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देश की भ्रष्ट राजनीति ने तांत्रिक चंद्रास्वामी को बुलंदियों पर पहुंचाया था

देश के पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर सार्वजनिक तौर पर यह कहने से हिचकिचाते नहीं थे कि चन्द्रास्वामी हमारे दोस्त हैं

Suresh Bafna Updated On: May 24, 2017 11:26 AM IST

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देश की भ्रष्ट राजनीति ने तांत्रिक चंद्रास्वामी को बुलंदियों पर पहुंचाया था

चन्द्रास्वामी के बारे में कहा जाता है कि वे ज्योतिष और तंत्र विज्ञान के ज्ञाता थे और अपनी इस ताकत के माध्यम से किसी राजनेता को सत्ता की कुर्सी तक पहुंचा सकते थे या कुर्सी से बेदखल भी कर सकते थे. उनसे आध्यात्मिक ज्ञान पानेवालों की सूची में हॉलीवुड की अभिनेत्री एजिलाबेथ टेलर से लेकर ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मारग्रेट थैचर का नाम भी शामिल है.

यह सूची समाजशास्त्रीय अध्ययन की दृष्टि से काफी दिलचस्प है, जिसमें हथियारों के अन्तर्राष्ट्रीय सौदागर अदनान खशोगी और माफिया डॅान दाऊद इब्राहिम भी शुमार है. चन्द्रास्वामी की राजनीतिक व व्यावसायिक दलाली की ताकत का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि पिछले कई सालों से बदनामी की जिन्दगी जीने के बावजूद उनके दिल्ली स्थित आश्रम में उनके जन्मदिन पर बधाई देनेवालों की लाइन में कई बड़े नेता भी दिखाई देते थे. कई नेताअों को अभी भी विश्वास था कि वे अपनी तंत्र विद्या व राजनीतिक संपर्क के माध्यम से उनको सत्ता की कुर्सी तक पहुंचा सकते हैं.

राजनीति में चंद्रास्वामी के दोस्तों और शिष्यों की भरमार थी

देश के पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर सार्वजनिक तौर पर यह कहने से हिचकिचाते नहीं थे कि चन्द्रास्वामी हमारे दोस्त हैं, वहीं पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव खुद को योग्य शिष्य मानते थे. चन्द्रास्वामी के असली आदर्श धीरेन्द्र ब्रह्मचारी थे, जिन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सत्ता चक्र में रासपुतिन का दर्जा प्राप्त कर लिया था. इसलिए उन्हें धर्म की बजाय सत्ता के गलियारों में घूमना अधिक रास आता था.

दुनिया का इतिहास यह बताता है कि राजनीति, व्यवसाय या जीवन के किसी भी शिखर पर पहुंचे व्यक्ति को असुरक्षा व अकेलेपन का सामना करना पड़ता है. चन्द्रास्वामी की तीसरी आंख ऐसे ही लोगों पर लगी रहती थी. उन्होंने अपने सत्ता, व्यवसाय व माफिया सरगनाअों के बीच संबंधों का इतना बड़ा जाल फैला लिया था कि हर व्यक्ति को यह लगता था कि उनसे कुछ प्राप्ति हो सकती है.

लाइसेंस-परमिट राज में नेताअों को राजनीतिक फंडिंग के लिए भ्रष्ट उद्योगपतियों की जरूरत थीं और भ्रष्ट उद्योगपतियों को अनुकूल नीतियां बनवाने व लाइसेंस-परमिट के लिए नेताअों की जरूरत थी. चन्द्रास्वामी का आश्रम ऐसे लोगों के लिए मिलन स्थली बन गया.

chandra swami

कहा जाता है कि 1980 में जब इंदिरा गांधी फिर से सत्ता में लौटी, तब राजनीतिक फंडिंग के बारे में कांग्रेस पार्टी के कुछ प्रभावकारी नेताअों ने निर्णय लिया कि उद्योगपतियों के भरोसे रहने की बजाय हथियारों के सौदों के माध्यम से धन जुटाया जाए. बात यहां तक कही जाती है कि इस निर्णय में स्वर्गीय अरुण नेहरू की भूमिका निर्णायक थी. इस निर्णय के महत्व को चन्द्रास्वामी ने तुरंत समझा और विदेशों में हथियारों के सौदागरों के साथ अपने संपर्कों का जाल फैलाना शुरू कर दिया.

