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केरल में खुलकर पीने की आजादी के मायने

केरल सरकार ने नई लिकर पॉलिसी का ऐलान किया है.

Subhesh Sharma | Published On: Jun 09, 2017 05:41 PM IST | Updated On: Jun 09, 2017 05:42 PM IST

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केरल में खुलकर पीने की आजादी के मायने

केरल सरकार ने अपने राज्य में शराब प्रेमियों को एक बड़ी खुशी दी है. सरकार ने नई लिकर पॉलिसी का ऐलान किया है. जिसकी मदद से अब पिछले काफी समय से बेड़ियों में बंधा से महसूस कर रहे शराब पीने वाले खुल कर जाम लड़ा सकेंगे.

केरल सरकार ने पूर्व की यूडीएफ सरकार के फैसले को पलट दिया है. इस फैसले से यूडीएफ द्वारा बंद किए 700 से ज्यादा बियर बार को राहत की सांस मिली है. यकीनन केरल सरकार का ये फैसला उन राज्यों के लोगों के लिए किसी उम्मीद की किरण से कम नहीं है, जहां पूर्ण रूप से शराबबंदी लागू है.

नई लिकर पॉलिसी में हुए बदलाव

- राज्य सरकार ने शराब पीने की उम्र में भी बदलाव किया है. केरल में पहले शराब पीने की न्यूनतम उम्र 21 साल थी जिसे अब बढ़कार 23 साल कर दी गई है. - थ्री-स्टार या उससे ऊपर के होटलों को शराब परोसने की अनुमति मिली. - जिन बारों को पहले बंद किया गया था वो भी अब शराब सर्व कर पाएंगे. - नई पॉलिसी में बारों के खुले रहने का समय भी बदला गया है. अब बार सुबह 11 बजे से रात 11 बजे तक खुले रहेंगे. इससे पहले बार खोलने की अनुमति सिर्फ सुबह 9.30 बजे से रात के 10 बजे तक ही थी.

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हमारे देश में आम मान्यता यही है कि शराब पीना किसी घोर पाप करने से कम नहीं है और इसकी सजा मरने के बाद नरक में मिलती है. दरअसल में शराब पीना लोगों की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बन चुका है.

कुछ के लिए मधुशाला मंदिर है तो कुछ के लिए ये बर्बादी की सीढ़ी चढ़ने जैसा है. हिंदी साहित्य के जाने-माने कवि हरिवंश राय बच्चन ने एक बड़ी अच्छी बात कही थी... 'मंदिर मस्जिद बैर कराती, मेल कराती मधुशाला'. लेकिन मौजूदा समय में आलम ये है कि लोग हर बात में शराब को ही ब्लेम करने में तुले पड़े हैं.

राजनीतिक लाभ

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने चुनाव प्रचार में ऐलान किया था कि अगर वो सत्ता में आए तो प्रदेश में शराब बैन कर देंगे. नीतीश दोबारा बिहार के मुख्यमंत्री चुने गए. उनके इस फैसले का खासतौर पर महिलाओं ने तहे दिल से स्वागत किया था.

बिहार के अलावा तमिलनाडु चुनाव में भी शराब पर बैन लगाने की होड़ मची हुई थी. जयललिता ने कहा था कि अगर वो फिर से चुन कर आई तो शराबबंदी लागू होगी, जिसके जवाब में डीएमके ने भी पूर्ण शराबबंदी का वादा किया था.

नेता अपने भाषणों में वादे करते हैं कि हम गरीबी-भुखमरी भले ही न हटा पाएं पर सभी महिलाओं के पतियों के मुंह से शराब जरूर छुड़वा देंगे. नेता जी की ये बात सुनकर हर एक टिपिकल भारतीय नारी के दिल को यकीनन ठंडक मिलती है.

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शराब पीकर लोग करते हैं बवाल

शराबबंदी के पक्ष में तर्क है कि शराब की वजह से घरेलू हिंसा होती है. घटिया शराब से हर साल हजारों मौत होती हैं. शराब से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है.

वहीं शराबबंदी के विरोध में तर्क दिए जाते हैं कि खाने-पीने पर रोक नहीं होनी चाहिए. ये बात सच है कि लोग शराब पीकर खूब बवाल काटते हैं और महिलाओं को परेशान भी करते हैं. इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि मर्डर और रेप जैसे गंभीर अपराध के पीछे नशा जिम्मेदार होता है. लेकिन समाज सुधार का एकमात्र विकल्प शराबबंदी नहीं हैं. लोग अपनी सोच का दायरा बढ़ा लें तो शराबबंदी जैसे कोई कदम उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

गुजरात के पास है पीने का हल

केरल सरकार द्वारा लिकर पॉलिसी में किए गए बदलावों से बिहार समेत कई अन्य राज्य भी कुछ सीख ले सकते हैं और शराबबंदी की परिभाषा को थोड़ा बदल सकते हैं.

गुजरात की बात करें तो यहां 1960 से शराबबंदी है. लेकिन यहां लोगों के पास पास शराब खरीदने और पीने का परमिट है. गुजरात में प्रोहेविशन विभाग से परमिट लेकर सिविल अस्पताल के डॉक्टर से किसी ऐसी बीमारी का सर्टिफिकेट लेना पड़ता है, जिसके इलाज में शराब अहम हो.

गुजरात में करीब 60 हजार लोगों के पास हेल्थ परमिट है. वहीं जिनके पास परमिट नहीं है वो गुजरात के बॉर्डर से सटे राजस्थान या फिर दमन-दीव से अवैध ढंग से मंगाई गई शराब का लुत्फ तो उठा ही सकते हैं.

दिल्ली, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों का क्या है विचार

कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस सरकार भी राज्य में शराबबंदी करने की तैयारी कर रही है. जानकारी के अनुसार, यहां तीन जिलों में शराब पर बैन है.

मध्य प्रदेश में भी सीएम शिवराज सिंह चौहान ने शराबबंदी को लेकर कहा था कि राज्य में शराब की कोई नई दुकान नहीं खुलेगी. शराब कारखानों को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा. लेकिन उनका भी शराबबंदी करने का कोई विचार नहीं है.

जहां ओडिशा सरकार ने शराबबंदी को अवास्तविक करार दिया था, तो वहीं दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पहले ही साफ कर चुके हैं कि दिल्ली में शराब पर बैन नहीं लगेगा.

इतनी फायदेमंद चीज को क्यों बंद कराने पर पड़ी है दुनिया

कहते हैं भारत पर 200 साल से ज्यादा राज करने वाले अंग्रेज शराब मजे के लिए पीते थे, यानि लिमिट में. अगर शराब का सेवन लिमिट में किया जाए तो काफी फायदेमंद साबित हो सकती है. शराब दिमाग के लिए फायदेमंद होती है, बशर्ते थोड़ी पी जाए तभी.

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रेड वाइन पीने से दिल की बीमारी से लड़ने में फायदा मिलता है. लो ब्लड प्रेशर वालों के लिए शराब फायदेमंद साबित हो सकती है, क्योंकि इससे दिल की धड़कन बढ़ जाती है. हिसाब से शराब पीने से टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा कम हो जाता है.

देश के किन राज्यों में है शराबबंदी

गुजरात, नगालैंड और मिजोरम के बाद बिहार देश का चौथा 'ड्राई स्टेट' बना था. वहीं बिहार से पहले केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, मिजोरम और हरियाणा में भी शराब पर प्रतिबंध की घोषणा की गई थी. लेकिन यह ज्यादा दिन तक चली नहीं.

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