीं, जब तक कि उनसे योग्य उम्मीदवार यूपीए न उतारे.

इन सब से इतर गोपाल कृष्ण गांधी लेफ्ट और कांग्रेस दोनों की पसंद होने के नाते अब भी दौड़ में बने हुए हैं.

22 जून को दिल्ली में विपक्षी दलों की बैठक होनी है, जिसमे राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के.नाम का एलान किया जायेगा क्योंकि कोविंद को समर्थन की संभावना बेहद कम है. लालू और सीताराम येचुरी पहले ही कह चुके हैं कि ये विचारधारा की लड़ाई है न की व्यक्ति या पद की.

कांग्रेस अपना पक्ष इस बैठक में रखेगी और सहयोगी दलों का समर्थन मिलने के बाद ही स्वामीनाथन के नाम पर अंतिम फैसला लेगी या फिर सहयोगी दलों की पसंद को ही समर्थन दे देगी.

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