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चिदंबरम पर नकेल कसना उतना आसान नहीं, जितना सीबीआई समझ रही है?

चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम के घर सीबीआई का छापा पड़ा है

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: May 16, 2017 03:31 PM IST

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चिदंबरम पर नकेल कसना उतना आसान नहीं, जितना सीबीआई समझ रही है?

देश के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम के घर सीबीआई का छापा पड़ा है. वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पी चिंदबरम और उनके बेटे कार्ति के घर सीबीआई रेड को कांग्रेस पार्टी ने राजनीतिक दुर्भावना से ग्रस्त बताया है.

कांग्रेस ने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा है कि अगर कांग्रेस ने भी बीजेपी की तरह यह रणनीति अपनाई होती तो आज भारत में कोई दूसरी राजनीतिक पार्टियां नहीं होती.

सीबीआई ने पी चिदंबरम और उनके बेटे के कुल 16 ठिकानों पर छापेमारी की. केंद्रीय जांच एजेंसी ने पी चिदंबरम के चेन्नई स्थित निवास और कार्ति चिदंबरम के कराईकुडी के घर पर छापा मारा है.

सीबीआई का यह छापेमारी सोमवार को कार्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के बाद की गई है. सीबीआई की यह छापेमारी आईएनएक्स मीडिया(अब 9एक्स मीडिया) को दी गई मंजूरी को लेकर है. आईएनएक्स मीडिया के मुखिया पीटर मुखर्जी हैं.

आईनएनएक्स मीडिया के दोनों निदेशक पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी इस समय शीना बोरा हत्याकांड में जेल में बंद हैं. यह पूरा मामला शीना बोरा हत्याकांड के खुलासे के बाद सामने आया है. भारतीय जांच एजेंसी को पता चला है कि शीना बोरा का मर्डर पैसों के लेन-देन में गड़बड़ी के कारण ही हुआ है. सीबीआई ने आईएनएक्स मीडिया के खिलाफ सोमवार को ही मामला दर्ज किया था. पिछले कुछ दिनों से आईएनएक्स के निदेशक इंद्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी को फायदा पहुंचाने की बात सामने आ रही थी.

सीबीआई के सूत्रों से जानकारी मिली है कि कंपनी की तरफदारी तब की गई थी जब पी चिदंबरम वित्त मंत्री थे. सीबीआई ने आईएनएक्स मीडिया के अलावा कार्ति की कंपनी चेस मैनेजमेंट सर्विसेज और एडवांटेज कंसल्टिंग लिमिटेड निदेशक पद्मा विश्वनाथन के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है. इनके खिलाफ आपराधिक षडयंत्र, धोखाधड़ी और भ्रष्टचार के आरोप लगाए गए हैं.

यह पहला मौका नहीं है कि जब चिदंबरम के बेटे कार्ति पर कार्रवाई हुई है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कार्ति को 45 करोड़ रुपए के फेमा उल्लंघन मामले में भी नोटिस जारी कर चुका है. आरोप था कि वह वासन हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से कथित तौर पर जुड़े हुए हैं. इस कंपनी से जुड़े विदेशी निवेशकों से कई नामों से करीब 2100 करोड़ रुपए लिए गए. वहीं, कार्ति पर आरोप है कि 162 करोड़ रुपए अलग से भी लिए गए. आरोप है कि इस लेन देन में कार्ति चिदंबरम की कंपनी मैसर्स एडवांटेज स्ट्रेटजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड भी सीधे तौर पर शामिल थी. इस कंपनी को इसमें तकरीबन 45 करोड़ रुपए मिले थे.

देश के पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने केंद्र सरकार पर सीबीआई का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है. चिंदबरम ने कहा कि केंद्र सरकार सीबीआई का दुरुपयोग कर मेरे बेटे और उसके दोस्तों को टारगेट कर रही है. पूर्व वित्त मंत्री का कहना है 'केंद्र सरकार मुझे चुप करवाना चाहती है और मुझे लिखने से रोकना चाहती है जिस कारण ये सब किया जा रहा है.' बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी लगातार पी चिदंबरम पर इस डील में शामिल होने का आरोप लगा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने स्वामी की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए इसी साल फरवरी महीने में कहा था कि चिदंबरम के खिलाफ ठोस सबूत पेश करें.

बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि एयरसेल-मैक्सिस डील केस में चिदंबरम को भी सीबीआई जांच के घेरे में लाया जाए. स्वामी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि एयरसेल को मलेशिया की मैक्सिस कंपनी को बेचा गया था और ये डील इंडियन टेलिकॉम रूल्स के मुताबिक नहीं हुई थी.

उन्होंने दावा किया था कि यह डील टेलिकॉम सेक्टर में 74 फीसदी एफडीआई के विरूद्ध थी. चिदंबरम ने गैर कानूनी तरीके से विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) को मंजूरी दी थी.

सीबीआई ने तत्कालीन केंद्रीय वित्तमंत्री पी. चिदंबरम की ओर से 2006 में एयरसेल-मैक्सिस करार को एफआईपीबी की मंजूरी दिए जाने की परिस्थितियों की जांच कर रही है. वहीं चिदंबरम ने एक बयान जारी कर विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) द्वारा आईएनएक्स मीडिया को मंजूरी दिए जाने में किसी भी तरह की धांधली से इनकार किया है. उन्होंने कहा है कि एफआईपीबी की मंजूरी कई मामलों में दी गई. एफआईपीबी में शामिल पांच सचिव और अन्य अधिकारी सरकारी कर्मचारी हैं. उनके खिलाफ कोई मामला नहीं है. चिदंबरम का कहना है कि जब वह वित्त मंत्री थे तो हर मामले में नियमों के तहत कार्रवाई की गई और एफआईपीबी की अनुशंसा पर ही मंजूरी अथवा नामंजूरी दी गई. बीजेपी सरकार मेरे बेटे और उसके दोस्तों को निशाना बनाने के लिए सीबीआई और अन्य जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है.

सीबीआई एक तरफ पी चिदंबरम और उनके बेटे पर नकेल कसने की कोशिश कर रहा है तो दूसरी तरफ चिदंबरम भी भारतीय जांच एजेंसी पर जवाबी हमला बोल रहे हैं. भारतीय जांच एजेंसी को पता है कि पी चिदंबरम सिर्फ नेता ही नहीं है बल्कि देश के जाने माने वकील भी हैं. सीबीआई को भी पता है कि पी चिदंबरम इतने आसानी से उनके जाल में नहीं आ सकते हैं.

कानून की बारिकी को बहुत नजदीक से समझने वाले पी चिदंबरम के खिलाफ अगर सीबीआई कोई ठोस सबूत इकठ्ठा नहीं कर पाती है तो वह उसके लिए भी परेशानी का सबब साबित होगा.

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