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मासूम मिनी की बनाई तस्वीर ने 'हैवान' अंकल की पोल खोल दी

जिस दर्द की कहानी मिनी जुबान से सुना नहीं पाई थी वो उसने कागज पर उतार दी

Ankita Virmani Ankita Virmani Updated On: Jun 16, 2017 11:40 AM IST

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मासूम मिनी की बनाई तस्वीर ने 'हैवान' अंकल की पोल खोल दी

बड़े-बड़े पहाड़ और उसके आगे एक छोटा सा घर. पहाड़ के बीच से निकलता सूरज और घर के बगल में बहती नदी...रंगों से भरी कुछ ऐसी ही होती थी ना, नन्हें हाथों से बनी तस्वीर.

लेकिन जब किसी मासूम के हाथों से बनने वाली ऐसी ही कोई तस्वीर दर्दनाक कहानी बयान करने लगे तो ये चिंता का विषय हो सकता है.

एक ऐसी ही तस्वीर बयान करती है मिनी (काल्पनिक नाम) के दर्द की कहानी.

अपने ही अंकल अख्तर अहमद के हाथों मिनी यौन उत्पीड़न का शिकार होती रही. कोलकाता में मां को खोने के बाद पिता ने भी मिनी को छोड़ दिया था. 8 साल की मिनी को उसकी आंटी दिल्ली ले आई, पर छोटी सी उम्र में यहां मिनी को उस दर्द का सामना करना पड़ा, जिसका बयान वो खुद भी शब्दों में ठीक से नहीं कर पाई.

मिनी साल 2014 के नवंबर महीने में घर से भाग गई और एक बस में मिली. हक-सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स  ने मिनी को काउंसल किया, पर मिनी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक भी अख्तर तक पहुंचने में लंबा वक्त लगा.

साल 2016 के जून महीने में पुलिस ने मिनी के अंकल को गिरफ्तार भी किया, पर हाल में जब मामला कोर्ट पहुंचा तो मिनी की मेडिकल जांच में संभवतः यौन उत्पीड़न की बात कही गई. वकील ने ऐसी दलील दी कि बच्ची छोटी है और उसे ऐसा बोलने के लिए सिखाया गया है.

मिनी की बनाई तस्वीर ने पूरी कहानी बयान की

जिस वक्त केस की सुनवाई कोर्ट में चल रही थी, उस वक्त मिनी का ध्यान वहां से हटाने के लिए उसे कागज और क्रेयॉन रंग दिए गए. दर्द की जो कहानी मिनी अपनी जुबान से नहीं सुना पाई, उसने वो उस कागज पर उतार दी. मिनी की बनाई तस्वीर ने पूरे दर्द की कहानी बयान कर दी.

एक छोड़ा हुआ घर, घर के बाहर गुब्बारे लिए खड़ी एक छोटी सी बच्ची और दूर पड़े उसके कपड़े. गाढ़े रंगों से भरी थी मिनी की ये तस्वीर.

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एडिशनल सेशन जज विनोद यादव ने तस्वीर के आधार पर मिनी के अंकल को पांच साल की सजा सुनाई. जज ने कहा कि मिनी के साथ जो हुआ उसकी छाप उसके दिमाग पर है और ये तस्वीर उसे बयान करती है.

आंकड़ों पर जरा ध्यान दीजिए

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक सिर्फ साल 2015 में यौन अपराध के खिलाफ बच्चों का संरक्षण कानून के तहत 14913 मामले दर्ज किए गए हैं. जिनमें 8800 मामले सिर्फ रेप के हैं.

और अब इससे भी कड़वा सच

इन आंकड़ों में 10 प्रतिशत में से ज्यादा मामलों में अपराध को अंजाम देने वाले बच्चों के परिवार या रिश्तेदारो में से थे. वहीं बात बच्चों के साथ हुए रेप मामलों की करें तो 94.8 प्रतिशत मामलों में ऐसा करने वाला कोई परिवार का जानने वाला था.

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