चंद्रास्वामी के हथियारों के सौदागरों से थे रिश्ते

चन्द्रास्वामी और हथियारों के अन्तर्राष्ट्रीय सौदागर अदनान खशोगी के बीच रिश्तों को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए. चन्द्रास्वामी की विदेशी पहुंच में प्रवासी भारतीय उद्योगपतियों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है. ऐसे उद्योगपतियों के लिए चन्द्रास्वामी दिल्ली में पीआर एजेन्सी के रूप में काम करते रहे हैं.

इसी तरह जब भी कोई भारतीय नेता या उनके परिवार का सदस्य विदेश यात्रा पर जाता था तो चन्द्रास्वामी अपने एनआरआई संपर्कों के माध्यम से हर तरह की व्यवस्था करवा देते थे. इन संपर्कों के माध्यम से वे चुनाव के लिए धन उपलब्ध कराने की क्षमता भी रखते थे. इतना ही नहीं वे वहां नेताअों का सार्वजनिक सम्मान भी करवा देते थे.

1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने पर चन्द्रास्वामी का राजनीतिक सितारा एक बार फिर गर्दिश में डूबता दिखाई दिया. अपने योग्य शिष्य व तत्कालीन विदेश मंत्री नरसिंह राव के माध्यम से चन्द्रास्वामी ने राजीव गांधी को वशीभूत करने की कई कोशिशें की, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी.

कहा जाता है कि राजीव गांधी से चन्द्रास्वामी की नाराजगी इस कदर बढ़ गई कि उन्होंने राष्ट्रपति जैल सिंह से मिलकर राजीव को प्रधानमंत्री पद से हटाने की साजिश शुरू कर दी. देश की जांच एजेन्सियों के पास इस बात के प्रमाण हैं कि जो विवादास्पद पत्र जैल सिंह ने राजीव गांधी को लिखा था, उसका मसौदा राष्ट्रपति भवन के बाहर चन्द्रास्वामी की मौजूदगी में बना था. गिरफ्‍तारी से बचने के लिए तब चन्द्रास्वामी विदेश भाग गए थे.

rajiv gandhi

जैन आयोग की रिपोर्ट में गंभीर साजिश की आशंका

जैन आयोग की रिपोर्ट में इस बात की आशंका प्रकट की गई है कि चन्द्रास्वामी ने राजीव गांधी के हत्यारों को वित्तीय मदद उपलब्ध कराई थी. आश्रम पर छापे के दौरान मिले दस्तावेजों के अनुसार चन्द्रास्वामी ने अदनान खशोगी को गैर-कानूनी तौर पर 1 करोड़ 10 लाख डालर भिजवाए थे. सीबीआई के साथ अमेरिकी एजेन्सी एफबीआई ने भी चन्द्रास्वामी से पूछताछ की थी.

1996 में योग्य शिष्य नरसिंह राव के प्रधानमंत्री बनने के बाद एक बार फिर तांत्रिक चन्द्रास्वामी का राजनीतिक सितारा चमका और उनके आश्रम में नेताअों की भीड़ कई गुना बढ़ गई. चन्द्रास्वामी नरसिंह राव को ‘सुपरबॉस’ के रूप में संबोधित करते थे. जब राव के आंतरिक सुरक्षा मंत्री राजेश पायलट ने चन्द्रास्वामी के खिलाफ किसी मामले में गिरफ्तारी का वारंट जारी करवाया तो नरसिंह राव ने पायलट का विभाग ही बदल दिया था.

तांत्रिक चन्द्रास्वामी का सबसे बड़ा गुण यह था कि वे नेताअों की कमजोरियों को तुरंत समझ जाते थे और हर नेता के साथ अलग और अनुकूल व्यवहार करते थे. मारग्रेट थैचर को वे यह घुड़की देने में सफल रहे कि यदि वे लाल रंग का वस्त्र पहनेगी तो उनका राजनीतिक भाग्य चमकेगा. इस तरह की बातें उन्होंने कई अन्य नेताअों से भी कही होगी जो सफल नहीं हुए होंगे, लेकिन हमें सिर्फ वह बात पता है जो सही हो गई.

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